बसंत पंचमी पर ऐसे करें मां सरस्वती की पूजा, ये है मुहूर्त और महत्व

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हर साल माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार बसंत पंचमी के दिन ज्ञान की देवी माता सरस्वती का जन्म हुआ था। मां सरस्वती ज्ञान-विज्ञान, कला, संगीत और शिल्प की देवी हैं। जीवन में नया उत्साह प्राप्त करने के लिए बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती की उपासना की जाती है। इस दिन मां की आराधना कर और कुछ उपाय कर उनकी कृपा पा सकते हैं। ज्योतिष्य अनुसार बसंत पंचमी के दिन ही मुनष्य जीवन में शब्दों का ज्ञान और शक्ति आई थी। धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक सृष्टि को आवाज देने के लिए ब्रह्मा जी ने कमंडल से जल लेकर चारों दिशाओं में छिड़का।

इस जल से हाथ में वीणा धारण कर मां सरस्वती प्रकट हुई, उनकी वीणा का तार छेड़ते ही तीनों लोकों में ऊर्जा का संचार हुआ और सबको शब्दों की वाणी मिल गई। बसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पांचवे दिन भगवान विष्णु और कामदेव की पूजा की जाती है। इस वजह से इसे बसंत पंचमी कहते हैं। बसंत पंचमी को श्रीपंचमी और सरस्वती पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। बसंत पंचमी 30 जनवरी यानि आज है।

बसंत पंचमी का महत्व

  • बसंत पंचमी के दिन को माता सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में बड़े ही उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है।
  • बसंत पंचमी पर भगवान विष्णु और कामदेव की पूजा की जाती है।
  • बसंत पंचमी के पर्व को ऋषि पंचमी, श्री पंचमी और सरस्वती पंचमी आदि के नाम से भी जाना जाता है।
  • बसंत पंचमी को सभी शुभ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ मुहूर्त माना गया है। मुख्यतयाः विद्यारंभ, नवीन विद्या प्राप्ति एवं गृह-प्रवेश के लिए वसंत पंचमी को पुराणों में भी अत्यंत श्रेयकर माना गया है।
  • इस दिन लोग पीले वस्त्र पहनकर और पीला तिलक लगाकर घरों को पीले रंग से सजाते हैं।
  • बसंत पंचमी के ही दिन भगवान राम माता सीता की खोज में शबरी नामक भीलनी की कुटिया में पहुंचे थे। जहां पर शबरी ने प्रभु राम के प्रेम में खोकर भगवान राम को झूठे मीठे बैर खिलाए थे। यह स्थान गुजरात के डांग जिले में स्थित हैं। यहां के लोग आज भी उस शिला को बसंत पंचमी के दिन पूजते हैं जहां पर भगवान राम बैठे थे।
  • बसंत पंचमी के ही दिन पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी के बीच एक महत्वपूर्ण प्रसंग घटित हुआ था। गोरी ने मृत्युदंड देने से पहले पृथ्वीराज चौहान के शब्दभेदी बाण का कमाल देखना चाहा। इस अवसर का लाभ उठाकर कवि चंदबरदाई ने पृथ्वीराज को संदेश दिया जो काफी प्रचलित है। कवि चंदबरदाई ने कविता के माध्यम से कहा था कि-

चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण।
ता ऊपर सुल्तान है, मत चूको चौहान ॥

ऐसे करें मां सरस्वती की पूजा

  • आज के दिन पीले, बसंती या सफेद वस्त्र धारण करें, काले या लाल वस्त्र नहीं।
  • तत्पश्चात पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा की शुरुआत करें।
  • सूर्योदय के बाद ढाई घंटे या सूर्यास्त के बाद के ढाई घंटे का प्रयोग इस कार्य के लिए करें।
  • मां सरस्वती को श्वेत चन्दन और पीले तथा सफ़ेद पुष्प अवश्य अर्पित करें।
  • प्रसाद में मिसरी,दही और लावा समर्पित करें।
  • केसर मिश्रित खीर अर्पित करना सर्वोत्तम होगा।
  • मां सरस्वती के मूल मंत्र “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” का जाप करें।
  • जाप के बाद प्रसाद ग्रहण करें।
  • मां सरस्वती के समक्ष अगर नील सरस्वती स्तोत्र का पाठ किया जाय तो मूर्ख से मूर्ख व्यक्ति भी बुद्धिमान हो जाता है।

बसंत पंचमी शुभ मुहूर्त
सरस्वती पूजा मुहूर्त – 10:45 से 12:35 बजे तक
पंचमी तिथि का आरंभ (29 जनवरी 2020) – 10:45 बजे से
पंचमी तिथि समाप्त (30 जनवरी 2020) – 13:18 बजे तक

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