इस दोष को दूर करने के लिए किया जाता है ऋषिपंचमी का व्रत

0
14
vrat katha-

the fast of the rishipanchami, is done to remove this flaw

भादों मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ऋषी पंचमी का त्यौहार मनाया जाता हैं ।इस दिन महिलाये व्रत करती हैं ।ऋषियों की पूजा करने के बाद कहानी सुनी जाती हैं ,उसके बाद एक समय फलाहार लेते हैं महिलाये जब माहवारी से होती हैं तब गलती से कभी मंदिर में चली जाती हैं या कभी पूजा हो वहाँ चली जाती हैं तो उसका दोष लगता हैं ।उस दोष को दूर करने के लिए यह व्रत किया जाता हैं ।

Related image
via

ऋषी पंचमी की व्रतकहानी –
एक नगर में एक ब्राह्मण रहता था ।एक दिन ब्राह्मण की पत्नी ने ऋषि पंचमी का उद्यापन करने की सोची ।इसकेलिए उसने ऋषियों को भोजन के लिए आमंत्रण दिया ।लेकिन दुसरे दिन वह दूर की हो गई उसने सोचा अब क्या करे ,वह अपनी पड़ोसन के पास गई और पुछा “की मैं क्या करु ,मैंने तो आज ऋषियों को जीमने का न्योता दिया है और आज ही मैं दूर की हो गई “! पड़ोसन ने कहा कि तू सात बार नहा ले और सात बार कपड़े बदल ले और फिर खाना बना ले । उसने ऐसा ही किया ।

Image result for ऋषि पंचमी
via

ऋषि जब घर आए और ब्राहमण की पत्नी से पूछा” कि हम 12 वर्ष में आँख खोलते हैं भोजन में कोई आपत्ति तो नहीं हैं “! ब्राहमण की पत्नी ने कहा “कि भोजन में कोई आपत्ति नहीं है ” आप आँख खोलिए ऋषियों ने जैसे ही आँख खोली तो देखा कि भोजन में लट-कीड़े हैं यह देखकर उन्होंने ब्राहमण व् उसकी पत्नी को श्राप दे दिया । उनके श्राप के कारण अगले जन्म में ब्राहमण ने तो बैल का व उसकी पत्नी ने कुतिया के रूप में जन्म लिया ।

Related image
via

दोनों अपने बेटे के यहाँ रहने लगे । बेटा बहुत धार्मिक था ।एक दिन लडके के माता-पिता के श्राद्ध का दिन आया ,इसलिए उसने ब्राहमणों को भोजन पर बुलाया । यह देख बैल व् कुतिया बाते करने लगे की आज तो अपना बेटा श्राद कर रहा हैं खीर पुड़ी खाने को मिलेगी ।ब्राह्मन के बेटे की बहु खीर बनाने के लिए दूध चूल्हे पर चढ़ा कर अन्दर गई तो दूध में एक छिपकली का बच्चा गिर गया ।कुतिया यह देख रही थी । उसनें सोचा की ब्राहमण यह खीर खायेगें तो मर जायेगें और अपने बहु-बेटे को श्राप लगेगा । ऐसा सोचकर उसनें दूध कि भगोनी में मुहँ लगा दिया । बहु ने ये सब देख लिया ।उसे बहुत क्रोध आया ,उसनें चूल्हे की लकड़ी निकाल कर कुतिया को बहुत मारा । उसकी कमर टूट गई ।बहु ने उस दूध को फैका ,और दुबारा से रसोई बनाई व आमंत्रित ब्रह्मण और ब्राह्मणी को जीमाया ।बहु रोज़ कुतिया को रोटी देती थी ,पर उस दिन खाने को कुछ भी नहीं दिया ।रात को कुतिया बैल के पास गई ,और बोली आज तो मूझे बहु ने बहुत मारा मेरी कमर ही टूट गई और रोटी भी नहीं दी ।बैल बोला आज मैं भी बहुत भूखा हूँ ,आज मुझे भी खाने को कुछ नहीं मिला ।

Image result for ऋषि पंचमी..
via

दोनों बातें कर रहे थे कि तुने पिछले जन्म में दूर की होने पर भी ऋषियों के लिए खाना बनाया था अत: उन्ही के श्राप के कारण हमे ये सब भुगतना पड़ रहा हैं ।वे दोनों जब ये बाते कर रहें थे ,तो उनके बेटे ने उनकी बाते सुन ली ।उसे अपने माता – पिता के बारे में ये सब सुन कर बहुत दु:ख हुआ ।उसने कुतिया को रोटी दी और बैल को चारा दिया दुसरे दिन वह ऋषयो के पास गया और अपने माता – पिता की मुक्ति का उपाय पूछा ।ऋषि बोले की भादवे की शुक्ल पक्ष की पंचमी को व्रत करना और अपने माता-पिता को ऋषियों के नहाये पानी से नहलाना ।उसने एसा ही किया और अपने माता-पिता को कुतिया बैल की योनी से मुक्ति करायी ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here