भारतीय योग दर्शन : बेहतर पाचनतंत्र के लिए करें पवनमुक्तासन, पेट की सभी समस्याओं से मिलेगी मुक्ति, शरीर और मन को मिलेगी शक्ति

पाचनतंत्र की श्रेष्ठता के लिए योग में पवनमुक्तासन एक विशिष्ट आसन माना जाता है। इसके नियमित अभ्यास से पेट से संबंधित सभी परेशानियां धीरे-धीरे ठीक हो जाती हैं और पाचनतंत्र सुचारु रूप से कार्य करने लगता है। इसके साथ ही शरीर से वायु दोष दूर होता और लचीलापन बढ़ता है, साथ ही पेट की चर्बी घटती है ।

भारत (India) की प्राचीन धरोहर योग जीवन को जीने का सर्वश्रेष्ठ मार्ग प्रशस्त करता है। योग के नियमित अभ्यास से मनुष्य शारीरिक और मानसिक उन्नति को प्राप्त करता है। योग के साधक से प्रायः रोग और विकार दूर ही रहते हैं। योग में विभिन्न आसनों का समावेश है जो मानव शरीर के हर अंग के सुचारु संचालन के उद्देश्य से हमारे पूर्वज ऋषि-मुनियों के द्वारा अन्वेषित किए गए हैं। आध्यात्मिकता के साथ ही वैज्ञानिकता (scientism) योग साधना का का मुख्य आधार है। योग के सभी आसन जहां शरीर को दृढ़ता प्रदान करते हैं, वहीं मन को एकाग्रता पर केंद्रित भी इन आसनों के माध्यम से किया जा सकता है।

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पवनमुक्तासन से बेहतर होता है पाचनतंत्र

मानव शरीर में पाचनतंत्र की भूमिका अत्यंतमहत्वपूर्ण है, जोकि पेट से संबंधित होता है। पाचनतंत्र यदि सुचारु रूप से कार्य कर रहा है तो जहां मानव शरीर के सभी अंग सकारात्मक स्थिति में होते हैं, वहीं पाचनतंत्र में किसी प्रकार का विकार होने से शरीर के विभिन्न अंगों पर नकारात्मक असर देखने को मिलता है। पाचनतंत्र की श्रेष्ठता के लिए योग में पवनमुक्तासन एक विशिष्ट आसन माना जाता है। इसके नियमित अभ्यास से पेट से संबंधित सभी परेशानियां धीरे-धीरे ठीक हो जाती हैं और पाचनतंत्र सुचारु रूप से कार्य करने लगता है। इसके साथ ही शरीर से वायु दोष दूर होता और लचीलापन बढ़ता है, साथ ही पेट की चर्बी घटती है ।

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पवनमुक्तासन करने की विधि

पवनमुक्तासन को करने के लिए पेट का खाली होना आवश्यक है। इसको करने के लिए साफ और खुली हवा की जगह पर दरी,चादर अथवा चटाई बिछा लें।फिर उसपर पीठ के बल लेट जाएं और अपने हाथ-पैरों को सीधा फैला लें। कुछ देर इस स्थिती में शरीर को ढीला छोड़ दें। फिर श्वांस लेते हुए धीरे-धीरे घुटनों को मोड़े और हाथों की सहायता से छाती तक लाएं। इसके बाद लेटे हुए अपना सिर उठाएं और मस्तक को घुटनों पर लगाने की कोशिश करें। कुछ देर इसी स्थिती में रुके और श्वांस को स्थिर रखें । अब धीरे-धीरे श्वास को छोड़ते हुए घुटनों को फैला लें और पुनः पूर्व की स्थिति में आ जाएं। उसके बाद श्वास प्रश्वास को सामान्य रखते हुए कुछ देर शवासन की स्थिति में रहें।