तिरुपति बालाजी का नोटों से किया गया अद्भुत श्रृंगार, मंदिर के ये रहस्य कर देंगे हैरान

मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर की काले रंग की दिव्य मूर्ति स्थापित है. जिसके बारे में कहा जाता है कि यह मूर्ति किसी ने बनाई नहीं है, बल्कि यह खुद प्रकट हुई है. कहा यह भी जाता है कि इस मूर्ति से समुद्र की लहरों की आवाज आती है.

Tirupati Balaji: तिरुपति बालाजी मंदिर की गिनती भारत के सबसे अमीर मंदिरों में की जाती है. यह एक ऐसा मंदिर है जहां साल भर दर्शन करने वालों की भीड़ लगी रहती है. यहां जो बालाजी (Balaji) या भगवान वेंकटेश की मूर्ति स्थापित है उन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. इस मंदिर को श्री वेंकटेश स्वामी मंदिर भी कहा जाता है. इस मंदिर में भगवान विष्णु अपनी पत्नी माता लक्ष्मी के साथ विराजित है. यह मंदिर तिरुमाला की पहाड़ियों पर स्थित है. कहा जाता है कि यह भगवान विष्णु के 8 स्वयंभू मंदिरों में से एक है.

हाल ही में मंदिर का एक वीडियो सामने आया है जिसमें बालाजी का श्रृंगार फूलों की जगह नोटों से किया गया है. नोटों से अनोखी कारीगरी कर पूरे मंदिर को सजाया गया है जो देखने में बहुत ही खूबसूरत लग रहा है.

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यह है मंदिर की विशेषता

भारतीय शिल्प कला और वास्तुकला को यह मंदिर अपने में समाए हुए हैं. द्रविड़ शैली में बनाए गए इस मंदिर का मुख्य भाग बहुत ही खूबसूरत है. इस भाग को अनंदा निलियम कहा जाता है, जहां भगवान वेंकटेश की 7 फुट ऊंची प्रतिमा विराजित है. गर्भ ग्रह का गोपुरम सोने की प्लेट का बना हुआ है. तीनों परकोटे पर भी सोने के कलश लगाए गए हैं. इस मंदिर के मुख्य गेट को पड़ी कवाली महाद्वार कहा जाता है. मंदिर के चारों ओर परिक्रमा करने के लिए एक रास्ता भी है. इसी के साथ मंदिर में सपांगी मंडपम, सलुवा नरसिम्हा मंडपम, प्रतिमा मंडपम, ध्वज स्तंभ मंडपम, तिरुमाला राया मंडपम, आइना महल सहित कई सुंदर चीजें बनी हुई है.

स्वयंभू है मूर्ति

मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर की काले रंग की दिव्य मूर्ति स्थापित है. जिसके बारे में कहा जाता है कि यह मूर्ति किसी ने बनाई नहीं है, बल्कि यह खुद प्रकट हुई है. कहा यह भी जाता है कि इस मूर्ति से समुद्र की लहरों की आवाज आती है. वही यहां स्थित वेंकटांचल पर्वत को भगवान वेंकटेश का ही रूप माना जाता है, इसलिए लोग इस पर चप्पल-जूते पहन कर नहीं जाते हैं.

बालों का होता है दान

मान्यता है कि यहां पर व्यक्ति अगर अपने मन की सभी बुराई और पाप छोड़ता है तो देवी लक्ष्मी उसे सुख समृद्धि का वर देती है. इसलिए बुराई के स्वरूप में लोग अपने बाल यहां छोड़ जाते हैं. कई लोग मन्नत पूरी होने पर भी यहां बाल का दान करते हैं.