मध्यप्रदेश में अभी पिक्चर बाकि है …12 भाजपा विधायक हैं कांग्रेस के संपर्क में

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भोपाल : निप्र। मध्यप्रदेश में अभी और सियासी उठापटक होना है। बारह भाजपा विधायक कांग्रेस के संपर्क में बताए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि कई ऐसे हैं, जो भाजपा में रह कर घुट रहे हैं। अब उन्हें नया रास्ता नजर आ रहा है। इनमें से छह के नाम सामने आए हैं।सिवनी के दिनेश राय मुनमुन, छतरपुर के राजेश प्रजापति, संजय पाठक, सीहोर के सुदेश राय, कटनी के संदीप जायसवाल और शमशाबाद की राज्यश्री कांग्रेस से बात कर रहे हैं। इन नामों में से ज्यादातर कभी न कभी कांग्रेस समर्थक ही रहे हैं। दिनेश राय मुनमुन निर्दलीय चुनाव लड़े थे, फिर भाजपा में चले गए। राजेश प्रजापति, सपा नेता रहे रामदयाल प्रजापति के बेटे हैं। संजय पाठक और सुदेश राय, दिग्विजय सिंह के करीबी हैं। संजय के पिता सत्येंद्र पाठक, दिग्विजय सरकार में मंत्री रहे। कटनी के संदीप जायसवाल का जुड़ाव कमलनाथ से रहा है। ये सभी नेता जल्द ही कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं। सीएम के मीडिया सलाहकार नरेंद्र सलूजा ने कहा है कि अभी भाजपा ने सिर्फ ट्रेलर देखा है, फिल्म तो बाकी है।

कांग्रेस की इस बात से नाराज है अजय सिंह
भोपाल। कांग्रेस का साथ देने वाले भाजपा के विधायकों को कांग्रेस में लेने की खबरों पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने नाराजगी जताई है।अजय सिंह ने कहा है कि नारायण त्रिपाठी और शरद कौल जब कांग्रेस के साथ थे, तो पार्टी छोड़ कर क्यों गए। अब भाजपा, सरकार में नहीं है, तो वे सत्ता के लालच में कांग्रेस का हाथ पकड़ रहे हैं। यह कांग्रेस सिद्धांतों के खिलाफ है। जन्मजात कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच इससे गलत संदेश जा रहा है। लोग तो अब असल कांग्रेसियों को भी शक की नजर से देखने लगे हैं। हम पर फूल-छाप कांग्रेसियों का ठप्पा लगने लगा है।विंध्य की राजनीति में अजय सिंह की नारायण त्रिपाठी के साथ कभी पटरी नहीं बैठी। वहां की राजनीति ब्राह्मण-ठाकुर के इर्द-गिर्द ही रहती है। त्रिपाठी जब भाजपा में गए थे, तब भी उनकी विंध्य के बड़े नेता और पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ल से नहीं बनी थी। उस इलाके में त्रिपाठी के कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने पांच चुनाव यहां से जीते, हर बार अलग-अलग पार्टी से।

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