विधायक मालिनी गौड़ के भांजे योगेंद्र पर भाजपा नेता ने लगाया जमीन हड़पने का आरोप, इंदौर में बने अवैध घर पर भी उठे सवाल

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By Raj RathorePublished On: June 8, 2026
Yogendra Singh Rathore Malini Gaur

Malini Gaur News : इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-4 में शुरू हुआ विवाद अब भाजपा और संघ के टकराव से आगे बढ़कर विधायक के करीबियों की कथित दबंगई और राजनीतिक संरक्षण के आरोपों तक पहुंच गया है। संघ पदाधिकारी चेतन पाटिल से जुड़े विवाद में दर्ज एफआईआर ने पहले ही विधायक मालिनी गौड़ के करीबियों को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया था। अब महेश्वर से भाजपा के ही एक पदाधिकारी खुलकर सामने आ गए हैं।

भाजपा युवा मोर्चा के मंडल महामंत्री आशीष केवट ने आरोप लगाया है कि विधायक मालिनी गौड़ के रिश्तेदार और करीबी लोग लंबे समय से उन पर और उनके परिवार पर दबाव बना रहे हैं। जमीन कब्जाने की कोशिश की जा रही है और विरोध करने पर धमकियां दी जा रही हैं।

जानें पूरा मामला

इंदौर में दर्ज एफआईआर में विधायक प्रतिनिधि वीरेंद्र शेंडगे समेत सात लोगों के नाम सामने आए हैं। इसी बीच महेश्वर से भाजपा युवा मोर्चा के मंडल महामंत्री आशीष केवट ने गंभीर आरोप लगाते हुए नया मोर्चा खोल दिया है।

आशीष केवट का कहना है कि विधायक मालिनी गौड़ के रिश्तेदारों और नजदीकी लोगों का प्रभावशाली नेटवर्क लंबे समय से उनके परिवार को परेशान कर रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर विधायक के भांजे और इंदौर में पदस्थ नायब तहसीलदार योगेंद्र सिंह राठौर उर्फ कृष्णा का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि उनके पुश्तैनी प्लॉट पर कब्जा करने की कोशिश लगातार की जा रही है।

केवट ने दावा किया कि विवादित जमीन पूरी तरह उनके परिवार के नाम दर्ज है। राजस्व रिकॉर्ड से लेकर एसडीएम और तहसील न्यायालय तक के फैसले उनके पक्ष में आ चुके हैं। इसके बावजूद संपत्ति छोड़ने का दबाव बनाया जाता रहा और लगातार धमकियां मिलती रहीं।

प्लॉट पर पहुंचे थे 25 लोग

मामले का सबसे गंभीर पहलू यह बताया जा रहा है कि इंदौर की हालिया एफआईआर में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उन्हीं में शामिल शानू उर्फ सौरभ दिघे, वीरेंद्र शेंडगे और मनीष समेत करीब 25 लोगों का समूह महेश्वर स्थित उनके प्लॉट पर भी पहुंचा था।

आशीष केवट का आरोप है कि उस दौरान उनकी मां के साथ अभद्रता की गई और हथियार दिखाकर डराने की कोशिश की गई। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी मौजूद है, जिसमें संबंधित लोग दिखाई दे रहे हैं।

झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश

आशीष केवट का कहना है कि जब उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़ी और हर स्तर पर अपने पक्ष में फैसले हासिल किए, तब उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश शुरू हो गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक संरक्षण के चलते कुछ लोग खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं। केवट ने सवाल उठाया कि जब भाजपा का ही एक पदाधिकारी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है, तो आम नागरिक की स्थिति क्या होगी?

योगेंद्र ने रखा अपना पक्ष

इन आरोपों पर नायब तहसीलदार योगेंद्र सिंह राठौर ने भी अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है कि वर्ष 2019 में उन्होंने यह जमीन खरीदी थी और उसका पूरा भुगतान किया जा चुका है।

योगेंद्र सिंह के अनुसार बाद में केवट परिवार की नीयत बदल गई और उन्होंने सौदा रद्द कर दिया। उन्होंने ऐसे दस्तावेज भी साझा किए हैं, जिनमें जमीन के एवज में भुगतान किए जाने का उल्लेख है। हालांकि आशीष केवट इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हैं। उनका कहना है कि तीन महीने के भीतर पूरा भुगतान करने की बात तय हुई थी, लेकिन निर्धारित राशि कभी नहीं दी गई।

मकान भी चर्चा में

गौरतलब है कि योगेंद्र सिंह राठौर वर्तमान में इंदौर में नायब तहसीलदार के पद पर पदस्थ हैं। अन्नपूर्णा क्षेत्र के उषानगर में बना उनका बड़ा मकान भी चर्चा का विषय बना रहा है। उस क्षेत्र में योगेंद्र का घर सबसे बड़ी इमारत है जिसके वजह से इसके नक्शे की स्वीकृति और निर्माण को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।