Indore Water Market : मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के पास स्थित निरंजनपुर गांव अपनी एक अनोखी पहचान बना चुका है। यहां आजीविका का सबसे बड़ा साधन न खेती है और न ही नौकरी, बल्कि पानी का व्यापार है। पहली नजर में यह बात अजीब लग सकती है, लेकिन इस गांव के अधिकांश परिवारों की रोज़ी-रोटी इसी काम पर निर्भर है।
गांव में पानी का कारोबार इतना व्यापक है कि आसानी से पहचाना जा सकता है कि कौन इस व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। जिस घर के बाहर पानी का टैंकर खड़ा दिखे, समझ लीजिए वहीं से पानी का व्यापार संचालित होता है।
पानी बेचने का बिजनेस
समय के साथ इस व्यवसाय ने कई लोगों की आर्थिक स्थिति बदल दी। पहले जहां लोग केवल गुजर-बसर के लिए यह काम करते थे, वहीं अब यह एक लाभदायक व्यवसाय बन चुका है। खासकर गर्मियों के मौसम में पानी की मांग बढ़ने के साथ इनकी आमदनी भी कई गुना बढ़ जाती है।
हर घर की एक ही कहानी
निरंजनपुर में लगभग 300 घर हैं और इनमें से अधिकांश किसी न किसी रूप में पानी के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। करीब एक दशक पहले यहां भूजल की प्रचुर उपलब्धता ने इस काम को जन्म दिया। लोगों ने अपने घरों में गहरे बोरिंग करवाए और वहां से निकलने वाले पानी को बेचने का काम शुरू कर दिया।
धीरे-धीरे यह काम एक संगठित व्यापार का रूप लेने लगा। लोगों ने अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए बड़े-बड़े टैंकर खरीद लिए और हजारों लीटर पानी सप्लाई करने लगे। आमतौर पर 3 से 4 हजार लीटर पानी 500 से 600 रुपये में और 12 हजार लीटर तक का टैंकर 4 से 5 हजार रुपये में बेचा जाता रहा है।
चिंता का विषय
हालांकि, अब स्थिति पहले जैसी नहीं रही। लगातार बढ़ते दोहन के कारण पानी का स्तर नीचे जाने लगा है। इसी वजह से लोग अब अपने बोरिंग को और अधिक गहराई तक खुदवा रहे हैं, जो भविष्य के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, एक समय ऐसा भी था जब गांव का लगभग हर व्यक्ति इस व्यवसाय से जुड़ा हुआ था और गर्मियों में इतनी मांग रहती थी कि हर टैंकर पहले से बुक रहता था। उस दौर में कमाई इतनी होती थी कि लोगों की आर्थिक स्थिति में तेजी से सुधार हुआ।
आज निरंजनपुर गांव की यह कहानी एक ओर जहां आर्थिक बदलाव की मिसाल है, वहीं दूसरी ओर जल संसाधनों के अत्यधिक उपयोग से पैदा हो रहे संकट की चेतावनी भी देती है।











