आशुतोष तिवारी जीतेंगे दतिया चुनाव, मामूली अंतर से हारेंगे घनश्याम सिंह, इंदौर सट्टा बाजार ने की बड़ी भविष्यवाणी

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By Raj RathorePublished On: August 1, 2026
Datia Election Result

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव की मतगणना 3 अगस्त को होगी, लेकिन उससे पहले इंदौर का चर्चित सट्टा बाजार पूरी तरह सक्रिय हो गया है। सट्टा कारोबार से जुड़े लोगों के आकलन में भाजपा फिलहाल बढ़त में दिखाई दे रही है, हालांकि उनका मानना है कि मुकाबला पूरी तरह एकतरफा नहीं है।

यही वजह है कि चुनाव परिणाम को लेकर राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ सट्टा बाजार में भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। इस उपचुनाव पर सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि जेन-जी आंदोलन के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव है, जिसे राजनीतिक विश्लेषक जनभावना के पैमाने पर भी देख रहे हैं।

भाजपा को बढ़त, लेकिन आसान जीत के संकेत नहीं

इंदौर का सट्टा बाजार लंबे समय से चुनावी आकलनों को लेकर चर्चा में रहा है। कई लोग इसे अनौपचारिक एग्जिट पोल की तरह भी देखते हैं। दतिया उपचुनाव को लेकर बाजार में फिलहाल भाजपा की जीत का भाव 75 पैसे और कांग्रेस का 1.25 रुपये बताया जा रहा है।

सट्टा कारोबार की भाषा में कम भाव वाले उम्मीदवार की जीत की संभावना अधिक मानी जाती है। हालांकि बाजार से जुड़े लोगों का मानना है कि भाजपा बढ़त में जरूर है, लेकिन मुकाबला कड़ा रहा है और जीत का अंतर बहुत बड़ा रहने की संभावना नहीं है।

जेन-जी आंदोलन के बाद पहला चुनाव

नीट पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले जेन-जी युवाओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबा आंदोलन किया था। इस आंदोलन का असर राष्ट्रीय राजनीति में भी देखने को मिला और बाद में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब इस बात पर भी है कि इस आंदोलन का चुनावी असर कितना दिखाई देता है। यदि भाजपा को अपेक्षित प्रदर्शन नहीं मिलता है तो इसे आंदोलन के प्रभाव से भी जोड़कर देखा जा सकता है।

नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से भी बदले समीकरण

दतिया उपचुनाव में भाजपा ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया। टिकट घोषणा के बाद संगठन के भीतर नाराजगी भी सामने आई और कई पदाधिकारियों ने इस्तीफे दिए। बाद में पार्टी नेतृत्व ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन मिश्रा समर्थकों की नाराजगी चुनाव प्रचार के दौरान भी चर्चा का विषय बनी रही।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यही वजह है कि सट्टा बाजार भी भाजपा की बढ़त के बावजूद एकतरफा जीत का दावा नहीं कर रहा है।

नोट: यह खबर केवल चुनाव को लेकर सट्टा बाजार में चल रहे आकलनों और चर्चाओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार के सट्टेबाजी या अवैध गतिविधि को बढ़ावा देना नहीं है। सट्टेबाजी कानूनन अपराध है और इसका समर्थन नहीं किया जाता।