कर्मचारी झेल रहे दोहरी मार, डीए में बढ़ोतरी और जीपीएफ ब्याज दरों में नहीं हुआ इजाफा

इसी साल डीए की दरों में वृद्धि की गई, लेकिन केंद्र सरकार ने गत मार्च में "महंगाई भत्ते" में 3 फ़ीसदी की वृद्धि की थी और इसका फायदा से 47 लाख कर्मचारियों एवं 68 लाख पेंशनभोगियों को मिला।

लगातार बढ़ती महंगाई के चलते कर्मचारियों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। क्योंकि एक तरफ रोजमर्रा की वस्तुओं पर जीएसटी बढ़ जाने की वजह से तो वहीं दूसरी और डीए की दरें बढ़ाने की कोई घोषणा नहीं हुई है। जीपीएस एवं अन्य योजनाओं पर मिलने वाले ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी नहीं हो पाई। जिसके चलते भी कर्मचारी बहुत परेशान है। केंद्रीय कर्मचारियों को साल में अब दो बार, जनवरी और जुलाई में डीए बढ़ोतरी की है, लेकिन कोविड-19 के चलते लंबे समय से डीए में बढ़ोतरी नहीं हुई है।

मिली जानकारी के अनुसार डीए में बढ़ोतरी पिछले साल ही की गई लेकिन डेढ़ साल के एरियर को लेकर सरकार विश्वाश नही दिलाया। हालांकि इसी साल डीए की दरों में वृद्धि की गई, लेकिन केंद्र सरकार ने गत मार्च में “महंगाई भत्ते” में 3 फ़ीसदी की वृद्धि की थी और इसका फायदा से 47 लाख कर्मचारियों एवं 68 लाख पेंशनभोगियों को मिला। हालांकि 3 फीसदी की वृद्धि होने से केंद्रीय कर्मियों का डीए 31 से बढ़कर 34 फीसदी हो गया। जुलाई में डीए में कितनी बढ़ोतरी हो पाएगी इसकी घोषणा अभी नहीं हो पाई है। लेकिन केंद्रीय सरकार ने वर्ष 2022-23 के समय सामान्य भविष्य निधि के साथ उसी प्रकार की अन्य निधियों के अभीदाताओं की कुल जमा रकमों पर दी जाने वाली ब्याज दर 1 जुलाई 2022 से 30 सितंबर 2022 तक 7.1 फीसदी रखी है और यह दरें 1 जुलाई 2022 से लागू होने की बात सामने आई हैं।

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लेकिन डीए में बढ़ोतरी की आस केंद्र सरकार के कर्मियों को काफी समय थी। सभी सोच रहे थे कि जल्दी ही अब बड़ी हुई ब्याज दरों का तोहफा मिलने वाला है। लेकिन लंबे समय से ब्याज दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं हो पाई है। हालांकि आपको बता दें कि 2022 अप्रैल में केंद्र सरकार ने GPF पर मिलने वाली ब्याज की दर 7.9 फीसदी से घटाकर 7.1 फीसदी कर दी थी। जिसके बाद से अभी तक इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। जिसको लेकर कर्मचारियों में नाराजगी है और बढ़ती महंगाई के चलते एवं ब्याज दरों में बढ़ोतरी नहीं होने से कर्मचारी भी परेशान है।