2017 से लगातार 8 बार देश में स्वच्छता अवॉर्ड जीतने वाला इंदौर नए साल के पहले दिन गुरुवार को शोक में डूबा रहा। नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हो रही मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को कुलकर्णी नगर के 43 वर्षीय मजदूर अरविंद पिता हीरालाल लिखार भी इसी कारण अपनी जान गंवा बैठे, जिससे मृतकों की संख्या 14 हो गई।
अरविंद भागीरथपुरा में मजदूरी करने जाता था और उसने नगर निगम की मेन लाइन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइन में लीकेज के कारण शौचालय के सप्लाई पानी का सेवन किया। इसके बाद उसे उल्टी-दस्त की शिकायत हुई और उसकी मृत्यु हो गई। दो दिनों तक दूषित पानी के मामले पर चुप्पी साधे रहने पर प्रशासन और जिम्मेदारों पर सवाल उठ रहे हैं।
सैंपल जांच से हुई पुष्टि, दूषित पानी ही मौतों की वजह
CMHO डॉ. माधव हसानी ने बताया कि सैंपल की जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से पुष्टि हुई है कि दूषित पानी पीने से ही लोग बीमार हुए और उनकी मृत्यु हुई। कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि पूरी जानकारी के लिए विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज में कल्चर टेस्ट भी किया जा रहा है, और उसकी रिपोर्ट आने के बाद ही निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को भेजा वापस
मौतों से उबे हुए परिवारों का रोष भी सार्वजनिक रूप से दिखा। जब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मृतकों के परिजनों को शासन की ओर से 2–2 लाख रुपए का चेक देने पहुंचे, तो महिलाओं ने उसे लौटा दिया और कहा, “अब क्या देने आए हो? लौट जाओ।”
मौतों के ये ज़िम्मेदार
- निगमायुक्त, दिलीप यादव– इन्होने गंदे पानी की शिकायतों को अनदेखा किया। पाइपलाइन की टेंडर प्रक्रिया पर नहीं रखी नज़र।
- महापौर, पुष्यमित्र भार्गव– जल की समस्या को लेकर पार्षद की लगातार शिकायतों पर भी महापौर ने कोई कदम नहीं उठाया।
- अपर आयुक्त, रोहित सीसोनिया– इन पर यह आरोप है की अगस्त में टेंडर होने पर भी इसे रोक रखा और शिकायतों की भी अनदेखी की।
- पार्षद, कमल वाघेला– इन्होने क्षेत्र की परेशानी पर लगभग चार महीने तक कोई कार्रवाई नहीं की।
- जलकार्य प्रभारी, बबलू शर्मा– लगातार दूषित पानी सप्लाई होने के बाद भी इस पर ध्यान नहीं दिया और मामले को गंभीरता से नहीं लिया।









