सोनम रघुवंशी को जमानत दिलाने के लिए पुलिस ने की मदद? गिरफ्तारी चेकलिस्ट में हत्या का जिक्र नहीं होने पर उठे सवाल

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By Raj RathorePublished On: June 30, 2026
Sonam Raghuvanshi Bail News

राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी प्रक्रिया में कई गंभीर कानूनी खामियों की ओर इशारा किया है। अदालत ने अपने 20 पृष्ठों के आदेश में कहा कि शिलांग पुलिस गिरफ्तारी के दौरान निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पूर्ण पालन नहीं कर सकी, जिससे आरोपी के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हुए।

कोर्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि 27 अप्रैल 2026 को जिला अदालत ने सोनम को जमानत देते समय माना था कि गिरफ्तारी के दौरान आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। अदालत के अनुसार, सोनम को यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया कि उसे किस अपराध में गिरफ्तार किया जा रहा है, जो संविधान के अनुच्छेद 22(1) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 47(1) के प्रावधानों के विपरीत है।

गिरफ्तारी चेकलिस्ट पर जताई आपत्ति

हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी के समय तैयार की गई चेकलिस्ट पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि जिस दस्तावेज पर सोनम के हस्ताक्षर कराए गए, उसमें राजा रघुवंशी की हत्या या हत्या के आरोप का कोई उल्लेख नहीं था। इसके बजाय उसमें सामान्य प्रकृति के प्रश्न शामिल थे, जिनका इस मामले से सीधा संबंध नहीं था।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस प्रकार की चेकलिस्ट आरोपी को गिरफ्तारी के वास्तविक कारणों की प्रभावी जानकारी देने में विफल रही।

सिर्फ टाइपिंग मिस्टेक नहीं थी

सुनवाई के दौरान मेघालय सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल अमित कुमार ने दलील दी कि दस्तावेजों में धारा 103(1) के स्थान पर 403(1) लिखा जाना केवल टाइपिंग की त्रुटि थी।

हालांकि, सोनम की ओर से पेश अधिवक्ता एस. थापा ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह गलती केवल एक दस्तावेज तक सीमित नहीं थी। गिरफ्तारी मेमो, चेकलिस्ट, निरीक्षण दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड में भी वही गलत धारा दर्ज की गई थी, जिससे पुलिस की प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।

गाजीपुर कोर्ट की कार्यवाही पर भी उठे सवाल

मेघालय सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि गाजीपुर में गिरफ्तारी के बाद सोनम को कोर्ट में पेश किया गया था, जहां ट्रांजिट रिमांड मंजूर हुई और बाद में शिलांग कोर्ट में भी उसने गिरफ्तारी व आरोपों की जानकारी होने की पुष्टि की थी।

वहीं बचाव पक्ष ने कहा कि गाजीपुर कोर्ट के आदेश में भी गिरफ्तारी के कारण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं किए गए थे। इसलिए बाद की न्यायिक प्रक्रिया का हवाला देकर गिरफ्तारी के समय हुई कानूनी कमियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट की इन टिप्पणियों के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी के दौरान कानूनी प्रक्रिया और संवैधानिक अधिकारों का पालन अनिवार्य है।