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इलाहाबाद के समुद्रकूप में होता है सात समुद्रोंका मिलन

Posted on: 02 Jun 2018 09:50 by shilpa
इलाहाबाद के समुद्रकूप में होता है सात समुद्रोंका मिलन

नई दिल्ली:समुद्रकूप यानि समुद्र के पानी से बना कुंड। पुराणों में यह वर्णन मिलाता है की इस कुए में समुद्रोंका जल आकर मिलता इलाहाबाद में एक कुंआ है, जो कई हजार साल पुराना और सैकड़ो फीट गहरा है..और उससे भी अनोखी बात ये है की इस कुए में होता है सात समुद्रों का मिलन।.वर्तमान में ये कूप गंगा के किनारे एक विशाल ,उंचे टीले पर स्थित है।

वर्तमान में इलाहाबाद समीप झूंसी शहर है वो पूर्व में प्रतिष्ठान पुरी नामक नगर था जो कई हजार साल पहले चन्द्रवंश के पहले पुरुष राजा पुरुरवा ने बसाया था।उन्होंने कई १०० सालो तक यही रहकर यही अपना शासन किया। उनके शासन के दौरान स्वर्ग की अप्सरा उर्वशी भी उनके साथ करीब १०० साल तक यही रही। उर्वशी को ऋषि दुर्वासा ने तप में बाधा उत्पन्न करने के कारण मृत्युलोक में रहने का श्राप दिया था.इन्ही रजा पुरुरवा और उर्वशी की संतान से चन्द्रवंश चला और इसी चन्द्रवंश की ६५ कड़ी में भगवान श्री कृष्ण ने जन्म लिया.उन्ही राजा पुरुरवा ने ही इस समुद्रकूप का निर्माण करवाया था। राजा ने कई यज्ञ और अनुष्ठान के लिए
सातो समुद्रों का आवाहन इस कूप में किया था। तभी से इस कूप में सातो समुन्दरो का जल पाया जाता है.

इस समुद्र कूप के पुजारी महंत बाल कृष्ण कहते है कि‍ इस समुद्र कूप का वर्णन पद्म पुराण और मत्स्य पुराण में भी मिलता है। जब द्वापर युग मे पांचो पांडव लाक्षागृह से बच के आए थे तो उन्होंने यही पर रह कर इस कुंए के जल से अश्वमेघ यज्ञ किया था। यहीं से उनकी विजय के लिए ब्रह्मा जी ने उन्हे वरदान दिया था। पद्म पुराण मे यह वर्णन भी मिलता है कि एक मुनि ने इस कूप के बारे मे युधिष्‍ठि‍र को बताया था। यह वर्णन मिलता है कि‍ इस कूप के किनारे ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए क्रोध को शांत करके तीन रात तक यहां विश्राम कर ले तो उसके सब पाप कट जाते हैं। इसके जल का आचमन करने से परमपद की प्राप्ति होती है।

अमावस्या पूर्णिमा और चंद्रग्रहण के समय इस कूप की परि‍क्रमा से पृथ्वी की परि‍क्रमा का फल मिलता है। यहां पर स्नान दान करने से यश प्राप्त होता है और अंत में इंसान स्वर्ग को प्राप्त होता है।

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