जागो OBC आंदोलन के बिना नही मिलेगी भागीदारी

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हाईकोर्ट जबलपुर ने आज 18/11/2021 को शिक्षको की भर्ती पर ओबीसी (OBC) को सिर्फ 14% आरक्षण देने का आदेश किया उक्त याचिका क्रमांक 24919/2021 की सुनवाई के दौरान नवनियुक्त महाधिवक्ता उपस्थित नही हुए और अन्य किसी सरकारी अधिवक्ता ने नही रखा सरकार का मजबूती से पक्ष, इसलिए कोर्ट ने शिक्षकों की भर्ती में 14% से अधिक आरक्षण देने पर लगा दी रोक उक्त याचिका के, समस्त याचिका कर्ता मध्यप्रदेश राज्य से बाहर के निवासी है उक्त तथ्य को भी नही बताया गया सरकारी अधिवक्ताओ ने कोर्ट को।

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महाधिवक्ता महोदय को पूर्व सूचना दिए जाने के वावजूद भी,उक्त याचिका में ओबीसी आरक्षण में सरकार का पक्ष रखने के लिए, जानबूझकर नही हुए उपस्थित ! मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह द्वारा ओबीसी के आरक्षण के प्रति गंभीरता से पक्ष रखने के निर्देशों के वावजूद भी महाधिवक्ता ने ओबीसी वर्ग के आरक्षण पर कोई गंभीरता नही दिखाई । नव नियुक्त महाधिवक्ता का कार्यकाल लागभग एक माह में दिनाँक 15 नवंबर तथा 18 नवंबर 2021 को दो स्टे आदेश हो चुके है उनके पदग्रहण दिनाँक से आज तक ओबीसी के आरक्षण के किसी भी प्रकरण में उपस्थित नही हुए है अर्थात ओबीसी (OBC) के 51% आवादी को हक़ अधिकार मिले शायद ये उन्हें बर्दास्त नही है क्योंकि ये सवर्ण जाति के होने के साथ साथ RSS के प्रांतअध्यक्ष भी रहे है ।

मध्यप्रदेश साशन द्वारा विशेष अधिवक्ता के रूप में रमेश्वर सिंह ठाकुर एवं विनायक प्रसाद शाह को ओबीसी का पक्ष रखने के लिए मुख्य याचिका क्रमांक 5901/ 2019 में ही नियुक्त किया है न कि ओबीसी आरक्षण के समस्त प्रकरणो में ! जिसके कारण उक्त अधुवक्ता किसी भी नई याचिका की सुनवाई में सरकार का पक्ष नही रख पाते तथा सरकारी वकील पक्ष नही रख पाने के कारण स्थगन आदेश पारित कर दिए जाते है । इतिसाहिक तथ्य से अवगत होना आवश्यक है कि, मंडल कमीशन के लागू वर्ष 1990 से 27% लागू हुआ, उक्त आरक्षण को लागू करने पर सुप्रीमकोर्ट ने स्टे कर दिया, तथा 1992 में 9 जजो के फैसले के बाद लागू हो सका लेकिन मध्यप्रदेश सरकार ने केवल 14% ही ओबीसी को लाभ दिया

2019 में ओबीसी को मध्यप्रदेश में 14% से बढ़ाकर 27% किया गया जिसके विरोध में हाईकोर्ट में अनेक याचिकाएं दाखिल हुए उक्त समस्त याचिकाओं में ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अधिवक्ताओ द्वारा मार्च 2019 से लगातार ओबीसी के पक्ष में माननीय उच्च न्यायालय में पैरवी करते चले आ रहे है लेकिन अभी तक सरकारी महकमे तथा सरकार का यथा उचित सहयोग एवम समर्थन नही होने के कारण ओबीसी के उक्त हक एवं अधिकारों की लड़ाई अब बहुत ही चुनोती पूर्ण हो चुकी है । इसलिए अब ओबीसी वर्ग के युवाओं को अपने हक अधिकारों को प्राप्त करने सड़को पर ही आना पड़ेगा । अब इस ओबीसी वर्ग को न तो सरकार से और न ही न्यायालय से किसी भी प्रकार की सकारात्मक उम्मीद करनी चाहिए ।। ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा ओबीसी हित मे जारी ।। बैकवर्ड लॉयर यूनियन:बैकवर्ड वोमेन यूनियन:backward Law Students Union