एमपी में महाघोटाला! बिना ऑर्डर स्कूलों में भेज दिया 2 करोड़ का सामान, पेमेंट के लिए बनाया दबाव

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By Raj RathorePublished On: April 2, 2026

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से एक बड़े घोटाले का मामला सामने आया है, जहां सिलवानी विकासखंड के 13 सरकारी स्कूलों में लगभग 2 करोड़ रुपये का कॉन्फ्रेंस हॉल फर्नीचर और अन्य सामान बिना किसी आधिकारिक मांग या ऑर्डर के पहुंचा दिया गया।

इस मामले में एक सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी को प्राथमिक जांच में दोषी पाए जाने के बाद निलंबित कर दिया गया है। शिक्षा विभाग अब इस अवैध खरीद के भुगतान को रोकने के लिए सख्त रुख अपना रहा है।

यह चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब स्कूलों में फर्नीचर की आपूर्ति के बाद भुगतान के लिए दबाव बनाया जाने लगा। जांच में सामने आया कि एक सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी ने कथित तौर पर खुद ही ऑर्डर तैयार किए और स्कूल प्रधानाचार्यों को बुलाकर पहले से तैयार कागजों पर हस्ताक्षर करने को कहा था। प्रधानाचार्यों ने अब धोखाधड़ी और गुमराह किए जाने की शिकायत दर्ज कराई है।

फर्नीचर की बेनामी सप्लाई

रायसेन जिले के सिलवानी विकासखंड के विद्यालयों में पहुंचे इस फर्नीचर की कुल कीमत करीब 2 करोड़ रुपये है। हैरानी की बात यह है कि कई स्कूलों में इन कॉन्फ्रेंस टेबल और घूमने वाली कुर्सियों की कोई आवश्यकता नहीं थी, इसके बावजूद उन्हें “बिन बुलाए बराती” की तरह भेज दिया गया।

प्रधानाचार्यों का आरोप है कि क्लर्क ने ये ऑर्डर न तो बड़े अधिकारियों से अनुमति लेकर तैयार किए और न ही सरकारी नियमों का पालन किया। जब उन्होंने विरोध किया, तो उन पर “ऊपर का आदेश है” कहकर दबाव बनाया गया।

13 स्कूलों पर असर, लाखों का नुकसान

यह षडयंत्र किसी एक स्कूल तक सीमित नहीं था, बल्कि कुल 13 स्कूल इससे प्रभावित हुए हैं। प्रत्येक स्कूल में लगभग 11.5 लाख रुपये का फर्नीचर भिजवाया गया है। विडंबना यह है कि कई स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह तक नहीं है, वहीं लाखों का फर्नीचर बिना आवश्यकता के पड़ा हुआ है।

इन स्कूलों में आमतौर पर 30-35 रिवॉल्विंग कुर्सियां और बड़ी कॉन्फ्रेंस टेबल भेजी गई हैं। प्रभावित स्कूलों में मुआर खैरी, कीरतपुर, सियलवाड़ा, करतोली, चीकली, देवरी हतनापुर, खमरिया खुर्द, चंदन पिपरिया, छीद, नारायणपुर, हायर सेकेंडरी प्रतापगढ़ और साईंखेड़ा जैसे नाम शामिल हैं।

भुगतान रोकने की कवायद, जांच जारी

फर्नीचर की सप्लाई के बाद अब आपूर्तिकर्ताओं द्वारा भुगतान के लिए स्कूलों और शिक्षा विभाग पर दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) रुपेंद्र ठाकुर ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना वैध दस्तावेज और बिल वाउचर के किसी भी भुगतान को मंजूरी नहीं दी जाएगी।

प्रभावित स्कूलों के प्राचार्यों ने जिला शिक्षा अधिकारी और बीईओ कार्यालय में लिखित शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिसमें उन्होंने अपने साथ धोखाधड़ी होने का आरोप लगाया है। स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों ने भी भुगतान से इनकार करते हुए फर्नीचर वापस लेने की मांग की है।

जिला शिक्षा अधिकारी ने भी पूरे मामले की जांच के लिए डीपीआई (लोक शिक्षण संचालनालय) को पत्र भेजा है। इस मामले में प्राथमिक जांच के बाद दोषी पाए गए संबंधित कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया है और विस्तृत जांच जारी है।