मध्य प्रदेश के इंदौर शहर को रेल नेटवर्क के लिहाज से बेहतर कनेक्टिविटी देने वाली इंदौर-दाहोद रेल लाइन परियोजना में अब तेजी दिख रही है। लंबे समय से लंबित यह प्रोजेक्ट इंदौर के ‘डेड एंड’ जैसी स्थिति को खत्म करने के उद्देश्य से आगे बढ़ाया गया था। अब इसके इंदौर-धार खंड का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच गया है और तकनीकी तैयारियां भी समानांतर रूप से चल रही हैं।
परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार पहले इंदौर-धार खंड में फरवरी तक ट्रायल रन का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन कार्य की प्रगति और शेष तकनीकी प्रक्रियाओं को देखते हुए नई समय-सीमा मार्च के अंत तक तय की गई है। निर्माण कार्य तय समय में पूरा होते ही कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) निरीक्षण करेंगे। सीआरएस से अनुमति मिलने के बाद धार तक ट्रायल रन शुरू करने की तैयारी है।
यह परियोजना खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि धार क्षेत्र में अब तक रेल सेवा उपलब्ध नहीं रही है। सड़क मार्ग पर निर्भरता के कारण स्थानीय लोगों, यात्रियों और व्यापारिक गतिविधियों को लगातार कठिनाई उठानी पड़ती रही है। इस स्थिति में धार तक रेल पहुंचना क्षेत्रीय यातायात ढांचे में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
धार तक पहली बार पहुंचेगी रेल, कई स्टेशन संरचनाएं लगभग तैयार
इंदौर-धार दिशा में पीथमपुर, सागौर, गुणावद और टीही में स्टेशन भवन और पटरियों का काम लगभग पूरा बताया गया है। इस खंड में भौतिक निर्माण के साथ ट्रैक सेफ्टी और परिचालन से जुड़ी तकनीकी प्रक्रियाएं भी अंतिम चरण में हैं। धार रेलवे स्टेशन को मांडू के जहाज महल की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है, जिससे स्टेशन का स्वरूप स्थानीय पहचान के साथ जोड़ा जा सके।
पूरी इंदौर-दाहोद रेल परियोजना की लंबाई 204.76 किलोमीटर है। पिछले बजट में इसके लिए 1873.10 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। यह वित्तीय प्रावधान ट्रैक, स्टेशन, ओएचई, सिग्नलिंग और पुल जैसे प्रमुख कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
पुल, टनल और ट्रैक पैकिंग पर फोकस
धार तक के हिस्से में प्रस्तावित 21 पुलों में से 19 का निर्माण पूरा हो चुका है। शेष दो पुलों पर कार्य चल रहा है। इसी तरह टीही के पास लगभग 3 किलोमीटर लंबी टनल का काम भी अंतिम चरण में बताया गया है। यह टनल परियोजना के अहम इंजीनियरिंग हिस्सों में शामिल है और इसके पूरा होने से इस खंड की परिचालन तैयारी मजबूत होगी।
निर्माण की रफ्तार बढ़ाने और ट्रैक की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए टीटीएम यानी ट्रैक टैम्पिंग मशीन का उपयोग किया जा रहा है। इस मशीन से ट्रैक पैकिंग करके पटरियों की समतलता, स्थिरता और सुरक्षित संचालन की शर्तों को पूरा किया जाता है। रेलवे परियोजनाओं में ट्रैक की फिनिशिंग और सुरक्षित गति के लिए यह चरण अनिवार्य माना जाता है।
कहां काम पूरा, कहां जारी
मौजूदा स्थिति के अनुसार दाहोद से कटवाड़ा और इंदौर से टीही तक का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। जबकि टीही-धार, कटवाड़ा-झाबुआ और धार-झाबुआ खंडों में ट्रैक लिंकिंग, ओएचई, स्टेशन भवन, प्लेटफॉर्म और सिग्नलिंग का काम जारी है। इन खंडों के पूरा होते ही पूरे कॉरिडोर के चरणबद्ध संचालन की दिशा में प्रक्रिया तेज होगी।
ओएचई और सिग्नलिंग कार्य इस परियोजना के संचालन का निर्णायक हिस्सा हैं, क्योंकि इन्हीं के आधार पर स्पीड ट्रायल, सुरक्षा परीक्षण और बाद में नियमित परिचालन की अनुमति तय होती है। इसी वजह से निर्माण एजेंसियां सिविल कार्यों के साथ विद्युत और सिग्नल प्रणाली को भी समयबद्ध रूप से पूरा करने पर जोर दे रही हैं।
इंदौर को गुजरात और मुंबई से मिलेगा सीधा रेल संपर्क
इंदौर-दाहोद लाइन पूरी होने के बाद इंदौर का दाहोद और छोटा उदयपुर के जरिए गुजरात व मुंबई दिशा से सीधा जुड़ाव मजबूत होगा। इससे यात्रियों के लिए वैकल्पिक रेल मार्ग उपलब्ध होगा और माल ढुलाई को भी नई दिशा मिलेगी। औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर और आसपास के इलाकों के लिए यह कनेक्टिविटी लॉजिस्टिक लागत और समय पर असर डाल सकती है।
परियोजना के पूरा होने से सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी असर की उम्मीद है। धार जैसे क्षेत्रों में पहली बार रेल पहुंचने से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापार से जुड़े आवागमन में सुधार हो सकता है। फिलहाल सबसे अहम चरण इंदौर-धार ट्रायल रन और सीआरएस निरीक्षण का है, जिस पर आगे की परिचालन समय-सीमा निर्भर करेगी।











