मध्य प्रदेश विधानसभा में बजट अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भोपाल, इंदौर सहित अन्य शहरों के नए मास्टर प्लान को लेकर विपक्ष के निशाने पर आ गए। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने तीखा तंज कसते हुए पूछा कि आखिर मास्टर प्लान किस “बैलगाड़ी” से आ रहा है, जिसका वादा पिछले जून में किया गया था लेकिन अब तक लागू नहीं हुआ। कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह और डॉ. राजेंद्र सिंह ने भी इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। जवाब में मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि प्रक्रिया शासन स्तर पर है और जल्द स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
मेट्रो परियोजना पर आरोप-प्रत्यारोप
सदन में इंदौर और भोपाल की मेट्रो परियोजनाओं को लेकर भी तीखी बहस हुई। विपक्ष ने मेट्रो कार्यों की धीमी रफ्तार और कथित अव्यवस्थित योजना पर सवाल उठाए। मंत्री विजयवर्गीय ने सफाई देते हुए “नेटम टेक्नोलॉजी” का उल्लेख किया और हल्के अंदाज में इसे “केंचुआ तकनीक” बताया, जिसके जरिए जमीन के नीचे सुरंग बनाकर मेट्रो मार्ग तैयार किया जाता है। इस पर कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने पलटवार करते हुए कहा कि इंदौर में मेट्रो बंजर जमीन पर बनाई जा रही है, जहां ऐसी तकनीक का औचित्य नहीं है। बहस के दौरान सदन में एक कबूतर के उड़ने से माहौल हल्का भी हुआ, जिस पर मंत्री ने मजाकिया टिप्पणी की कि “कहीं यह दिल्ली से तो नहीं आया।”
सत्तापक्ष के विधायकों ने भी उठाए सवाल
चर्चा के दौरान केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्तापक्ष के सदस्यों ने भी अपने ही मंत्रियों को कठघरे में खड़ा किया। विधायक दिनेश राय मुनमुन ने सिवनी और पेंच नहर परियोजना में देरी और गुणवत्ता को लेकर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट से जवाब मांगा। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य समय पर और गुणवत्तापूर्ण नहीं हुआ, बावजूद इसके ठेकेदार को करोड़ों रुपये अग्रिम दे दिए गए। मंत्री सिलावट ने देरी स्वीकार की, लेकिन भरोसा दिलाया कि 2026 तक कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
उच्च शिक्षा और सहकारिता विभाग पर भी घेरा
सत्तापक्ष की सदस्य ललिता यादव ने Maharaja Chhatrasal Bundelkhand University में निर्माण कार्यों और स्वीकृत राशि के उपयोग पर सवाल उठाए। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अनियमितता से इनकार किया, लेकिन मामले की दोबारा जांच कराने की बात कही। वहीं सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने नवल सिंह सहकारी शक्कर कारखाने में गड़बड़ी और वित्तीय घाटे के आरोपों को स्वीकारते हुए जांच जारी होने की जानकारी दी।
सदन में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मांग
विधायकों ने विभिन्न विभागों में कथित भ्रष्टाचार के मामलों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। सहकारी संस्थाओं में खाद की कालाबाजारी और वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे भी उठे, जिन्हें मंत्रियों ने संज्ञान में लेते हुए कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने यह संकेत दिया कि बजट सत्र केवल वित्तीय चर्चा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और शहरी विकास नीतियों पर भी तीखी राजनीतिक बहस का मंच बन गया।










