ब्लॉक चैन टेक्नोलोजी का कृषि के क्षेत्र में बढता प्रयोग अच्छा संकेत है

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नीरज कुमार राठौर

 किसानों की आय को दुगनी करने को लेकर भारत सरकार काफी प्रयासरत लग रही है. इसके लिए सरकार अलग-अलग तरीके से कदम उठा रही है. किसानों की आय हमेशा से कृषि में एक चिंता का विषय रहा है. सरकार किसानों की आय में इजाफा करने के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए प्रयास कर रही है, इसलिए किसानों की आय दोगुना करने के लिए सरकार ब्लॉक चैन टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है. इस बजट में सरकार कृषि टेक्नालॉजी स्टार्टअप के लिए अलग से फंड की घोषणा कर रही है, जिसमे ब्लाक चेन टेक्नोलोजी भी शामिल है. सरकार के स्टार्टअप फंड के जरिए इस तकनिक का इस्तेमाल करते हुए किसानो को उनकी उपज का सही दाम मिल सकेगा.

इसी योजना को मूर्तरूप देने के लिए कॉफी बोर्ड, भारत सरकार ने इसी वर्ष 28 मार्च 2019 को ब्लॉकचेन आधारित कॉफी ई-मार्किटप्लेस का आरंभ किया. बोर्ड ने कॉफी उत्पादकों किसानो को अपने उत्पाद को भारत सहित दुनिया भर के खरीददारों तक बेचने की सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से ब्लॉकचेन अधारित कॉफी ई मार्केटप्लेस लाँच किया.

वाणिज्य सचिव अनूप वधावन ने नई दिल्ली में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस ई-मार्केटप्लेस का लाँच किया और कहा कि इस प्रायोगिक परियोजना से किसानों को बाजारों के साथ पारदर्शी ढंग से जोड़ने में मदद मिलेगी और कॉफी उत्पादकों को उचित मूल्य मिलेगा.

अब किसानो के सामने प्रश्न ये है की ब्लाक चैन टेक्नोलोजी क्या है और कैसे इसका कृषि के क्षेत्र में सकारात्मक उपयोग किया जा सकता है ?

ब्लाक चैन टेक्नोलोजी क्या है ?

ब्लॉकचेन एक ऐसी तकनीक है जिसे वित्तीय लेन-देन को रिकॉर्ड करने के लिए प्रोग्राम किया गया है। यह एक डिजिटल प्रणाली है,जिसमे एक इंटरनेट टेक्नॉलजी की अंतर्निहित मजबूती है जो एन्क्रिप्टेड डेटाबेस को अपने नेटवर्क पर समान जानकारी के ब्लॉक को संग्रहीत कर सकता है। इसमें आंकड़ों के रिकॉर्ड या ब्लॉक की एक श्रृंखला होती है और प्रत्येक ब्लॉक में उस समय हुए ट्रांजेक्शंस का लेखा-जोखा होता है। यह पूरी तरह सार्वजनिक होती है। ब्लॉकचेन को यूज करने वाला कोई भी व्यक्ति इसे देख सकता है। माइनर तकनीक के जरिए प्रत्येक ट्रांजेक्शन की जानकारी उपलब्ध हो जाती है और फिर कानूनी वैधता की जांच की जाती हैं।

ब्लॉकचेन डिजिटल जानकारी (डेटाबेस) को वितरित करने की क्षमता रखता है अर्थात यह एक डिस्ट्रिब्यूटेड नेटवर्क की तरह कार्य करता है| डेटाबेस के सभी रिकॉर्ड एक कंप्यूर में स्टोर नहीं होते बल्कि 1000 कम्प्यूटर्स या लाखों कम्प्यूटर्स में वितरित होते है| ब्लॉक चेन का हर एक कंप्यूटर हर एक रिकॉर्ड के पूरे इतिहास का वर्णन कर सकता है| यह डेटाबेस एन्क्रिप्टेड है और गोपनीय तरीके से दर्ज किया गया है। ट्रांजेक्शन की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे पूरी तरह से सार्वजनिक करने की बजाए इसकी पहुंच एक निर्धारित समूह तक सीमित रखी जा सकती है।

ब्लॉकचेन में फॉल्ट टोलेरंट (फॉल्ट टोलेरंट) भी है यानी इस सिस्टम में यदि एक कंप्यूटर खराब हो जाता है तो भी यह सिस्टम काम करता रहता है। अगर इसमें किसी नए समझौते या डेटा को को दर्ज करना होता है तो इसके लिए कई साझेदारों (कम्प्यूटर्स) की मंजूरी लेनी पड़ती है।

ब्लॉकचेन से कॉफी उत्पादकों में होने वाले फायदे को ऐसे समझिये :-

ब्लॉकचेन के उपयोग से कॉफी उत्पादकों और खरीदारों के बीच की दूरियां कम होंगी और किसानों को अपनी आमदनी दोगुनी करने में मदद मिलेगी.

भारतीय कॉफी की ट्रेडिंग के लिए ब्लॉकचेन आधारित मार्किटप्लेस ऐप का उद्देश्य भारतीय कॉफी के व्यापार में पारदर्शिता लाना है. इस पहल से भारतीय कॉफी की ब्रैंड इमेज तैयार करने में मदद मिलेगी और खरीदारों तक सीधी पहुंच कायम होने से कॉफी उत्पादकों की बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी. यानि सीधा सीधा फायदा किसानो को मिलेगा.

योजना के प्रमुख बिंदु –

-किसान इस प्रायोगिक परियोजना से बाज़ारों के साथ पारदर्शी ढंग से जुड़ सकेंगे जिसके परिणामस्वरूप उन्हें उचित मूल्य की प्राप्ति होगी.

-ब्लॉकचेन की सहायता से कॉफी उत्पादकों और खरीदारों के बीच की दूरी कम होगी और किसानों को अपनी आमदनी दोगुनी करने में मदद मिलेगी.

-भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जहाँ कॉफी छाया में उगाई जाती है, उसे हाथ से तोड़ा जाता है और धूप में सुखाया जाता है. यहाँ उगाई जाने वाली कॉफी दुनिया की बेहतरीन कॉफी में शुमार है.

-विश्व बाज़ार में भारतीय कॉफी की बहुत ज़्यादा मांग है और यह प्रीमियम कॉफी के रूप में बेची जाती है इसके बावजूद कॉफी उगाने वाले किसानों की आमदनी बहुत कम है.

में आशा करता हु की भारत सरकार के काफी बोर्ड की इस पहल के बाद  काफी उत्पादक किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिल सकेगा. साथ ही उपज की बर्बादी रोकने में भी मदद मिलेगी. केंद्र एवं राज्य सरकार दोनों को चाहिए की बजट में कृषि टेक्नोलॉजी स्टार्टअप फंड में आवंटन बढाकर ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी आधारित कृषि स्टार्टअप को सपोर्ट करे. इस ब्लॉकचैन तकनीक के आने से किसानों को काफी फायदा मिलेगा.

( लेखक बर्मिंघम युनिवेर्सिटी इंग्लेंड के रिसर्च स्कॉलर है एवं ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञ है) 

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