मध्यप्रदेश में 1 अप्रैल से बिजली बिल बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मासिक स्थायी शुल्क में बढ़ोतरी की दिशा में तैयारी चल रही है। अगर प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं तो उपभोक्ताओं के कुल बिल में सीधा असर दिखेगा।
बिजली दरों में हर साल होने वाली समीक्षा के तहत यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है। इसी क्रम में स्थायी शुल्क, ऊर्जा प्रभार और अन्य मदों की समीक्षा की जाती है। इस बार फोकस मासिक चार्ज पर अधिक बताया जा रहा है, इसलिए छोटे उपभोग वाले उपभोक्ताओं पर भी असर की संभावना बनी है।
रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि नई दरें लागू होने पर हर महीने देय राशि बढ़ेगी। यह बढ़ोतरी खपत से अलग लगने वाले शुल्क के कारण भी दिखाई दे सकती है। यानी जिन उपभोक्ताओं की खपत सीमित है, उनके बिल में भी अतिरिक्त राशि जुड़ सकती है।
1 अप्रैल से लागू होने वाली दरों पर नजर
नया टैरिफ आमतौर पर वित्तीय वर्ष की शुरुआत से प्रभावी किया जाता है। यही वजह है कि उपभोक्ता और उद्योग दोनों 1 अप्रैल से लागू होने वाले आदेश का इंतजार करते हैं। दरों में बदलाव की स्थिति में इसका असर शहर और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा।
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, टैरिफ संरचना में बदलाव केवल यूनिट रेट तक सीमित नहीं रहता। स्थायी शुल्क में संशोधन होने पर बिलिंग पैटर्न बदलता है और मासिक भुगतान पर दबाव बढ़ता है। इसलिए उपभोक्ताओं के लिए अंतिम आदेश देखना जरूरी है।
किन उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है असर
घरेलू कनेक्शन, छोटे व्यवसाय, वाणिज्यिक प्रतिष्ठान और अन्य श्रेणियां टैरिफ संशोधन से प्रभावित होती हैं। मासिक स्थायी शुल्क में बदलाव होने पर अलग-अलग लोड श्रेणियों के अनुसार देय राशि बदलती है। इससे कुल बिल में वृद्धि की मात्रा उपभोक्ता वर्ग के हिसाब से अलग हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिल में दो हिस्से प्रमुख होते हैं। पहला, वास्तविक खपत पर आधारित ऊर्जा प्रभार। दूसरा, स्थायी या फिक्स्ड चार्ज, जो कनेक्शन और लोड के आधार पर लगता है। जब दूसरा हिस्सा बढ़ता है तो कम खपत वाले उपभोक्ता भी राहत महसूस नहीं कर पाते।
अंतिम आदेश के बाद साफ होगी नई बिलिंग
फिलहाल उपभोक्ताओं के लिए सबसे अहम बात यह है कि अंतिम नियामकीय आदेश में कौन-सी दरें अधिसूचित होती हैं। लागू होने की तिथि, श्रेणीवार चार्ज और प्रभावी बिलिंग अवधि स्पष्ट होने के बाद ही वास्तविक बढ़ोतरी का आकलन किया जा सकेगा।
उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि अगले कुछ बिलों पर खास नजर रखें। यदि मासिक स्थायी शुल्क में संशोधन लागू होता है, तो पहली ही बिलिंग साइकिल में परिवर्तन दिखना शुरू हो जाएगा।











