मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजा हिरदेशाह लोधी को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने घोषणा की कि राजा हिरदेशाह के जीवन और संघर्ष को अब स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी उनके साहस और देशभक्ति से परिचित हो सके।
भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित शौर्य दिवस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राजा हिरदेशाह का जीवन संघर्ष और वीरता की मिसाल है, जिसे इतिहास में उचित स्थान मिलना चाहिए।
नर्मदा तट पर बनेगा तीर्थ स्थल
मुख्यमंत्री ने बताया कि नर्मदा किनारे हीरापुर में राजा हिरदेशाह के नाम से एक भव्य तीर्थ स्थल विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही उनके जीवन पर शोध कराकर उसे शिक्षा विभाग के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।
राजा हिरदेशाह, जिन्हें “नर्मदा टाइगर” के नाम से भी जाना जाता है, ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ 1842 में संघर्ष शुरू किया था और लंबे समय तक अपने साथियों के साथ लड़ाई जारी रखी।
इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल
सीएम यादव ने कहा कि समाज के महापुरुषों के संघर्ष और बलिदान को याद रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जो समाज अपने नायकों को याद रखता है, वही आगे बढ़ता है।
राजा हिरदेशाह ने बुंदेलखंड क्षेत्र में बुंदेला और आदिवासी समाज को संगठित कर अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन खड़ा किया था। अब उनके जीवन की प्रमुख घटनाओं को संकलित कर शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।
विरासत संरक्षण पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए लगातार काम कर रही है। इसी दिशा में पहले रानी अवंतीबाई के नाम पर सागर में विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में सांस्कृतिक पुनर्जागरण को बढ़ावा देने के लिए गीता भवनों का निर्माण और वृंदावन ग्राम जैसी योजनाएं भी शुरू की गई हैं।
आरक्षण पर उमा भारती का बयान
कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भी समाज की भागीदारी और आरक्षण को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आरक्षण सामाजिक असमानता को दूर करने का महत्वपूर्ण माध्यम है और इसे समाप्त नहीं किया जा सकता।
उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक सभी वर्गों को बराबरी के अवसर नहीं मिलते, तब तक आरक्षण की आवश्यकता बनी रहेगी।
राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग
वहीं, विधायक प्रीतम लोधी ने लोधी समाज की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि समाज की संख्या और योगदान को देखते हुए उसे और अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
साथ ही उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि लोधी समाज से मुख्यमंत्री बनाए जाने पर विचार होना चाहिए और समाज के नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना चाहिए।
सामाजिक संदेश भी दिया गया
कार्यक्रम के दौरान समाज को नशा मुक्त बनाने का संदेश भी दिया गया। नेताओं ने लोगों से अपील की कि वे सामाजिक बुराइयों से दूर रहें और समाज के विकास में योगदान दें।
कुल मिलाकर, यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें इतिहास, संस्कृति और सामाजिक मुद्दों पर कई महत्वपूर्ण संदेश भी सामने आए।











