मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भगवान परशुराम जी की जन्मस्थली जानापाव कुटी को एक भव्य और दिव्य तीर्थस्थल में बदलने के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि यहां 17 करोड़ 50 लाख रुपये से अधिक की लागत से ‘श्री परशुराम-श्री कृष्ण लोक’ का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य जानापाव को विश्वस्तरीय धार्मिक पर्यटन केंद्र बनाना है, जो देश-विदेश से श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा।
मुख्यमंत्री यादव ने 19 अप्रैल को जानापाव में आयोजित भगवान परशुराम प्रकटोत्सव कार्यक्रम के दौरान यह महत्वपूर्ण ऐलान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार भगवान कृष्ण और भगवान परशुराम से जुड़े सभी ऐतिहासिक स्थलों को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि इन्हें वैश्विक मानचित्र पर लाया जा सके। उनका मानना है कि यह लोक आने वाले श्रद्धालुओं को भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं और भगवान परशुराम के जीवन से प्रेरणा लेने और धार्मिक पुण्य अर्जित करने का अवसर प्रदान करेगा।
‘श्री परशुराम-श्री कृष्ण लोक’ की परिकल्पना
प्रस्तावित ‘श्री परशुराम-श्री कृष्ण लोक’ एक आधुनिक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र होगा। इसमें भगवान परशुराम और भगवान कृष्ण के जीवन, दर्शन और युद्धकला को अत्याधुनिक तकनीकों से प्रस्तुत किया जाएगा। इस परिसर में एक भव्य संग्रहालय बनाया जाएगा, जिसमें पांच मुख्य दीर्घाएं होंगी:
- शस्त्र दीर्घा: भगवान परशुराम के शस्त्र ज्ञान और उनके विभिन्न अस्त्रों का प्रदर्शन।
- उत्पत्ति दीर्घा: दोनों देवों के जन्म और आरंभिक जीवन की गाथाएं।
- स्वरूप दीर्घा: उनके दिव्य स्वरूपों और लीलाओं का चित्रण।
- संतुलन दीर्घा: धर्म और अधर्म के बीच संतुलन स्थापित करने में उनकी भूमिका।
- ध्यान दीर्घा: शांति और आत्मचिंतन के लिए समर्पित स्थान।
इसके अतिरिक्त, परिसर में भगवान परशुराम और भगवान कृष्ण की कांस्य प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी, जिनमें उनकी भव्यता और दिव्यता प्रदर्शित होगी। एक 30 फीट ऊंचा प्रवेश द्वार आगंतुकों का स्वागत करेगा। सुविधाओं में कथा मंच, गज़ेबो, व्यू पॉइंट, सुंदर लैंडस्केपिंग और सुव्यवस्थित पाथवे शामिल होंगे, जो इसे एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करेंगे।
भगवान परशुराम का प्रेरक जीवन
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संबोधन में भगवान परशुराम के जीवन को आस्था, श्रद्धा, परंपरा और सनातन संस्कृति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम ने हर युग में अन्याय और अधर्म के खिलाफ संघर्ष किया है। वे शस्त्र और शास्त्र दोनों के असाधारण ज्ञाता थे, जिनकी महत्ता भगवान राम के विवाह प्रसंग से भी जुड़ी है।

यादव ने भगवान परशुराम को ‘महागुरु’ के रूप में भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे महान योद्धाओं ने उनसे शिक्षा प्राप्त की थी। गुरु द्रोणाचार्य को दिव्यास्त्रों और ब्रह्मास्त्र का ज्ञान भगवान परशुराम से ही मिला था, जो युद्धकला और ज्ञान के क्षेत्र में उनके अप्रतिम योगदान को दर्शाता है।
भगवान कृष्ण और परशुराम का आशीर्वाद
मुख्यमंत्री ने भगवान श्री कृष्ण के जीवन में भगवान परशुराम के विशेष स्थान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण को कठिन परिस्थितियों में विजय दिलाने वाला सुदर्शन चक्र भी भगवान परशुराम के आशीर्वाद से ही प्राप्त हुआ था। इसी चक्र के माध्यम से भगवान कृष्ण ने बड़े-बड़े युद्धों में सफलता प्राप्त की और अपने गुरु को दक्षिणा दी।
राज्य सरकार के विकास कार्य
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में चौतरफा विकास कार्यों में जुटी है। सड़कों, पुलों, नहरों, सिंचाई सुविधाओं, अस्पतालों और स्कूलों का निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्कूलों को सनातन संस्कृति से जोड़ते हुए ‘सांदीपनि विद्यालय’ नाम दिया गया है, जिससे विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ सांस्कृतिक मूल्यों का भी ज्ञान मिल सके।
नदियों के पुनर्जीवन पर जोर
मुख्यमंत्री ने जानापाव क्षेत्र से उत्पन्न होने वाली आठ महत्वपूर्ण नदियों—चंबल, गंभीर, चौरल, अजनार, कारम, धाम्नी, नखेरी और सूमरा—का उल्लेख किया। उन्होंने इन्हें ‘धरती माता की धमनियां’ बताया और प्रशासन से गंभीर और अजनार नदी के पुनर्जीवन की योजना बनाने का आग्रह किया। उन्होंने केंद्र सरकार की नदी जोड़ो परियोजनाओं का भी जिक्र किया, जिससे किसानों को सिंचाई, पीने का पानी और बिजली की सुविधा मिलेगी।
महिलाओं के अधिकारों पर विपक्ष को घेरा
अपने संबोधन के अंत में, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने महिलाओं के अधिकारों को रोकने का काम किया है, जबकि उनकी सरकार महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि भविष्य में महिलाओं को उनके अधिकार अवश्य दिलाए जाएंगे।











