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लक्ष्मी जी की पूजा के लिए क्या मुहूर्त, देखा जाना अनिवार्य है: ज्योतिषी शशिकांत गुप्ते

Posted on: 04 Nov 2018 21:44 by mangleshwar singh
लक्ष्मी जी की पूजा के लिए क्या मुहूर्त, देखा जाना अनिवार्य है: ज्योतिषी शशिकांत गुप्ते

प्रसिद्ध ज्योतिषी शशिकांत गुप्ते के बेबाक विचार

दीपावली की पूजा कब करना है?यह प्रश्न पूछा जाता है।समाचार पत्रों में समय भी दिया जाता है।हर एक त्योहार के समय यह प्रश्न उपस्थित होता है।आश्चर्य तो गणेश चतुर्थी के दिन होता है।जब आराध्य देव गणेश भगवान की स्थापना के लिए मुहूर्त देखा जाता है।जिस भगवान की सर्वप्रथम पूजा होती है,उसकी स्थापना के लिए मुहूर्त देखा जाना कितनी हास्यास्पद बात है।

ईश्वर से मानव बडा कैसे हो सकता है।मानव तय करेगा कि भगवान की स्थापना और पूजा के लिए शुभ मुहूर्त देखाजाये।देश-काल-और स्थिति के नियमानुसार तो मुहूर्त के ओचित्य पर ही प्रश्न है।कलयुग में ज्योतिष की शुरुवात मुहूर्त जोतिषी से ही हुई है।तात्कालिक ऋषि मुनि जनकल्याण के लिए जो यज्ञ करते थे।वह ज्यादा कारगर सिध्द हो इसलिए मुहूर्त देखजाता था।

ऋषि मुनि उस घटी, पल,और विपल (आज के हिसाब से घंटा, मिनिट,और सेकंड )पर ही यज्ञ आराम्भ करते थे।उस समय अग्नि भी मंत्रो से ही प्रज्वलित करते थे।जो यज्ञ होता था वह जनकल्याण के लिए निःस्वार्थ होता था।अब देश-काल-और स्थिति में जो परिवर्तन हुआ है, उसके अनुसार मुहूर्त के औचित्य पर ही प्रश्न है,कारण इस आपाधापी के समय में किसी के लिए भी मुहूर्त के समय पर कार्य सम्पन्न करना सम्भव नही हैं।

उदाहरण के लिए इनदिनों विवाह के लिए जो मुहूर्त देखे जाते है।वह सिर्फ ओपचारिकता होती है और सुविधानुसार मुहूर्त देखे जाते है।मसलन 24 अप्रैल को जो मैरिज हॉल या गार्डन उपलब्ध होता है दोनों पक्षों के मेहमानों को सुविधा होती है।जो विदेश से आने वाले मेहमान अपनी स्वीकृति देते है कि उनको भी 24 अप्रैल को आना सम्भव है।

मुहूर्त निकालने वाले पंडित को कहा जाता है कि 24 अप्रैल के मुहूर्त निकाल दो।पंडित भी दक्षिणा ले लेकर उसी दिन का मुहूर्त निकाल देता है।जो मुहूर्त निकालने की पध्दती है उसके अनुसार वर वधु की जन्म पत्रिका के ग्रहों की गणना करके जिस दिन दोनों के लिए लाभप्रद दिन है उस दिन विवाह होना चाहिए जो वर्तमान में असम्भव है।

इसी प्रकार किसी भी त्यौहार के दिन किसी भी भगवान की पूजा करनी होतो मुहूर्त देखने की आवश्यकता नही है। यदि हम श्रद्धा से उन्हें भाववान मानते हैं,जो हर कण और क्षण में विद्यमान है,तब मुहूर्त क्यों। लक्ष्मी जी का आशीर्वाद सदा बना रहे इसलिए श्रद्धा से दिपावली के दिन उनकी पूजा कभीभी की जा सकती है ।

 

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