Rathore Samaj Dharmshala Batlavadi : तहसील खाचरोद के ग्राम बटलावदी में स्थित एक धर्मशाला को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। राठौर (तेली) समाज ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि वर्ष 2012-13 में गांव के सर्व समाज के जनसहयोग से शासकीय भूमि पर भगवान श्रीराम के नाम से निर्मित धर्मशाला को बाद में एक विशेष समाज के नाम पर दर्ज कर दिया गया और अन्य समाजों को उससे दूर किया जा रहा है।
राठौर सोसाइटी का कहना है कि वर्ष 2018 में ग्राम पंचायत में नियुक्त एक मंत्री द्वारा धर्मशाला का नाम बदलकर “राजपूत धर्मशाला” के रूप में दर्ज करवाया गया तथा पट्टा वितरण किया गया, जबकि संबंधित भूमि ग्राम आबादी में शामिल नहीं थी। समाज ने आरोप लगाया कि बाद में ड्रोन सर्वे के दौरान खसरा बी-1 में भी इसे निजी संस्था के रूप में दर्ज कर दिया गया।
SDM जांच में सामने आई त्रुटि
मामले की शिकायत तहसीलदार और एसडीएम को किए जाने के बाद एसडीएम न्यायालय में प्रकरण क्रमांक 0104/बि 121/2025-26 में जांच हुई। जांच में यह पाया गया कि धर्मशाला का निर्माण गांव के सभी समाजजनों के सहयोग से शासकीय भूमि पर किया गया था तथा खसरा बी-1 में “राजपूत धर्मशाला अध्यक्ष कालू सिंह” के नाम से निजी संस्था के रूप में किया गया दर्ज त्रुटिपूर्ण है। इसके बाद त्रुटि सुधार के लिए प्रतिवेदन अपर कलेक्टर को भेजा गया।
इसके साथ ही प्रकरण क्रमांक 0100/बि 121/2025-26 में एसडीएम द्वारा स्थगन आदेश जारी कर यह निर्देश दिए गए कि जब तक रिकॉर्ड में सुधार नहीं हो जाता, तब तक धर्मशाला में किसी प्रकार का निर्माण या अन्य गतिविधि नहीं की जाए।
सामाजिक बहिष्कार के आरोप
राठौर समाज ने आरोप लगाया कि विवाद के बाद उन्हें धर्मशाला के उपयोग से वंचित कर दिया गया। समाज के अनुसार हाल ही में एक महिला के निधन के दौरान अंतिम संस्कार एवं पगड़ी कार्यक्रम में गांव के अन्य लोगों को शामिल होने से रोका गया। आरोप है कि कुछ लोगों द्वारा गांव में दबाव बनाते हुए कहा गया कि जो व्यक्ति कार्यक्रम में जाएगा, उसका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा और उस पर 10 हजार रुपये का दंड लगाया जाएगा।
समाज ने यह भी आरोप लगाया कि पगड़ी कार्यक्रम के दौरान धर्मशाला की चाबी नहीं दी गई, मंदिर के पुजारी को भोग लगाने से रोका गया तथा पंडित और सेन समाज के लोगों को भी कार्यक्रम में शामिल नहीं होने दिया गया।
राजनीतिक दबाव के आरोप
ज्ञापन में राठौर समाज ने नागदा-खाचरोद क्षेत्र के विधायक तेज बहादुर चौहान पर भी आरोप लगाए हैं। समाज का कहना है कि विधायक द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव बनाकर एसडीएम के स्थगन आदेश को प्रभावहीन करने का प्रयास किया गया तथा धर्मशाला को केवल एक समाज के उपयोग के लिए खोलने का दबाव बनाया गया।
हवा फायरिंग से गांव में तनाव
राठौर समाज के अनुसार दो दिन पूर्व धर्मशाला में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कुछ लोगों द्वारा हवा में फायरिंग भी की गई, जिससे गांव में तनाव की स्थिति बन गई। समाज ने प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई, सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और सभी समाजों को समान अधिकार दिलाने की मांग की है।











