मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा व्यवस्था के तहत कार्यरत अतिथि शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर लोक शिक्षण संचालनालय ने सख्त रुख अपनाया है। संचालनालय की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि सभी शासकीय स्कूलों में अतिथि शिक्षकों की उपस्थिति रोजाना तय प्रक्रिया से दर्ज की जाए और उसका समय पर सत्यापन भी किया जाए। इस आदेश को जिला और ब्लॉक स्तर तक लागू करने के लिए शिक्षा अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है।
निर्देश का केंद्र बिंदु यह है कि अतिथि शिक्षक स्कूल में जिस दिन और जितने समय तक उपस्थित रहे, उसी आधार पर रिकॉर्ड तैयार हो। संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि उपस्थिति से जुड़े रिकॉर्ड में लापरवाही, देरी या बाद में की गई एंट्री स्वीकार नहीं होगी। संबंधित संस्था प्रमुखों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उपस्थिति रजिस्टर और विभागीय प्रक्रिया में दर्ज जानकारी एक-दूसरे से मेल खाए।
आदेश में जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी और स्कूल प्राचार्यों को निगरानी की भूमिका में रखा गया है। विभाग ने कहा है कि उपस्थिति का परीक्षण केवल औपचारिक न रहे, बल्कि वास्तविक उपस्थिति की पुष्टि की जाए। जरूरत पड़ने पर निरीक्षण और रिकॉर्ड जांच के माध्यम से भी सत्यापन किया जाए, ताकि कागजी उपस्थिति और वास्तविक उपस्थिति में अंतर न रहे।
मानदेय भुगतान को उपस्थिति से जोड़ने पर जोर
संचालनालय ने यह भी कहा है कि अतिथि शिक्षकों के मानदेय संबंधी दावे प्रमाणित उपस्थिति के आधार पर ही आगे बढ़ाए जाएं। इसका मतलब है कि जिन दिनों की उपस्थिति नियमानुसार दर्ज और सत्यापित नहीं होगी, उन दिनों के भुगतान पर प्रश्न उठ सकता है। विभागीय स्तर पर यह व्यवस्था वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से लागू की जा रही है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने स्तर पर लंबित या विवादित उपस्थिति मामलों की समीक्षा करें। जहां रिकॉर्ड में असंगति मिले, वहां पहले सुधारात्मक कार्रवाई हो और फिर भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़े। विभाग का मानना है कि स्पष्ट और सत्यापित रिकॉर्ड से भुगतान संबंधी विवाद कम होंगे और प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी।
स्कूलों में पढ़ाई की निरंतरता पर फोकस
अतिथि शिक्षकों की तैनाती उन स्कूलों में होती है जहां नियमित पद रिक्त हैं या तत्काल शिक्षण व्यवस्था की जरूरत है। ऐसे में उनकी नियमित उपस्थिति सीधे कक्षा संचालन से जुड़ी है। संचालनालय ने इसी बिंदु पर जोर देते हुए कहा है कि किसी भी स्तर की ढिलाई से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है, इसलिए उपस्थिति प्रबंधन को प्राथमिक प्रशासनिक कार्य माना जाए।
निर्देश के अनुसार, स्कूल प्रमुखों को रोजाना उपस्थिति की निगरानी करनी होगी और अनुपस्थिति की स्थिति में संबंधित स्तर पर समय पर सूचना देना होगा। विभाग ने यह संकेत भी दिया है कि लगातार अनुपस्थिति या रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदारी तय की जा सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर निगरानी तंत्र को अधिक सक्रिय रखने की कोशिश की जा रही है।
जिला और ब्लॉक स्तर पर जवाबदेही तय
संचालनालय के आदेश के बाद जिला और ब्लॉक शिक्षा कार्यालयों को अनुपालन रिपोर्टिंग का ढांचा मजबूत करने के लिए कहा गया है। अधिकारियों को निर्देश है कि वे स्कूलों से प्राप्त जानकारी का समय-समय पर मिलान करें और जहां जरूरत हो, सुधारात्मक निर्देश जारी करें। यह प्रक्रिया केवल कागजी रिपोर्ट तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तविक उपस्थिति स्थिति से मेल खाए।
विभागीय दृष्टि से यह आदेश प्रशासनिक नियंत्रण के साथ-साथ अकादमिक स्थिरता का कदम माना जा रहा है। नियमित उपस्थिति सुनिश्चित होने से टाइम-टेबल संचालन, विषयवार कक्षाओं की उपलब्धता और परीक्षा तैयारी का शैक्षणिक कैलेंडर बेहतर तरीके से चलाया जा सकेगा। इससे विशेष रूप से उन स्कूलों को राहत मिल सकती है जहां लंबे समय से अतिथि शिक्षकों पर पढ़ाई का दबाव अधिक है।
अगले चरण में निगरानी और समीक्षा
आदेश लागू होने के बाद अब फोकस उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर रहेगा। शिक्षा विभाग के लिए चुनौती यही होगी कि निर्देश हर स्कूल तक समान रूप से लागू हों और किसी भी स्तर पर पुराने ढर्रे की ढिलाई न लौटे। जिला स्तर की समीक्षा बैठकों में उपस्थिति रिकॉर्ड, सत्यापन स्थिति और मानदेय दावों की स्थिति को एक साथ देखने की संभावना है, ताकि निर्णय डेटा आधारित हों।
कुल मिलाकर, लोक शिक्षण संचालनालय का यह कदम अतिथि शिक्षकों की उपस्थिति प्रणाली को अधिक अनुशासित और जवाबदेह बनाने की दिशा में है। विभाग ने संकेत दिया है कि उपस्थिति, सत्यापन और भुगतान की कड़ी अब पहले से अधिक कठोर होगी। इससे स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था की निरंतरता बनाए रखने और प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।











