मध्य प्रदेश सरकार ने भोपाल में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शासन ढांचे की दिशा में बड़ा कदम घोषित किया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य की AI पॉलिसी के तहत प्रिडिक्टिव गवर्नेंस मॉडल लागू करने की बात कही। सरकार का लक्ष्य यह है कि निर्णय केवल मौजूदा स्थिति पर नहीं, बल्कि संभावित जोखिम और मांग के पूर्वानुमान के आधार पर लिए जाएं। इस घोषणा में प्रशासनिक उपयोग, सेवा वितरण और विभागीय समन्वय को AI से जोड़ने पर जोर दिया गया।
घोषणा के अनुसार राज्य AI Sandbox तैयार करेगा। इस ढांचे में नई तकनीकों और एल्गोरिद्म को सीमित दायरे में जांचा जाएगा। परीक्षण के बाद ही उन्हें व्यापक प्रशासनिक उपयोग में लाया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस तरीके से तकनीकी जोखिम घटेगा और नीति लागू करने से पहले परिणामों की स्पष्ट समझ मिलेगी। इससे विभागों को यह भी पता चलेगा कि कौन सा मॉडल स्थानीय जरूरतों में वास्तव में काम करता है।
राज्य सरकार ने जिन क्षेत्रों को शुरुआती प्राथमिकता दी है, उनमें आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य और रोजगार शामिल हैं। इन तीनों क्षेत्रों में डेटा का दायरा बड़ा है और निर्णय समय पर लेने की जरूरत रहती है। प्रिडिक्टिव सिस्टम के जरिए संभावित बाढ़, बारिश, रोग प्रसार या सेवा मांग जैसे संकेत पहले पकड़े जा सकते हैं। रोजगार के मामले में सेक्टर-वार मांग, कौशल प्रवृत्ति और श्रम बाजार के बदलावों का पूर्वानुमान तैयार करने पर काम होगा।
प्रिडिक्टिव गवर्नेंस का प्रशासनिक मतलब
प्रिडिक्टिव गवर्नेंस का सीधा अर्थ है कि प्रशासन प्रतिक्रियात्मक मॉडल से आगे बढ़े। अभी कई फैसले तब लिए जाते हैं जब समस्या सामने आ चुकी होती है। AI आधारित पूर्वानुमान से विभागों को पहले से तैयारी का समय मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर आपदा राहत संसाधन, अस्पतालों की क्षमता या रोजगार कार्यक्रमों की प्राथमिकता क्षेत्रीय डेटा के आधार पर तय की जा सकती है। इससे योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक लक्षित और समयबद्ध बनाया जा सकता है।
सरकारी तंत्र में ऐसे मॉडल लागू करने के लिए डेटा संग्रह, डेटा गुणवत्ता और इंटर-डिपार्टमेंट शेयरिंग अहम होगी। अलग-अलग विभागों के पास मौजूद सूचनाओं को सुरक्षित और उपयोगी तरीके से जोड़ना होगा। राज्य का प्रस्तावित Sandbox इसी कारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे फील्ड स्तर पर सिस्टम का परीक्षण संभव होगा। तकनीक लागू करने से पहले प्रशासनिक प्रक्रियाओं और मानव संसाधन की तैयारी भी समान रूप से जरूरी रहेगी।
AI Sandbox से क्या अपेक्षा
AI Sandbox का उद्देश्य केवल तकनीकी परीक्षण नहीं, बल्कि नीतिगत मानक तय करना भी है। इससे यह आकलन किया जा सकेगा कि कोई मॉडल गलत संकेत तो नहीं दे रहा, किसी वर्ग को अनुपातहीन तरीके से प्रभावित तो नहीं कर रहा, और क्या उसका आउटपुट विभागीय फैसलों के लिए भरोसेमंद है। सरकार के लिए यह चरण इसलिए उपयोगी है क्योंकि यहां से स्केलेबल, सत्यापित और प्रशासनिक रूप से स्वीकार्य मॉडल चुने जा सकेंगे।
तकनीकी परियोजनाओं में अक्सर चुनौती यह होती है कि पायलट और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच अंतर रह जाता है। Sandbox पद्धति उसी अंतर को कम करने का उपकरण बन सकती है। इसमें सीमित क्षेत्र, सीमित उपयोगकर्ता और नियंत्रित डेटा के आधार पर प्रयोग होते हैं। सफल परिणाम मिलने पर मॉडल को चरणबद्ध तरीके से बड़े दायरे में लागू किया जा सकता है। इससे वित्तीय और प्रशासनिक जोखिम दोनों नियंत्रित रहते हैं।
आपदा, स्वास्थ्य और रोजगार पर शुरुआती फोकस
आपदा प्रबंधन में पूर्वानुमान का उपयोग राहत तैनाती, चेतावनी प्रणाली और संवेदनशील इलाकों की पहचान में मदद कर सकता है। स्वास्थ्य क्षेत्र में रोग प्रवृत्ति, अस्पतालों पर दबाव और दवाओं की मांग का पूर्व आकलन नीति निर्माण के लिए उपयोगी होगा। रोजगार के क्षेत्र में उद्योग और कौशल की दिशा समझकर प्रशिक्षण योजनाओं को वास्तविक मांग से जोड़ा जा सकता है। इस तरह नीति का लक्ष्य तकनीक को सीधे सार्वजनिक उपयोग से जोड़ना है।
रोजगार पूर्वानुमान से सरकार को यह संकेत मिल सकता है कि किन क्षेत्रों में नौकरियों की संभावना बढ़ रही है और किन क्षेत्रों में कौशल उन्नयन की जरूरत है। इससे प्रशिक्षण कार्यक्रम, प्लेसमेंट सपोर्ट और जिला-स्तरीय रोजगार रणनीतियों को बेहतर रूप में डिजाइन किया जा सकता है। इसी तरह स्वास्थ्य और आपदा से जुड़ी तैयारियों में भी संसाधनों का उपयोग अधिक सटीक तरीके से किया जा सकता है।
नीति लागू करने की अगली चुनौतियां
AI आधारित शासन मॉडल को प्रभावी बनाने के लिए डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और जवाबदेही के स्पष्ट मानक जरूरी होंगे। प्रशासनिक उपयोग में एल्गोरिद्मिक निर्णयों की व्याख्या और मानव निगरानी भी महत्वपूर्ण रहेगी। राज्य के लिए यह भी जरूरी होगा कि तकनीकी टीमों, विभागीय अधिकारियों और फील्ड अमले को समान दिशा में प्रशिक्षित किया जाए। नीति का वास्तविक असर तभी दिखेगा जब तकनीक, प्रशासन और नागरिक सेवाएं एक ही ढांचे में काम करें।
भोपाल में हुई इस घोषणा ने संकेत दिया है कि मध्य प्रदेश शासन व्यवस्था में AI का उपयोग केवल आईटी परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि नीति-स्तर के उपकरण के रूप में देखना चाहता है। प्रिडिक्टिव गवर्नेंस और AI Sandbox को केंद्र में रखकर राज्य ने शुरुआती रोडमैप पेश किया है। अब अगला चरण पायलट, सत्यापन और चरणबद्ध क्रियान्वयन का रहेगा, जहां से इस पहल की प्रभावशीलता स्पष्ट होगी।











