एमपी दौरे पर राहुल गांधी, ट्रेड डील के खिलाफ करेंगे आंदोलन का आगाज, मल्लिकार्जुन खड़गे भी रहेंगे साथ

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By Raj RathorePublished On: February 24, 2026

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के भोपाल दौरे का कार्यक्रम तय हो गया है। पार्टी कार्यक्रम के अनुसार उनका राजधानी में कुल ठहराव 195 मिनट का रहेगा। इसी दौरान ट्रेड डील के विरोध में कांग्रेस का अभियान भी शुरू हो चुका है।

मध्यप्रदेश की राजनीति में इस दौरे को संगठनात्मक और मुद्दा-आधारित कार्यक्रम के रूप में देखा जा रहा है। राहुल गांधी का यह दौरा समय के लिहाज से छोटा है, लेकिन पार्टी के लिए इसका संदेश स्पष्ट माना जा रहा है कि ट्रेड डील के मुद्दे पर विरोध को राष्ट्रीय नेतृत्व का समर्थन मिलेगा।

प्रदेश कांग्रेस के स्तर पर दौरे को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी, कार्यक्रम स्थलों की व्यवस्था और समयबद्ध संचालन पर फोकस रखा जा रहा है, क्योंकि दौरे की कुल अवधि सीमित है और कार्यक्रम को तय समय में पूरा करना होगा।

195 मिनट का तय कार्यक्रम

राहुल गांधी के भोपाल प्रवास को 195 मिनट में समेटा गया है। इसका मतलब है कि आगमन से लेकर प्रस्थान तक पूरे कार्यक्रम को सख्त समय-सारिणी के अनुसार चलाया जाएगा। ऐसे दौरों में आमतौर पर स्वागत, संगठनात्मक मुलाकात, सार्वजनिक या प्रतीकात्मक कार्यक्रम और वापसी शामिल रहती है, इसलिए स्थानीय इकाइयों को समन्वय की जिम्मेदारी दी जाती है।

कांग्रेस के लिए यह दौरा केवल उपस्थिति दर्ज कराने तक सीमित नहीं है। कम समय के बावजूद पार्टी इसे मुद्दा-केन्द्रित राजनीतिक हस्तक्षेप के रूप में पेश कर रही है। राहुल गांधी की मौजूदगी से प्रदेश नेतृत्व को भी कार्यकर्ताओं के बीच ऊर्जा और स्पष्ट दिशा देने का अवसर मिलेगा।

ट्रेड डील के विरोध की शुरुआत

राहुल गांधी के प्रस्तावित भोपाल दौरे से पहले ही ट्रेड डील के विरोध में कांग्रेस ने आंदोलन की शुरुआत कर दी है। पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की कोशिश कर रही है और इसे राष्ट्रीय स्तर की चिंता बताकर राजनीतिक अभियान बना रही है।

विरोध कार्यक्रम की शुरुआत से संकेत मिलता है कि पार्टी इस मुद्दे को केवल बयानबाजी तक नहीं रखना चाहती। राहुल गांधी की मौजूदगी के साथ इसे जमीन पर चल रहे अभियान से जोड़ा जा रहा है, ताकि राज्य और राष्ट्रीय राजनीति के बीच एक सीधी राजनीतिक रेखा बनाई जा सके।

कांग्रेस की रणनीति यह भी दिखाती है कि वह आर्थिक और नीतिगत मुद्दों पर विपक्षी राजनीति को सक्रिय रखना चाहती है। ट्रेड डील जैसे विषयों पर पार्टी अक्सर व्यापक प्रभाव, स्थानीय हित और नीति-निर्माण की प्रक्रिया को बहस के केंद्र में लाने की कोशिश करती रही है। भोपाल का कार्यक्रम उसी क्रम का हिस्सा माना जा रहा है।

मध्यप्रदेश कांग्रेस के लिए राजनीतिक संकेत

भोपाल में राहुल गांधी का सीमित समय का दौरा भी प्रदेश संगठन के लिए अहम माना जा रहा है। जब राष्ट्रीय नेतृत्व किसी खास मुद्दे के साथ राज्य में आता है, तो उसका असर कार्यकर्ता-स्तर की सक्रियता, स्थानीय नेतृत्व की भूमिका और आगे के कार्यक्रमों की दिशा पर पड़ता है।

प्रदेश कांग्रेस के सामने इस समय दोहरी चुनौती रहती है—एक तरफ संगठन को सक्रिय रखना और दूसरी तरफ मुद्दों पर निरंतर सार्वजनिक उपस्थिति बनाए रखना। ट्रेड डील विरोध अभियान और राहुल गांधी का दौरा, दोनों मिलकर पार्टी को यह अवसर दे रहे हैं कि वह राज्य में अपनी राजनीतिक लाइन को फिर से स्पष्ट करे।

आगे की रणनीति पर नजर

राहुल गांधी के भोपाल प्रवास के बाद पार्टी के अगले कदमों पर भी नजर रहेगी। अगर ट्रेड डील विरोध अभियान को राज्यभर में विस्तार दिया जाता है, तो यह कांग्रेस के लिए चरणबद्ध आंदोलन का रूप ले सकता है। फिलहाल, फोकस भोपाल कार्यक्रम को समयबद्ध और प्रभावी तरीके से पूरा करने पर है।

कुल मिलाकर, 195 मिनट का यह दौरा समय में छोटा लेकिन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ राष्ट्रीय नेता की मौजूदगी रहेगी, दूसरी तरफ उसी दिन शुरू हुए ट्रेड डील विरोध अभियान को संगठनात्मक आधार देने की कोशिश दिखेगी।