मध्य प्रदेश में हालिया बारिश के बाद 25 जिलों में फसलों को नुकसान की जानकारी सामने आने पर राज्य सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी जिला कलेक्टरों से कहा है कि प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल सर्वे कराया जाए और नुकसान का वास्तविक आकलन तैयार कर राहत प्रक्रिया शुरू की जाए।
सरकारी स्तर पर फोकस इस बात पर रखा गया है कि नुकसान का आकलन देरी से न हो और प्रभावित किसानों तक मुआवजा तय प्रावधानों के तहत समय पर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जिलों से आने वाली रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टरों को तेजी से मैदानी सर्वे का निर्देश
राज्य सरकार ने कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि राजस्व और संबंधित विभागों की टीमें प्रभावित गांवों और खेतों का निरीक्षण करें। सर्वे के दौरान फसलवार नुकसान दर्ज किया जाए, ताकि मुआवजा प्रक्रिया तथ्यात्मक आधार पर आगे बढ़ सके। प्रशासन को यह भी कहा गया है कि रिपोर्ट संकलन में स्थानीय स्तर की जानकारी शामिल की जाए और प्रभावित किसानों की सूची स्पष्ट रूप से तैयार की जाए।
कई जिलों में बारिश के असर से खड़ी फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव की सूचना मिलने के बाद यह निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार चाहती है कि नुकसान का डेटा ब्लॉक और जिला स्तर पर व्यवस्थित रूप से संकलित हो, ताकि राहत वितरण में अस्पष्टता न रहे।
मुआवजा प्रक्रिया पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री के निर्देश का प्रमुख बिंदु प्रभावित किसानों को मुआवजा उपलब्ध कराना है। इसके लिए जिलों से मांगी गई रिपोर्ट में खेत, फसल और नुकसान के दायरे की पुष्टि जरूरी मानी गई है। राज्य स्तर पर संकेत दिए गए हैं कि सर्वे रिपोर्ट प्राप्त होते ही पात्र किसानों को नियमों के अनुसार राहत दी जाएगी।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जिला अधिकारियों को कहा गया है कि वे सर्वे के दौरान पारदर्शिता बनाए रखें और नुकसान की श्रेणियों का पृथक रिकॉर्ड रखें। इससे भुगतान संबंधी निर्णयों में तेजी आएगी और विवाद की संभावना कम होगी।
25 जिलों में असर, स्थानीय प्रशासन अलर्ट
बारिश से प्रभावित 25 जिलों की स्थिति पर राज्य सरकार लगातार निगरानी रख रही है। जिला प्रशासन को स्थानीय स्तर पर फील्ड इनपुट लेने, रिपोर्ट अपडेट करने और राहत प्रस्ताव समय पर भेजने के निर्देश दिए गए हैं। उद्देश्य यह है कि कृषि नुकसान का आकलन कागजी प्रक्रिया में अटके नहीं और प्रभावित परिवारों को जल्द राहत मिल सके।
सरकार की ओर से जारी निर्देशों के बाद जिलों में सर्वे का काम प्राथमिकता के साथ शुरू किया जा रहा है। कृषि नुकसान की पुष्टि, डेटा सत्यापन और पात्रता तय करने की प्रक्रिया समानांतर रूप से आगे बढ़ाई जा रही है।
किसानों के लिए आगे क्या
राज्य स्तर के निर्देशों के बाद किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चरण सर्वे और सत्यापन का है। प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मुआवजा वितरण की औपचारिक कार्रवाई शुरू होगी। सरकार ने जिलों को संदेश दिया है कि प्रभावित किसानों के मामलों में अनावश्यक देरी न हो।
फिलहाल सरकार का पूरा जोर दो बिंदुओं पर है—पहला, नुकसान का सटीक आकलन; दूसरा, पात्र किसानों तक राहत राशि पहुंचाना। 25 जिलों में फसल नुकसान की स्थिति को देखते हुए आने वाले दिनों में जिला रिपोर्टों के आधार पर आगे के फैसले लिए जाएंगे।











