मध्य प्रदेश में कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए भोपाल और जबलपुर के बीच एक बड़ा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनाने की तैयारी है। करीब 255 किलोमीटर लंबे इस फोरलेन हाईवे पर लगभग 15,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस परियोजना के पूरा होने से दोनों शहरों के बीच यात्रा तेज और आरामदायक हो जाएगी।
सरकार फिलहाल भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा रही है। माना जा रहा है कि यदि यह प्रक्रिया तय समय में पूरी हो जाती है, तो निर्माण कार्य 2026 की गर्मियों तक शुरू हो सकता है।
सफर होगा आधा
अभी भोपाल से जबलपुर के बीच की दूरी तय करने में करीब 5.5 से 6 घंटे लगते हैं, लेकिन इस नए एक्सप्रेसवे के बनने के बाद यही सफर लगभग 2.5 से 3 घंटे में पूरा किया जा सकेगा।
इससे यात्रियों का समय बचेगा और यात्रा कहीं अधिक सुविधाजनक हो जाएगी।
नई सड़क पूरी तरह नए रूट पर बनेगी, जो सीधी, चौड़ी और बिना बाधाओं के होगी। इससे ट्रैफिक का दबाव कम होगा और सफर सुरक्षित भी बनेगा।
उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
यह एक्सप्रेसवे केवल यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि व्यापार और उद्योग के लिए भी अहम साबित होगा। भारी वाहनों और लॉजिस्टिक्स के लिए यह एक मजबूत नेटवर्क तैयार करेगा, जिससे माल परिवहन तेज और आसान होगा।
इसके साथ ही औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
पर्यटन को मिलेगा बड़ा फायदा
इस हाईवे का एक बड़ा फायदा पर्यटन क्षेत्र को भी होगा। जबलपुर से जुड़े प्रमुख टूरिस्ट डेस्टिनेशन जैसे कान्हा टाइगर रिजर्व, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, पन्ना टाइगर रिजर्व और पेंच टाइगर रिजर्व तक पहुंच आसान हो जाएगी। इससे इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे प्रदेश की इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता को नई दिशा देगा। बेहतर कनेक्टिविटी से न केवल शहरों के बीच दूरी कम होगी, बल्कि आर्थिक गतिविधियां भी तेज होंगी।कुल मिलाकर, यह परियोजना मध्य प्रदेश के विकास में गेमचेंजर साबित हो सकती है और आने वाले समय में प्रदेश को नई पहचान दिला सकती है।











