अयोध्या विवाद: केन्द्र की हिदायत, फैसले वाले दिन अपने निर्वाचन क्षेत्र में रहे सांसद-मंत्री

अयोध्या में विवादित श्रीरामजन्मभूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट कभी भी अपना फैसला सुना सकती है। इससे पहले केन्द्र सरकार ने सभी सांसदो (एनडीए) और मंत्रियों को हिदायत दी है कि वे फैसले वाले दिन अपने-अपने संसदीय क्षत्र में रहे।

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नई दिल्ली। अयोध्या में विवादित श्रीरामजन्मभूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट कभी भी अपना फैसला सुना सकती है। इससे पहले केन्द्र सरकार ने सभी सांसदो (एनडीए) और मंत्रियों को हिदायत दी है कि वे फैसले वाले दिन अपने-अपने संसदीय क्षत्र में रहे। साथ ही फैसले के कुछ दिनों बाद शांति व्यवस्था बनाए रखने में भी सहयोग दें। गौरतलब है कि अयोध्या विवाद पर जैसे-जैसे फैसले का वक्त नजदीक आता जा रहा है, वैसे-वैसे उत्तप्रदेश में सुरक्षा कड़ी की रही है। साथ ही सभी सुरक्षा ऐजेंसियां भी सतर्क है।

पुलिस मुख्यालय की ओर से सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील 34 जिलों के पुलिस प्रमुखों को भी निर्देशित किया गया है। जिसमें में मेरठ, आगरा, अलीगढ़, रामपुर, बरेली, फिरोजाबाद, कानपुर, लखनऊ, शाहजहांपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर और आजमगढ़ आदि शामिल है।

आरएसएस का संपर्क अभियान शुरू

इधर आरएसएस ने भी देश में सांप्रदायिक सौहार्द कायम रखने के मकसद से संपर्क अभियान शुरू किया है और मुस्लिम धर्मगुरुओं के साथ बैठके की जा रही है। संघ का शीर्ष नेतृत्व ऐसी एक दर्जन बैठकें करने की तैयारी कर रहा है। संघ द्वारा हर प्रांत में भी इस तरह की बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें संघ, भाजपा नेताओं के साथ मुस्लिम धर्मगुरु भाग ले रहे हैं।

इसी कड़ी में मंगलवार को बीजेपी नेता और केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के घर पर अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर एक बैठक हुई थी, जिसमें मुस्लिम धर्मगुरु और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नेता मौजूद थे। इस दौरान भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन और फिल्म निर्माता मुजफ्फर अली भी पहुंचे थे।

कोर्ट का हर फैसला स्वीकार: मौलाना अरशद मदनी

वहीं जमीयत उलेमा-ए-हिंद मौलाना अरशद मदनी ने भी कहा है कि कोर्ट इस मामले में जो भी निर्णय देगा, हम उसे स्वीकार करेंगे। साथ ही जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने मुसलमानों और अन्य लोगों से अपील भी की है कि कोर्ट के फैसले का सम्मान किया जाए। हालांकि उन्होने ये भी कहा कि अयोध्या में बिना किसी हिंदू मंदिर केा तोड़कर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया गया था। मुस्लिम एतिहासिक तथ्यों के आधार पर ये दावा करता रहे हैं।

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