सावन में इन प्रसिद्ध स्थलों में लगता हैं मेला, दर्शन भर के लिए दूर-दूर से आते हैं भक्त

सावन का महीना आते ही भक्त शिव की भक्ति में डूब जाते हैं। दूर दूर से भक्त भोलेनाथ के एक दर्शन के लिए शिव के प्रसिद्ध स्थलों पर जाते हैं। भक्तों के लिए ही इन स्थलों पर मेले का आयोजन किया जाता हैं। आज हम आपको ऐसे ही कुछ प्रसिद्ध स्थलों के बारें में बताने जा रहे हैं जहां सावन में मेले लगाए जाते हैं।

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सावन का महीना आते ही भक्त शिव की भक्ति में डूब जाते हैं। दूर दूर से भक्त भोलेनाथ के एक दर्शन के लिए शिव के प्रसिद्ध स्थलों पर जाते हैं। भक्तों के लिए ही इन स्थलों पर मेले का आयोजन किया जाता हैं। आज हम आपको ऐसे ही कुछ प्रसिद्ध स्थलों के बारें में बताने जा रहे हैं जहां सावन में मेले लगाए जाते हैं।

1- हरिद्वार में सावन का मेला

सावन का सबसे बड़ा मेला हरिद्वार में लगता है। हरिद्वार को भी को शिव का धाम कहा जाता हैं। हरिद्वार कांवड़ियों के लिए भी ज्यादा मायने रखता हैं। बम-बम भोले के जयकारों के साथ शिवालयों में महादेव की अराधना की जाती है। इसके बाद लोग गंगा का पवित्र जल कांवड़ में लेकर रवाना होते हैं।

2- देवघर का सावन मेला

झारखंड़ में स्थित वैद्यनाथ धाम में हर साल सावन में मेला लगता है। देवघर का सावन मेला भगवान शिव के सबसे बड़े मेलों में शुमार है। कावड़यात्रा में शामिल भक्त हर साल यहां भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। वैद्यनाथ धाम भगवान शिव के बड़े मंदिरों में से एक मंदिर माना जाता हैं।

3- काशी का सावन मेला

काशी को भगवान शिव का दूसरा घर कहा जाता हैं। काशी में शिव मंदिरों में सबसे प्रसिद्ध और 12 ज्योर्तिलिंगों मे से एक माने जाने वाले विश्वनाथ मंदिर में भी सावन के महीने में सबसे बड़ा सा मेला लगता हैं। काशी के विश्वनाथ का दर्शन करने के लिए सात मार्गों से कांवड़ियां यहां पैदल आते हैं।

4- लखीमपुर मेला

छोटी काशी के नाम से मशहूर लखीमपूर, शिव की भक्ति में डूबे भक्तों के लिए सबसे पावन और पवित्र स्थल हैं। सावन के शुरु होते ही भक्तों के लिए यहां मेला शुरु होता हैं। इस मेले में देश प्रदेश के लाखों श्रद्धालु अवढरदानी के जलाभिषेक को उमड़ते हैं।

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