डेली कॉलेज को बदनाम करने के उद्देश्य से संचालित किए गए कथित फर्जी डिजिटल प्लेटफॉर्म Voice of DC मामले में अब जांच ने बड़ा कानूनी मोड़ ले लिया है। क्राइम ब्रांच ने विस्तृत डिजिटल जांच के बाद चारों आरोपियों (संदीप पारेख, अनुराग जैन, रंजीत सिंह नामली और मनवीर सिंह बायस) के खिलाफ कई गंभीर धाराएं जोड़ दी हैं।
साथ ही जांच एजेंसियों ने आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त कर डिजिटल फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक जांच में सोशल मीडिया पोस्ट, चैट रिकॉर्ड्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच के दौरान यह सामने आया कि मामला केवल सामान्य सोशल मीडिया टिप्पणी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें सुनियोजित डिजिटल प्रतिरूपण, भ्रामक सामग्री का प्रसारण और आपत्तिजनक कंटेंट फैलाने जैसे गंभीर पहलू शामिल हैं।
गंभीर धाराएं जोड़ी गईं
क्राइम ब्रांच ने मामले में भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की कई गंभीर धाराएं जोड़ी हैं। इनमें धारा 336 और 338 के तहत ऐसे कृत्यों को शामिल किया गया है जिनसे व्यक्तियों की सुरक्षा और गरिमा को नुकसान पहुंचाने की आशंका बनी। वहीं धारा 340 और 342 के अंतर्गत अवैध निरुद्धीकरण से जुड़े प्रावधानों को भी जांच में शामिल किया गया है।
इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D के तहत कंप्यूटर संसाधनों के माध्यम से प्रतिरूपण और धोखाधड़ी तथा धारा 67A के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से यौन प्रकृति की आपत्तिजनक सामग्री के प्रकाशन और प्रसारण जैसी गंभीर धाराएं भी जोड़ी गई हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इन धाराओं में दोष सिद्ध होने की स्थिति में आरोपियों को 10 वर्ष तक की सजा हो सकती है।
मोबाइल डेटा से खुलेंगे कई राज
जांच एजेंसियों के अनुसार जब्त मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरणों से प्राप्त डेटा अब यह स्पष्ट करेगा कि आपत्तिजनक सामग्री किस स्तर पर तैयार की गई, किसके निर्देश पर प्रसारित हुई और इसके पीछे किस प्रकार की समन्वित रणनीति काम कर रही थी।
सूत्रों का कहना है कि Voice of DC प्लेटफॉर्म के माध्यम से डेली कॉलेज, प्राचार्या, शिक्षकों और बोर्ड सदस्यों के खिलाफ कथित रूप से अश्लील, मानहानिकारक और भ्रामक सामग्री सुनियोजित तरीके से प्रसारित की गई थी।
छवि खराब करने की साजिश
जांच के दौरान सामने आए चैट रिकॉर्ड्स और डिजिटल संकेतों ने इस आशंका को और मजबूत किया है कि यह अभियान केवल असहमति जताने तक सीमित नहीं था, बल्कि संस्था की छवि को व्यवस्थित रूप से नुकसान पहुंचाने की सुनियोजित डिजिटल रणनीति का हिस्सा था।
डेली कॉलेज से जुड़े वरिष्ठ सदस्यों ने क्राइम ब्रांच की इस कार्रवाई को संस्था की गरिमा और प्रतिष्ठा की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका कहना है कि 155 वर्ष पुरानी प्रतिष्ठित संस्था के खिलाफ यदि कोई डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग कर झूठ, अश्लीलता और भ्रामक सामग्री फैलाने का प्रयास करेगा, तो कानून अपना काम करेगा।
सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियां मामले को बेहद गंभीरता से ले रही हैं और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।











