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साइबर पर सिखा कंप्यूटर, आज है सॉफ्टवेयर कंपनी का मालिक

Posted on: 12 Jan 2019 18:03 by Surbhi Bhawsar
साइबर पर सिखा कंप्यूटर, आज है सॉफ्टवेयर कंपनी का मालिक

मैं अशिक कुमार सक्सेना सॉफ्टवेयर एंड वेबसाइट डेवलपर हूँ। मैंने अपनी IT कंपनी 2010 में स्टार्ट की थी जिसका नाम “SEVENI INTERNET SERVICES” है और साथ ही क्लाउड कंप्यूटिंग कंसलटेंट, सिक्योरिटी एडवाइजर, डेडिकेटेड सर्वर, सर्वर मैनेजमेंट, में डील करते है।

इंट्रोडक्शन-

मेरा जन्म संस्कारधानी जबलपुर (मध्य प्रदेश) में 13-दिसंबर-1989 को हुआ। मैं लोअर मिडिल क्लास फैमली से बिलॉंग करता हूँ। मेरी फैमली में 4 लोग है पापा, मम्मी, मैं और मेरी छोटी बहन। मेरे पापा हिन्दू फैमली से है और मां मुस्लिम फैमली से। पापा गवर्नमेंट जॉब करते है, और मां हाउस वाइफ है।

एजुकेशन-

स्कूलिंग मैंने जबलपुर के लेनार्ड हायर सेकेंडरी स्कूल से किया और कॉलेज मैंने बैचलर इन कंप्यूटर एप्लीकेशन (B.C.A) M.C.R.P से किया।

अर्ली लाइफ-

मैं बचपन से ही इंजीनियर बनना चाहता था। जो भी पूछता था बड़े हो कर क्या बनोगे? मेरा जवाब “इंजीनियर” रहता था। जब मैं 3rd क्लास में था तब पहली बार मैंने कंप्यूटर देखा था। उस समय मुझे बिल्कुल भी नहीं पता था कि कंप्यूटर होता क्या है। उस समय मुझमे कंप्यूटर को जानने की इच्छा बढ़ने लगी थी। जब स्कूल में कंप्यूटर पीरियड होता था तब मैं सिर्फ अपना नाम टाइप करता था और उसी में खुश हो जाता था। मैं जब 5th क्लास में गया तब कंप्यूटर में गेम खेलना स्टार्ट किया। उसके बाद से मेरी कंप्यूटर चलाने की क्युरीआसिटी बढ़ती चली जा रही थी। घर आने के बाद मैं ज़िद करने लगा की मुझे भी कंप्यूटर चाहिए। लेकिन उस टाइम लोअर मिडिल क्लास फैमिली होने के कारण पापा एफर्ट नहीं कर सकते थे। फिर कुछ समय बाद मुझे साइबर कैफ़े का पता चला, मैं वहां जाकर कंप्यूटर 10 रुपय देकर 1 घंटा चलाता था। साइबर कैफ़े से ही पता चला था इंटरनेट के बारे में कि इसके जरिये गेम खेल सकते है।

मेरा इंटरेस्ट देख कर फिर पापा ने अपने एक फ्रेंड से की, उनकी कंप्यूटर हार्डवेयर की शॉप थी। उसके बाद उन्होंने मुझे अपनी कंप्यूटर हार्डवेयर की शॉप में बुलाया, ताकि मैं उनके साथ काम करू। मैं वहां जाकर कंप्यूटर हार्डवेयर का काम देखता था और देख-देख कर मैं सीखता गया। फिर उनकी शॉप में ही इंटरनेट चलाता था। मैंने उस समय पहली बार अपनी email id बनाई थी। वही पर मैं कंप्यूटर हार्डवेयर का काम करने लगा। जैसे- कंप्यूटर असेम्बल करना, कंप्यूटर फॉर्मेट करना, कीबोर्ड-माउस बनाना और मैं काम करने की सैलरी नहीं लेता था। मैंने वहां पर चार महीने काम किया। साथ ही साथ वहां मैं बहुत ज़्यादा इंटरनेट चलाता था। इंटरनेट यूज़ करते-करते वेबसाइट शब्द पता चला।

फिर दोबारा मैं मां से पैसे लेकर साइबर कैफ़े जाने लगा और वेबसाइट के बारे में रिसर्च शुरू कर दी कि आखिर ये होता क्या है। रिसर्च के दौरान पता चला कि वेबसाइट को बनाने के लिए html की प्रोग्रामिंग करनी पड़ती है और वेबसाइट रन करने के लिए डोमेन नाम, एंड सर्वर की ज़रुरत पड़ती है।

करियर की शुरुआत-

मेरे करियर की शुरुआत सबसे पहले पापा से 1 लख रुपये लेकर हुई। मैंने उस पैसे से FMCG का काम स्टार्ट किया। मेरे पास बहुत सी कंपनी की डिस्ट्रीब्यूशनशिप थी, जबलपुर की किराना/जनरल शॉप्स में होल्सेल में सामान देता था। ये काम काफी अच्छा चलने लगा था। इसी काम की वजह से जबलपुर में हर शॉप्स वाले पहचानने लगे थे। ये काम मैंने चार साल किया लेकिन इस काम में सेटिस्फैक्शन नहीं था क्योकि मुझे इंजीनियर बनना था। ये मेरे इंटरेस्ट का काम नहीं था। फिर मैंने पूरा पैसा पापा को वापस करके ये काम बंद कर दिया था।

मैंने 2010 में वेब डिजाइनिंग कंपनी स्टार्ट किया जिसका नाम “Techno InfoWeb Solutions” रखा। इसमें मैं वेब डिजाइनिंग, डोमेन रजिस्ट्रेशन, वेब होस्टिंग करता था। लेकिन इस काम में मेरी कोई पहचान न होने के कारण मुझे कोई काम नहीं मिलता था। उस टाइम समस्या ये भी थी कि लोगों को इतना पता भी नहीं होता था कि वेब डिज़ाइन क्या है लेकिन मुझे इंटरनेट का बिल और अदर एक्सपेंसेस खुद से ही पे करना था उसके लिए मैंने अपने फ्रेंड्स को इंटरनेट शेयर किया ताकि उनसे जो पैसे मिले उस पैसे से मैं अपने इंटरनेट का बिल और अदर एक्सपेंसेस पे कर सकू।

कंपनी का नाम बदलना-

एक साल बाद 2011 में मैंने “Techno InfoWeb Solutions” से नाम बदलकर “Seveni Internet Services” नाम कर दिया था। काम की शुरुआत हुई सबसे पहले डोमेन रजिस्ट्रेशन एंड वेब होस्टिंग से।

मेरी लाइफ का स्ट्रगल-

मैं जब काम के लिए जाता था, तब लोग मेरे एजुकेशन के बारे में पूछते थे। मैं सिर्फ 12th पास था। फिर मुझे थोड़ी प्रॉब्लम हुई क्योकि यहां पर एजुकेशन को ज़्यादा इम्पोर्टेंस देते है। 2011 में मैंने कॉलेज में एडमिशन लिया। काम के साथ ही पढाई चलती रही। मुझे 5-6 महीनो में एक वेबसाइट डिजाइनिंग के लिए मिलती थी। मुझे बहुत लोगो के पास जाना पड़ता था लेकिन कोई काम नहीं देता था। उस टाइम मैं फेमस नहीं था न ही कोई पहचान थी। फिर 2013 से मेरा काम थोड़ा बेटर हुआ। कुछ लोग काम देने लगे। उसी साल मैंने लगभग 13 वेबसाइट डिज़ाइन किया था। ये मेरे करियर की पहली शुरुआत थी जब मैंने 13 वेबसाइट डिज़ाइन किया। साल 2014 कि स्टार्टिंग में मुझे फिर काम को लेकर प्रॉब्लम हुई लेकिन साल के आखिरी में मेरा काम बढ़ने लगा। लोगों का ट्रस्ट मिलने लगा। लोगों से पहचान भी होने लगी थी। फिर धीरे-धीरे लोग मेरी कंपनी को भी जानने लगे थे।

अब मेरी कंपनी को 8 साल हो गए है लेकिन अब कंपनी के नाम से काम आता है। लोगों के बीच मेरा नाम परिचित हो गया है। लोग मुझे मेरे काम की वजह से जानते है। मुझे न सिर्फ जबलपुर से बल्कि दूसरे शहरों से भी काम के लिए एप्रोच किया जाता है। मुझे कुछ प्रोजेक्ट अब्रॉड से भी मिल रहे है।

प्रोग्राममिंग & टेक्नालजी-

पहले वेब डिजाइनिंग के लिए मैंने लैंग्वेज सीखा जिसमे (html, CSS, JavaScript, JQuery) थी और ये मैंने ऑनलाइन टुटोरिअल्स के जरिए सीखा। वेब डेवलपमेंट के लिए मैंने php (Symfony, Laravel, Codeigniter) प्रोग्रामिंग ऑनलाइन टुटोरिअल्स से सीखा। कुछ टाइम बाद Java (Springs, hibernate) में भी वेब एप्लीकेशन डेवेलप करना स्टार्ट कर दिया। 2015 से सर्वर मैनेजमेंट के साथ ही क्लाउड कंप्यूटिंग का भी काम स्टार्ट कर दिया। फिर 2018 से मैं एंड्राइड एप्लीकेशन डेवलपमेंट का काम स्टार्ट कर दिया।

माय पॉइंट इन मोटवैशन-

आप अपनी लाइफ को सिमित दायरे में भी जी सकते है या बड़े पैमाने में भी जी सकते है। डिसाइड आपको करना है कि आप क्या चाहते है। ज़्यादातर सिमित दायरे में जॉब करने वाले अपनी लाइफ जीते है लेकिन जिनमे आन्ट्रप्रनर्शिप वाली क्वालिटी होती है, वह अपनी बड़ी लाइफ जीते है क्योकि वह अपना स्टार्टअप रन करते है।

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