मकर संक्रांति के दिन करें इन मंत्रों का जाप, आर्थिक तंगी के साथ हो जाएंगे सारे दुःख दूर

नए साल का पहला त्यौहार मकर संक्रांति होता हैं। इस बार यह त्यौहार 15 जनवरी यानि कल मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में इस पर्व का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बताया जाता है माना जाता है कि इस दिन सूर्य का उत्तरायण होता है और वे इस दिन मकर राशि में प्रवेश करते हैं।

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नए साल का पहला त्यौहार मकर संक्रांति होता हैं। इस बार यह त्यौहार 15 जनवरी यानि कल मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में इस पर्व का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बताया जाता है माना जाता है कि इस दिन सूर्य का उत्तरायण होता है और वे इस दिन मकर राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य देव को प्रकृति का कारक माना जाता है, इसलिए इस दिन सूर्य देव की उपासना की जाती है।

मकर संक्रांति के दिन स्नान और दान का बहुत महत्व बताया जाता है। इस त्यौहार को लोग बड़े ही धूम-धाम से मनाते हैं। मकर संक्रांति एक ऐसा त्यौहार है जिसे अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। इस दिन बहुत से देवी देवताओं को पूजा जाता है। जैसे गणेश, लक्ष्मी, विष्णु, शिव और सूर्य को संयुक्त रूप से पूजा करते हैं। इसका वर्णन प्राचीन धर्मग्रंथों में भी है।

इस दिन ब्रह्म मुहुर्त में ही स्नान कर लें और किसी शुद्ध स्थान पर कुशासन पर बैठ जावें। इसके बाद पीले वस्त्र का एक आसन बिछा कर सवा किलो चावल और उड़द की दाल को मिलाकर समान पांच ढेरी लगा दें। फिर अपने दाहिने ओर से पंचशक्तियों की मूर्ति चित्र या यंत्र को ढेरी के ऊपर स्थापित कर उसमें धूप दीप जला लें। इसके बाद मन शांत करके एक एक शक्ति का स्मरण करें। और पंचोपकार विधि से पूजन करें। इसमें चंदन, नैवेद्य, अक्षत, पुष्प, फल अर्पित करें।

इसके बाद एक हवन भी करें। इस हवन के लिए आम की लकड़ी का प्रयोग करें। आम की लकड़ी को हवन कुंड में प्रज्जवलित कर 108 शक्ति मंत्र की आहूति करें। इसके बाद एक और माला का जाप करें। वेद और पुराणों की मानें तो गायत्री मंंत्र का प्रयोग सर्वाधिक फलित है। किसी भी देवी देवता की साधना में उस शक्ति के गायत्री मंत्र का प्रयोग सबसे अधिक फलित है। इसलिए कहा जाता है कि पंचशक्ति की साधना अगर करें तो गायत्री मंत्र का ही प्रयोग करें ।

इन मंत्रो का जाप करें-

श्री गणेश गायत्री मंत्र- ॐ तत्पुरुषाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ति प्रचोदयात्!

श्री शिव गायत्री मंत्र- ॐ महादेवाय विद्महे रुद्रमूर्तये धीमहि तन्नो शिव प्रचोदयात!

श्री विष्णु गायत्री मंत्र- ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु: प्रचोदयात!

महालक्ष्मी गायत्री मंत्र- ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात!

सूर्य गायत्री मंत्र- ॐ भास्कराय विद्महे महातेजाय धीमहि तन्नो सूर्य प्रचोदयात!

इसके बाद पंचशक्तियों की आरती करें। इसके तुरंत बाद पुष्पाजंलि भी अर्पित करें अर्थात फूल चढ़ाएं। इसके बाद एक सुपात्र को तिल के लड्डू, फल, मिठाई, खिचड़ी, वस्त्र दान करें। इससे पुण्य मिलेगा और आपको मनोवांछित मिलेगा। मकर संक्रांति में स्नान का भी विशेष महत्व है।

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