BCCI की ये कैसी पॉलिसी, इन 17 को करना होगा संन्यास का ऐलान!

मैदान पर चौके-छक्के की बारिश देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ती है। हर कोई खिलाड़ियों को लेकर बात करता नजर आता है। हर शख्स की इच्छा होती है कि वह अपने मनपसंद खिलाड़ी से मिल सकते।

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नई दिल्ली: क्रिकेट मैच और क्रिकेटर्स के लिए देश के लोगों में कितनी दीवानगी है इसका अंदाजा तो इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब भी कही मैच होता है तो उसे देहने के लिए लाखों लोग तैयार रहते है। मैदान पर चौके-छक्के की बारिश देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ती है। हर कोई खिलाड़ियों को लेकर बात करता नजर आता है। हर शख्स की इच्छा होती है कि वह अपने मनपसंद खिलाड़ी से मिल सकते।

एक मैच का सफल आयोजन कराने में हजारों लोगों का योगदान होता है। जब ये लोग अपनी-अपनी जिम्मेदारियां अच्छी तरह निभाते है तब जाकर आप मैच का मजा उठा सकते है। मैच के दौरान हर किसी का एक ही सवाल होता है ‘स्कोर क्या हुआ है?’

क्या आप जानते है कि आपके पास सही स्कोर कैसे पहुंचता है? शायद नहीं, तो सही स्कोर बताने का काम स्कोरर्स का होता है। ये स्कोरर्स पल-पल बदलते मैच का अपडेट आप तक पहुंचाते है लेकिन यदि ये स्कोरर्स नहीं रहे तो क्या होगा। बीसीसीआई की रिटायरमेंट पॉलिसी के चलते देश के 17 स्कोरर्स भी इतने ही निराश, नाराज और टूटे हुए महसूस कर रहे हैं क्योकि कहा जा रहा है कि अब उनकी सेवाओं की जरूरत नहीं है। हालांकि ये उनसे संस्था की ओर से औपचारिक तौर पर नहीं कहा गया है।

दरअसल, बीसीसीआई की रिटायरमेंट पॉलिसी के चलते इस सत्र की शुरुआत तक 60 साल के हो चुके 17 स्कोरर्स पर आगे काम नहीं मिलने का खतरा मंडरा रहा है। इस सीजन में इन स्कोरर्स को कोई काम नहीं दिया जाएगा। हालांकि बीसीसीआई की ओर से इन्हें रिटायरमेंट को लेकर कोई इशारा नहीं किया गया है।

बीसीसीआई को लिखा पत्र

ऐसी स्थिति में इन स्कोरर्स ने बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली को लिखे पत्र में कहा है, ‘अगर हमें ये बता दिया जाता कि आने वाला सीजन आपका आखिरी होगा तो ये अच्छा रहता। इससे स्कोरर्स को ये बात स्वीकारने में आसानी रहती।’ एक स्कोरर्स ने तो यहां तक कह दिया कि, ‘हम एक तरह से बीसीसीआई के कर्मचारी नहीं हैं तो रिटायर कैसे हो सकते हैं। इसके अलावा अंपायरों, मैच रेफरी की तरह हमें अधिक मैच फीस, पेंशन जैसे लाभ भी नहीं मिलते हैं। हमनें जुनून के लिए ये काम किया है। यहां तक कि प्रतिदिन 50 रुपये से इसकी शुरुआत की थी। हमें कई बलिदान भी करने पड़े।कई स्कोरर्स ने तो अपने प्रमोशन तक इसलिए छाेड़ दिए क्योंकि वे अपने सेंटर पर ही स्कोरिंग करना चाहते थे।’

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