भोपाल: मध्य प्रदेश में पिछले कई दिनों से LPG सिलेंडर की ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली ठप पड़ी है। सर्वर डाउन होने के कारण घरेलू और कमर्शियल, दोनों तरह के सिलेंडर बुक नहीं हो पा रहे हैं। इस वजह से भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों समेत पूरे प्रदेश में गैस का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। लोगों को सिलेंडर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है और गैस की कालाबाजारी की खबरें भी सामने आ रही हैं।
प्रदेश के बड़े शहरों में गैस सिलेंडर की वेटिंग 8 दिनों तक पहुंच गई है, जबकि छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी खराब है। गैस एजेंसियों पर सुबह से शाम तक लोगों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। इस संकट का सबसे ज्यादा असर होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर पड़ा है, जहां गैस लगभग खत्म होने की कगार पर है।
होटल-रेस्टोरेंट में चूल्हे ठंडे, कारोबार ठप होने का खतरा
राजधानी भोपाल में पिछले चार दिनों से होटल और रेस्टोरेंट को एक भी कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई नहीं हुई है। भोपाल होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष तेजकुल पाल सिंह पाली ने बताया कि शहर के करीब 2,000 होटल-रेस्टोरेंट इस समस्या से जूझ रहे हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि कई प्रतिष्ठानों के पास कुछ घंटों का ही स्टॉक बचा है।
“भोपाल में करीब 2 लाख छात्र होटल और कैंटीन पर निर्भर हैं। अगर गैस नहीं मिली तो उनके सामने भोजन का संकट खड़ा हो जाएगा। सरकार को होटल, रेस्टोरेंट और कॉलेज कैंटीन को आपातकालीन सेवाओं में शामिल करना चाहिए।” — तेजकुल पाल सिंह पाली, अध्यक्ष, भोपाल होटल एसोसिएशन
सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश के 50 हजार से ज्यादा होटल-रेस्टोरेंट में गैस खत्म होने की स्थिति है, जिससे उनका कारोबार पूरी तरह ठप हो सकता है।
वैकल्पिक साधनों के दाम आसमान पर
गैस की किल्लत के चलते लोगों ने खाना पकाने के लिए दूसरे विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं, जिसका असर बाजार पर साफ दिख रहा है। इंडक्शन चूल्हे और डीजल भट्ठी की मांग अचानक बढ़ गई है, जिससे इनकी कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं। अकेले भोपाल में इंडक्शन की बिक्री में 7 गुना तक का उछाल दर्ज किया गया है। कारोबारी अब महंगे विकल्पों को अपनाने पर मजबूर हैं।
मुख्यमंत्री से मिले होटल व्यवसायी
इस गंभीर संकट को लेकर मध्य प्रदेश होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित सूरी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री से होटल-रेस्टोरेंट उद्योग को आपातकालीन सेवा में शामिल करने का आग्रह किया, ताकि उन्हें प्राथमिकता के आधार पर गैस मिल सके।
सुमित सूरी ने बताया, “मुख्यमंत्री ने हमारी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है। हम वैकल्पिक इंतजाम भी तलाश रहे हैं। हमने अपने सदस्यों के लिए गैस बचाने के तरीकों को लेकर एक गाइडलाइन भी जारी की है।” एसोसिएशन से प्रदेशभर के करीब 10,500 होटल जुड़े हैं, जबकि प्रदेश में इनकी कुल संख्या 50 हजार के आसपास है।











