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निगम की फल-सब्जी वितरण व्यवस्था पूरी तरह से फेल, मिल रहे बासी फल

इंदौर। इंदौर की जनता को लॉकडाउन में कोई परेशानी ना हो और सब्जियां मिलती रहे इसके लिए निगम ने सब्जी की घर पहुंच सेवा शुरू की थी। जिसके लिए निगम ने पैकेट्स बनाए थे। लेकिन निगम की ये व्यवस्था पहले दिन से ही गड़बड़ाने लगी थी और अब चौपट हो गई है। निगम के पास अब आर्डर की संख्या भी कम होने लगी है। राशन के तो अभी भी रोजाना 10 हजार तक ऑर्डर आ रहे हैं, लेकिन सब्जी और फलों के 4-5 हजार तक ही सीमित हो गए।

नगर निगम ने पहले राशन बंटवाया और उसके पैकेट घर-घर पहुंचाए। शुरुआत में हजारों की संख्या में ऑर्डर मिले और फिर धीरे-धीरे ऑनलाइन स्टोर और किराना व्यापारियों ने भी सप्लाय शुरू कर दी। यहां तक कि नगर निगम से जिन लोगों ने राशन के पैकेट लिए थे उनके पास चूंकि किराना व्यापारी का नंबर पहुंच गया, इसलिए अब वे सीधे निगम की बजाय इन व्यापारियों को ही ऑर्डर देने लगे। कलेक्टर मनीष सिंह की मंशा यह रही कि चोईथराम सहित सभी सब्जी, फल मंडियां बंद की जाए, क्योंकि यहां लगने वाली भीड़ के कारण कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा अधिक है और इंदौर में सैंकड़ों लोग सब्जियों से ही संक्रमित पाए गए।

यही कारण है कि कुछ बड़े सब्जी और फल व्यापारियों को पैकेट बनाकर घर-घर में सप्लाय करने का जिम्मा सौंपा गया, लेकिन शुरू के एक-दो दिन तो सप्लाय ठीक रही और सेनेटाइजेशन की प्रक्रिया भी की गई। मगर उसके बाद सब्जियों के पैकेटों में भी खराब और सस्ती सब्जियों की मात्रा अधिक आने लगी। लोकी और गिलकी जैसी सस्ती सब्जी पैकेटों में अधिक भरी जाने लगी, जिसके चलते 150 रुपए की सब्जी 60-70 रुपए में ही व्यापारियों को पड़ने लगी।

दूसरी तरफ 100 और 250 रुपए के फल के पैकेट भी उपलब्ध करवाना शुरू करवाना शुरू किए। 100 रुपए में तरबूज-खरबूज और 250 रु. में आम, पपीता, मोसम्बी दी जाने लगी, लेकिन जिन लोगों ने यह पैकेट लिए वे रोजाना शिकायत कर रहे हैं कि पिलपिले और दागी आम के साथ बासी पपीते दिए जा रहे हैं। वहीं आम की मात्रा कम और पपीते की ज्यादा रहती है। आम महंगा है और पपीता सस्ता मिल जाता है। यही कारण है कि सब्जी और फल के पैकेटों के ऑर्डर लगातार घटने लगे और लोग अवैध रूप से लाई जाने वाली सब्जी-फल खरीद रहे हैं। इधर रोजाना नगर निगम पुलिस-प्रशासन के साथ अवैध सब्जी-फल की धरपकड़ में लगा है, ताकि लोग मजबूरी में निगम के ही पैकेट खरीदें। इन सब्जियों-फलों को चिडिय़ाघर के जानवरों को खिलाने के लिए भेजा जा रहा है। वहीं कई फलों-सब्जियों को नष्ट भी करवा रहे हैं।

किसानों को भी तगड़ा चूना लगा रहे हैं व्यापारी

एक तरफ जनता को खराब सब्जी और फल मिल रहे हैं, दूसरी तरफ चुनिंदा व्यापारियों ने किसानों को भी तगड़ा चूना लगाया है। 2-4 रुपए किलो की सब्जी खरीदकर 30 से 40 रु. किलो में बेची जा रही है, तो 10-20 रुपए किलो के तरबूज-खरबूज और 40-50 रुपए किलो के आम 50 से लेकर 120 रुपए किलो तक बेचे जा रहे हैं और किसानों को ओने-पोने दाम मिल रहे हैं। कई किसानों ने तो फसलें ही नष्ट कर दी और अब सब्जी-फल की फसल उगाएंगे भी नहीं।