आईटी सहित इन सेक्टर्स में जा सकती है हजारों नौकरियां, मिले संकेत

टाटा स्टील ने हाल ही में एक बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले से कर्मचारियों को भारी नुकसान हो सकता है। दरअसल, टाटा स्टील अपने यूरोप के ऑफिस से 3 से 4 हजार कर्मचारियों की चटनी करने की तैयारी में लगा हुआ है।

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नई दिल्ली : टाटा स्टील ने हाल ही में एक बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले से कर्मचारियों को भारी नुकसान हो सकता है। दरअसल, टाटा स्टील अपने यूरोप के ऑफिस से 3 से 4 हजार कर्मचारियों की चटनी करने की तैयारी में लगा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पता चला है कि कंपनी अतिरिक्त आपूर्ति, कमजोर मांग और उच्च लागत के चलते ये कदम उठाने जा रही है। जानकारी अनुसार टाटा समूह के यूरोपीय मुख्य कार्यकारी हेनरिक एडम ने पहले ही बिना आंकड़े दिए कहा था कि जल्द कंपनी यूरोपीय व्यापार में नौकरी में कटौती कर सकती है।

इसमें बयान देते हुए टाटा ने कहा कि वह अपने यूरोपीय परिचालनों में 3,000 से अधिक कर्मचारियों की संख्या में कटौती करके अपनी परफॉरमेंस में सुधार करना चाहती है। भारतीय कंपनी टाटा स्टील, जिसने अपने यूरोपीय कारोबार को मजबूत करने के लिए जून में एक परिवर्तन कार्यक्रम शुरू किया था, जिसमें कंपनी ने नीदरलैंड और वेल्स में स्टील निर्माण शुरू किया था। इस पर टाटा कंपनी की और से आयोजित कार्यक्रम के द्वारा नरेन्द्रन ने कहा कि अर्थव्यवस्था ठीक है। ये सुधर रही है।

सरकार कदम उठा रही है। साथ ही कहा कि ऑटो सेक्टर में थोड़ी सुस्ती है, लेकिन अन्य क्षेत्रों में हम सुधार देख रहे हैं। आगे नरेन्द्रन ने कहा कि हर साल संवाद कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। इस साल 180 से ज़्यादा आदिवासी समुदायो के नुमाइंदों ने संवाद सम्मेलन में हिस्सा लिया है। उन्होंने कहा कि टाटा स्टील का ये मंच आदिवासी समुदाय को अपनी बात रखने का एक मंच देता है। नरेन्द्रन ने उम्मीद जताई कि ये सम्मेलन आदिवासियों की समस्याओ को हल करने के लिए काम करने में मदद करेगा।

आईटी सेक्टर में भी हो सकती है कर्मचारियों की छुट्टी –
मंदी की मार झेल रहे आईटी सेक्टर भी अपने कर्मचारियों की छटनी कर सकता है। दरअसल, देश की टॉप आईटी कंपनी इन्‍फोसिस के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी मोहनदास पई को आशंका है कि इस सेक्‍टर में 40 हजार लोगों की छंटनी हो सकती है। पाई के अनुसार आईटी सेक्‍टर की कंपनियां कारोबार में सुस्‍ती की वजह से मध्यम स्तर के कर्मचारियों को नौकरी से निकाल सकती हैं।

लेकिन उन्होंने ने अभी इस बात को नकार दिया है। पई ने कहा, पश्चिम में यह सभी सेक्‍टर्स में होता है। भारत में भी जब कोई सेक्‍टर मैच्‍योर होता है तब वहां मध्यम स्तर पर कई कर्मचारी होते हैं जो सैलरी के अनुसार योगदान नहीं दे पाते हैं। उन्होंने कहा कि जब कंपनियां तेजी से ग्रोथ करती हैं तब पदोन्नति होती हैं लेकिन जब इसमें सुस्‍ती आती है, तब मैनेजमेंट को दोबारा अपने पिरामिड पर गौर करना पड़ता है।

इस परिस्थिति में मिडिल और अपर लेवल के जिन कर्मचारियों को जरूरत से ज्यादा सैलरी मिलती है, उन पर गाज गिरती है। आगे कहा, यह चीज हर पांच साल पर होती है। जबतक आप उस अनुसार प्रदर्शन नहीं करते हैं, मोटी तनख्वाह का कोई मतलब नहीं हैं..आपको मूल्य के अनुसार काम करना होगा।

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