देश

संसाधनों के अभाव का रोना रोने वालों के लिए मिसाल थे अजीत जोगी

वरिष्ठ पत्रकार प्रियंका कौशल

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री स्व अजीत जोगी के साथ ये फोटो अभी हाल ही में 7 मार्च 2020 को ली गयी थी। डॉ रेणु जोगी द्वारा उनपर लिखित पुस्तक वे मुझे भेंट कर रहे हैं।

29 अप्रैल 1946 को बिलासपुर के पेंड्रा रोड के जोगीडोंगरी में जोगी जी का जन्म हुआ। 1960 में भोपाल के मौलाना आज़ाद कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी से मेकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की। 1968 में IPS बने। अजीत डोभाल, तेलांगना के गवर्नर ई एस एल नरसिम्हन उनके बैचमेट थे। 1970 में श्री जोगी का चयन IAS और IFS दोनों कैटेगिरी में हुआ, वह भी सामान्य वर्ग में। इंदौर, शहडोल से लेकर रायपुर तक कलेक्टर रहे। अर्जुन सिंह से लेकर श्री राजीव गांधी व श्रीमती सोनिया गांधी तक के खास रहे।

1986 में उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे। जब भाजपा की तरफ से श्री नरेन्द्र मोदी राष्ट्रीय प्रवक्ता हुआ करते थे। कांग्रेस अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे, राज्यसभा व लोकसभा के सांसद रहे। वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य बनते ही उसके प्रथम मुख्यमंत्री होने का गौरव प्राप्त किया। पूरे जीवन में 8 बार मौत से संघर्ष किया।

Ajeet jogi

11 अप्रैल 2004 को मैनपुर में उनका एक्सीडेंट हुआ, तब से ही व्हील चेयर पर अपनी पूरी राजनीति करने वाले एक ऐसे जीवट व्यक्तित्व का चले जाना ना केवल छत्तीसगढ़ की बल्कि देश की भी अपूरणीय क्षति है। जीवन भर अपनी जाति को लेकर विवादों में रहने के बाद भी छत्तीसगढ़ में अपने लाखों चाहने वालों के बीच लोकप्रिय बने रहे। नई पार्टी छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस बनाई और 5 विधायक जितवाकर ये साबित किया कि मध्य भारत में भी तीसरी पार्टी उभर सकती है। लेकिन कांग्रेस से अलग होकर भी उनके दिल में कांग्रेस बसती रही। स्मरण शक्ति ऐसी कि एक बार अच्छे से मिल लें तो फिर हमेशा नाम लेकर पुकारें। चाहे पत्रकार हो, कार्यकर्ता या किसी भी क्षेत्र के लोग।

जोगी जी उनके लिए भी मिसाल थे जो संसाधनों के अभाव का रोना रोते हैं। बचपन में तेंदूपत्ता बीनने वाले, नंगे पैर स्कूल जाने वाले, किताबों के अभाव में भी पढ़ने वाले जोगी जी बताते थे कि जब वे आईपीएस की ट्रेनिंग के लिए मसूरी गए तो वे अकेले ऐसे थे जो बस से अकेले पहुंचे थे। बाकी लोग कार या टैक्सी से आये थे। ट्रेनिंग शुरू हुई तो कोट-पेंट के लिए पैसे नहीं थे। दर्जी मनोभाव समझ गया और कहा साहब कोई बात नहीं पैसे बाद में दे देना। अंग्रेजी नहीं आती थी तो मेकेनिकल इंजीनियरिंग के वक़्त जी जान लगाकर अंग्रेजी सीखी।

उन्होंने एक बार कहा था- प्रियंका यदि मेरा एक्सीडेंट नहीं होता तो मैं आज उस शिखर पर होता, जहां जाने का सपना सभी राजनेता देखते हैं। ऐसी शख्सियत को विनम्र श्रद्धांजलि।। जोगी जी ने कभी ये शेर किसी महफ़िल में कहा था, जो उनके हौसलें को बयां करता था..

मंजिले भी जिद्दी हैं..
रास्ते भी जिद्दी हैं..
देखते हैं कल क्या हो..
हौसले भी जिद्दी हैं..

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