Breaking News

बांध तोड़ने की ताकत रखने वाले महाराष्ट्र के ‘महाबली’ केंकड़े…!

Posted on: 11 Jul 2019 09:45 by Ayushi Jain
बांध तोड़ने की ताकत रखने वाले महाराष्ट्र के ‘महाबली’ केंकड़े…!

अजय बोकिल
मामला जितना दिलचस्प है, उससे कहीं ज्यादा गंभीर और चेतावनी भरा है। मसला महाराष्ट्र का है लेकिन इसे मध्यरप्रदेश के संदर्भ में भी समझा जाना चाहिए। पश्चिमी महाराष्ट्र में हाल में हुई भारी बारिश के कारण रत्नागिरी जिले में स्थित तिवारे बांध टूट गया। इसमें 19 लोग बह गए। महाराष्ट्र सरकार ने इस गंभीर हादसे की जांच के लिए एसआईटी गठित की है, जो दो माह में अपनी रिपोर्ट देगी।

जब यह सवाल उठा कि आखिर बांध टूटा कैसे और इसके लिए कौन जिम्मेदारी है तो राज्य के जल संरक्षण मंत्री तानाजी सावंत ने ज्ञान दिया कि दरअसल केकड़ों ने बांध की दीवारों को कमजोर कर दिया था, इसलिए बांध टूटा। इस हास्यास्पद बयान से भड़के राकांपा कार्यकर्ताअों ने ‍सांवत के घर के सामने प्रदर्शन किया।

इसमें केंकड़ों को यह सवाल करते दिखाया गया ‍िक आखिर हमारा क्या दोष है? इतना ही उन्होंने मंत्री के घर के सामने केंकड़े भी बड़ी संख्या में छोड़े। दूसरी तरफ बांध टूटने से प्रभावित गांवों के निवासियों ने सवाल किया कि क्या अब सरकार आरोपी केंकड़ों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करेगी?

तानाजी सावंत महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार में शिवसेना कोटे के मंत्री हैं और अपने विवादास्पद बयानों के लिए जाने जाते है। एक बार उन्होंने यह भी कह दिया था ‍िक मैं पूरे महाराष्ट्र को भिखारी बना दूंगा लेकिन खुद कभी भीख नहीं मांगूंगा। तिवरे बांध हादसे पर उनका दावा था कि इस बांध में पिछले 15 सालों से पानी संरक्षित हो रहा है, लेकिन कोई दरार नहीं आई थी।

बांध साल 2004 में बना था। हालांकि, बांध में केकड़ों की बड़ी समस्या है और इसी कारण से बांध में दरार आई है।‘ वैसे महाराष्ट्र में सांवत अकेले मंत्री नहीं हैं। इसके पहले राज्य के पूर्व जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने पिछले साल पुणे में मुथा नहर की दाहिनी दीवार गिरने के लिए चूहों को जिम्मेदार ठहराया था।

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में देश के सर्वाधिक 2 हजार 3 सौ 54 छोटे बड़े बांध हैं। इनमें से 1 हजार 352 बांधों का सुरक्षा आॅडिट डैम सेफ्टीब आॅर्गनाइजेशन ( डीएसअो) ने किया था, जिसमें 3 सौ बांध खतरनाक स्थिति में पाए गए। 4 बांध ऐसे थे, जिनका तुरंत जीर्णोद्धार जरूरी है। हर बांध की एक उम्र होती है। बांधों को दीर्घकाल तक उपयोगी और कार्यक्षम बनाए रखने के लिए समय समय उनकी मरम्मत व रखरखाव करना जरूरी होता है।

लेकिन इसमें अक्सर लापरवाही बरती जाती है। जिसका नतीजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। महाराष्ट्र के बाद मध्यप्रदेश देश का दूसरा राज्य है, जहां 906 बांध हैं। हालांकि मध्यप्रदेश में अभी इतनी बारिश नहीं हुई है कि बांधो को खतरा महसूस हो, लेकिन महाराष्ट्र से सबक लेकर हमे भी अपने बांधों का सही समय पर सुरक्षा आॅडिट करना चाहिए। वैसे यह काम होता भी है, लेकिन हमारे बांधों की ताजा सुरक्षा स्थिति क्या है, यह सामने आना चाहिए।

निश्चित ही कोई भी बांध रखरखाव की लापरवाही या भयंकर बाढ़ की स्थिति में ही फूट सकता है। लेकिन यह काम केंकड़े कर सकते हैं, यह बात आसानी से गले उतरने वाली नहीं हैं। केंकड़ों का स्वभाव यह है कि वो दूसरे को अपने से आगे नहीं जाने देते। टांग खींचने का गुण मनुष्य ने शायद उन्हीं से सीखा है। लेकिन वो कोई बांध भी तोड़ सकते हैं, इस पर यकीन करने के लिए आप को या तो केंकड़ा या फिर मंत्री होना पड़ेगा। हो सकता है कि केंकड़ों ने बांध में कोई बड़ा सूराख कर दिया हो, जिससे बांध टूट गया हो और आसपास के इलाकों में तबाही आ गई हो।

निश्चित तौर पर किस कारण से यह भयंकर हादसा हुआ, यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा। लेकिन मंत्रीजी को यह पहले ही कैसे मालूम चल गया कि तिवरे बांध केंकड़ों के कारण फूटा। इससे मंत्रीजी की समझ के साथ-साथ केंकड़ों की ताकत का भी पता चलता है। अगर राज्य के केंकड़े और चूहे इतने ताकतवर हैं तो फिर बाकी निजाम की जरूरत ही क्या है? कहा तो यह भी जा रहा है कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार अपने आदमियों को बचाने के लिए मंत्रीजी ने केंकड़ों को मामले में फंसाया है।

यानी कि जिन लोगों ने हादसे में अपने प्राण गंवाए, उसका ठीकरा केंकड़ों के सिर। यह एक बेहद गैर जिम्मेदाराना और खतरनाक ट्रेंड है। अगर सरकारें इसी तरह अपनी ज्म्मिेदारियां अन्य प्राणियों पर ढोलती रहीं तो असली दोषी को पकड़ना नामुमकिन हो जाएगा और पहले ही इंसानी दखल से परेशान प्राणियों को बवजह अपनी जानें गंवानी पड़ेगी।

Latest News

Copyrights © Ghamasan.com