मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई लगातार तेज हो रही है, लेकिन उसके बावजूद सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे। ताजा मामला धार जिले से सामने आया है, जहां इंदौर लोकायुक्त टीम ने समग्र शिक्षा अभियान के जिला परियोजना समन्वयक प्रदीप खरे को 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
बताया जा रहा है कि आरोपी अधिकारी ने शौचालय निर्माण कार्यों के पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने के एवज में लाखों रुपये की डिमांड की थी। कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
शौचालय निर्माण कार्यों के एवज में मांगी रिश्वत
जानकारी के मुताबिक, प्रभारी सहायक यंत्री दिलीप साधव ने इंदौर लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत 122 शौचालय निर्माण कार्य पूरे होने के बाद पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करवाने के लिए वे जिला परियोजना समन्वयक प्रदीप खरे से मिले थे।
आरोप है कि प्रदीप खरे ने 3.42 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य में 5 प्रतिशत कमीशन की मांग की। यानी करीब 17 लाख रुपये रिश्वत मांगी गई। शिकायतकर्ता के अनुसार आरोपी ने पहली किस्त के तौर पर 1 लाख रुपये तत्काल देने के लिए कहा था।
लोकायुक्त ने बिछाया जाल
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त इंदौर ने पूरे मामले का सत्यापन किया और ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई। तय रणनीति के तहत सोमवार को शिकायतकर्ता रिश्वत की पहली किस्त लेकर धार सर्किट हाउस पहुंचा।
जैसे ही आरोपी अधिकारी ने 1 लाख रुपये लिए, पहले से तैनात लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बाद में आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत केस दर्ज किया गया।
रिश्वत मांगे तो तुरंत करें शिकायत
लोकायुक्त इंदौर इकाई ने साफ किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत की मांग करता है तो उसकी सूचना तुरंत लोकायुक्त कार्यालय को दें।
प्रदेश में लगातार सामने आ रहे घूसखोरी के मामलों ने एक बार फिर सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं लोकायुक्त की लगातार कार्रवाई से भ्रष्ट अधिकारियों में डर का माहौल भी देखने को मिल रहा है।











