भोपाल में अब हर-हर गंगे v/s नर्मदे हर | Har-Har Gange vs Har-Har Narmade

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uma bharti digvijay singh

धर्मेंद्र पैगवार

इतिहास अपने आप को दोहराता लग रहा है। ठीक 20 साल पहले खजुराहो छोड़कर उमा भारती भोपाल आई थीं। इसके बाद वे 10 साल से सत्ता पर काबिज राजा दिग्विजय सिंह को सरकार से बेदखल करने का कारण बनीं। बुंदलेखंड के एक छोटे से गांव से आई इस साध्वी ने कांग्रेस को ऐसे किनारे किया कि पुनर्वास होने में पूरे 15 साल लग गए। कुछ दिन उमा और दिग्विजय सिंह दोनों ने अपनी-अपनी पार्टी में भी वनवास भोगा।

2008 के बाद दोनों के सामने ही कमोबेश यही स्थिति रही। उमा को पार्टी छोडनी पडी तो राजा किनारे किए गए। बाद में वक्त पलटा। उमा झांसी से और राजा राज्यसभा से संसद पहुंचे। हालांकि दिग्विजय सिंह ने इस दौरान अपना वचन निभाया और 10 साल तक कोई पद नहीं लिया। उमा को मोदी सरकार में नमामि गंगे अभियान का जिम्मा मिला तो राजा ने संकल्प के साथ यहां मां नर्मदा की पैदल परिक्रमा कर डाली। वे नर्मदा में अवैध उत्खनन को लेकर भी लगातार मुखर रहे। बाद में उनकी रणनीति ने मप्र की ओवरकॉन्फिडेंस में चल रही भाजपा से सत्ता छीन ली।

अब वक्त दोहरा रहा है। 15 साल पहले भाजपा और संघ परिवार ने दो चुनावों में विफल होने के बाद भोपाल की सांसद उमा भारती को दिग्विजय सिंह के मुकाबले उतारा था। दिसंबर 2003 में भाजपा ने मप्र में जबर्दस्त सफलता पाई थी। अब एक बार फिर भाजपा लंबी जदृोजहद के बाद उमा भारती को दिग्विजय सिंह के खिलाफ उतारने का लगभग मन बना चुकी है। वे उमा जो चुनाव नहीं लड़ने का मना कर चुकी थीं और इसका ऐलान भी कर चुकी थी। उन्हें शायद विचारधारा का वास्ता देकर मनाया गया हैदोनों नेताओं को मुख्यमंत्री के पद पर काम करने का अनुभव है।

दोनों के पास अपने अपने संगठन के अलावा भोपाल में समर्थकों और शुभचिंतकों की टीम है।अब वक्त बहुत बदल चुका है। कभी भगवा आतंकवाद और ओसामाजी जैसे बयानों से एक बडे समुदाय को नाराज करने वाले दिग्विजय सिंह अब परिक्रमावासी नर्मदा भक्त दिग्विजय सिंह हो गए है। उन्हें हिंदूवादी भी कहा जाने लगा है। हालांकि वे पहले से भक्त हैं, छत्तीसगढ के डोंगरगढ़ में कुलदेवी के दर्शन करने वे नंगे पैर जाते हैं पूरी सीढ़ियां चढ़ते है। उनकी देवी आराधना और ओंकारेश्वर की परिक्रमा किसी से छिपी नहीं हैं, लेकिन उन्होंने धर्म को निजी मानते हुए पहले कभी इसका ढिंढोरा नहीं पीटा। अब भाजपा ने अपनी फायर ब्रांड नेता जो कि के​सरिया बाना पहनती है उन्हें उतारने का मन बनाया है। लगता है भोपाल में अब माहौल पूरी तरह धार्मिक होगा मतलब हर—हर गंगे v/s नर्मदे हर।

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