एमआइसी यानी महापौर परिषद। नगर सरकार का मंत्रिमंडल। दस सदस्यीय इस मंत्रिमंडल के लिए भाजपा में बिसात बिछ चुकी है। विधायको ने मोहरे भी चल दिए है। दल के अंदर ही गुटीय शह-मात का खेल भी शुरू हो गया है। ताश के पत्तों जैसे उम्मीदवार भी फेंट लिए गए है। कुछ उजागर कर दिए गए है,कुछ छुपा लिए गए है कि जब सामने वाला शो बोलेगा तब अपना पत्ता फेंकेंगे। बात तो इस बार साफ सुथरे ओर अनुभवी मंत्रिमंडल की हुई थी।

अब देखना ये है कि नगर सरकार में ये दस मंत्री योग्यता के आधार पर आते है या फिर विधायको की किचन केबिनेट की तर्ज पर। इस मुद्दे पर संगठन की चलती है या सत्ता की? एक दो दिन में साफ हो जाएगा कि नई एमआइसी में विधायको ओर बड़े नेताओं के “कमाऊ पूत” आये है या सन्गठन के सपूत। “नगर सरकार” के नए मंत्रिमंडल यानी एमआइसी की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। निगम विधान के मुताबिक सभापति चयन के आठ दिन के अंदर एमआइसी का गठन आवश्यक है। 8 अगस्त को परिषद का पहला सम्मेलन हुआ था। उस लिहाज से एमआइसी का गठन 15 अगस्त तक होना है।

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लेकिन इस दौरान रक्षा बंधन ओर मोहर्रम की सरकारी छुट्टी ओर 15 अगस्त के अवकाश भी आ गया। इसके चलते एमआइसी का गठन एक दो दिन आगे यानी 17 अगस्त तक आगे बढ़ने की संभावना है। 10 सदस्यीय एमआइसी के लिए 20 पार्षद मैदान में है। अब ये भाजपा संगठन पर निर्भर है कि वो नगर सरकार का मंत्रिमंडल योग्य ओर पात्र पार्षदो के जरिये बनाएगा या फिर वैसे ही विधायकों के ऊपर छोड़ देगा जैसा पार्षदो के टिकट छोड़ दिये थे। अब देखना है कि एमआइसी गठन के सन्गठन की चली या विधायक ही हावी रहे।

विधनासभा 1: पराग-कमल पर पेंच

यहां भाजपा का विधायक नही है। लिहाजा हारे हुए विधायक यहां जीते हुए पार्षदो का भाग्य तय कर रहे है। वैसे तो सुदर्शन गुप्ता आश्वस्त है कि उनके कोटे से निरंजन सिंह चौहान और अश्विनी शुक्ला का नाम तय हो जाएगा। शुक्ला जहा पहले भी एमआइसी में रह चुके है और गुप्ता के लिए “कमाऊ पूत” साबित हुए है। वे फिर से ” संघ कोटे” में दावा कर रहे है। उलझन इसी कोटे ने पैदा कर दी है। अब तक 1 नम्बर विधनासभा में अश्विनी ये कोटा पूरा करते थे। लेकिन अब कमल वाघेला भी आरएसएस से जुड़े है और पार्षद है।

साफ सुथरी छवि ओर आरएसएस की पसन्द होने के कारण वाघेला का दावा भी मजबूत हो रहा है। गुप्ता की मुसीबत यहां ही कम नही हुई। इस इलाके की रहवासी ओर यहां से विधायक रही प्रदेश की मंत्री उषा ठाकुर ने भी अपने खास समर्थक पराग कौशल के लिए खम ठोक दिया है। पराग दूसरी बार पार्षद है और गैर विवादित है। अब गुप्ता के लिए दिक्कत ये है कि अगर उषा ठाकुर और संघ-संगठन का दबाव आया तो उन्हें एक एमआइसी पर ही सन्तोष करना होगा।

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ऐसे में उनके सामने धर्म संकट रहेगा कि वे अपने बाल सखा निंरजन के लिए हा करे या अश्विनी के लिए। सूत्र बताते है कि ऐसी नोबत में गुप्ता का झुकाव अश्विनी शुक्ला की तरफ रहना है। गुप्ता, चोहान में राजनीतिक सम्भावना देखते हुए चौकन्ना है क्योकि निरंजन भी हर बार विधनासभा 1 से दावेदार रहते है। पत्नी सपना 2 बार पार्षद रह चुकी है। कृष्ण मुरारी मोघे की परिषद में एमआइसी सदस्य रहते उनके हिस्से में बड़े काम दर्ज है।

विधनासभा 2: विजयवर्गीय की रजामंदी

यहां एमआइसी में वैसे ही हालात बन गए है जैसे पार्षद टिकट वितरण के वक्त बने थे। विधायक रमेश मेंदोला कुछ नया करने की मंशा पाले हुए है। अगर उनकी चली तो यहां से पहली बार जीते एक युवा पार्षद की लॉटरी लग सकती है। राजेंद्र राठौर का नाम तय माना जा रहा है। नाम तो सुरेश कुरवाड़े का भी लगभग तय है। बस पेंच ये है कि कुरवाड़े का नाम विधनासभा 2 की जगह सांवेर विधनासभा कोटे में दर्ज हो। ताकि मेंदोला अपनी विधानसभा से 2 एमआइसी मेम्बर बनवा सके।

अगर ऐसा हुआ तो दो एमआइसी ओर सभापति विधनासभा 2 से ओर कुरवाड़े सांवेर सीट से इंटर हो जाएंगे। यहां अब सब कुछ पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय पर निर्भर है। अगर वे दूसरी बार पार्षद बनी पूजा पाटीदार का नाम आगे करते है तो ” कुलकर्णी भट्टा” क्षेत्र के हाथ निराशा आएगी। चंदू शिंदे के चुनाव हारने के कारण क्षेत्र 2 में नए नाम की संभावना अरसे बाद बनी है।

विधानसभा 3: मामा-टाकलकर में होड़

इस विधनासभा का दारोमदार भी राष्ट्रीय महासचिव विजयवर्गीय पर है। पुत्र आकाश विजयवर्गीय विधायक है और उन्होंने सब कुछ पिता पर वैसे ही छोड़ दिया है, जैसे पार्षदो के टिकट छोड़े थे। यहां विजयवर्गीय के पुराने समर्थक मनीष शर्मा उर्फ मामा ओर सुरेश टाकलकर जैसे पुराने नेता के बीच कश्मकश बनी हुई है। उम्मीद मामा की बनी हुई है। अगर संगठन यहां से दो एमआइसी की इजाजत देता है तो ही टाकलकर कि लाटरी लग सकती है। अन्यथा इस विधनासभा को एक एमआइसी से ही संतुष्ट होना होगा। कारण क्षेत्र छोटा है और वार्ड भी दस ही है।

विधानसभा 4: कंचन-गेंदर से उलझे समीकरण

भाजपा की अयोध्या कही जाने वाली इस सीट पर मालिनी गौड़ के लिए सब कुछ आसान था। वे एमआइसी भी उसी तरह मर्जी की लेकर आती जैसे पार्षदो के टिकट। नाम भी उनकी से तय थे। कमल लड्डा ओर राकेश जेन। बेक सपोर्ट के लिए हरप्रीतकोर लूथरा का नाम गोड़ केम्प ने रखा हुआ है। लेकिन सांसद शंकर लालवानी की गहरी दिलचस्पी ने समीकरण उलझा दिए है। वे यहां से अपनी खास समर्थक कंचन गिडवानी को एमआइसी में लाना चाह रहे है। गिडवानी का टिकट भी सांसद बड़े विरोध के बाद भी ले आये थे।

नतीज़तन अभी भी ये माना जा रहा है कि वे अपने वीटो पावर का इस्तेमाल कर एक एमआइसी तो लेकर आएंगे ही। मुद्रा शास्त्री चूंकि पहली बार चुनकर आई है। लिहाजा लालवानी शास्त्री के नाम से लॉबिंग नही कर सकते। संध्या यादव अपील समिति में आ ही गई है। बची कंचन गिडवानी। ये तीन टिकट ही तो शंकर लालवानी समूची पार्टी से लड़ झगड़कर लेकर आये थे। मुद्रा को वे झोन अध्यक्ष बनाना चाहते है। उनके तीनो समर्थक इस तरह नई परिषद में एडजस्ट करने के लिए सांसद दिन रात एक किये है। वही गोड़ केम्प भी कमर कसकर तैयार है कि किसी भी सूरत में यहां से दोनो एमआइसी हम ही लेंगे। अयोध्या में मामला दिलचस्प हो गया है।

इसमे ज्योतिरादित्य सिंधिया ओर तुलसी सिलावट कोटे से पार्षद बने योगेश गेंदर ने भी गोड़ केम्प की मुश्किलें बढ़ा रखी है। अगर सिंधिया-सिलावट ने एमआइसी में दखल चाहा तो विधायक गोड़ को फिर एक नाम से ही संतुष्ट होना होगा। गेंदर के टिकट के वक्त भी विधायक मालिनी गौड़ ने सहजता से सिंधिया ओर सिलावट की बात मानी थी ओर गेंदर को भाजपाई गढ़ से टिकट दिया।

विधनासभा 5: बाबा के दो अनमोल रतन, दोनो आ जाये ये जतन

बाबा कहे जाने वाले विधायक महेद हार्डिया के सामने भी दुविधापूर्ण स्थिति है। एमआइसी को लेकर उनके दो मुख्य पार्षद है। प्रणव मंडल ओर राजेश उदावत। लेकिन संघ और नगर इकाई की तरफ से यहां पहली बार जीतकर आये एक युवा पार्षद के लिए भी दबाव बन गया है। अब बाबा के सामने उलझन है कि वो अपने इन दो अनमोल रतन के से किसका करे चयन? बस इसी जतन में आजकल विधायक हार्डिया आधी आधी रात तक गुणा भाग में लगे है कि एमआइसी में किसे ले, किसे छोड़ दे?

राऊ: प्रदेश अध्यक्ष की दिलचस्पी

इस छोटी सी विधनासभा से भाजपा के लिए बड़ी जीत निकलकर बाहर आई थी। पार्षद में बबलू शर्मा 8 हजार से ज्यादा से जीते ओर महापौर पुष्यमित्र 30 हजार के लगभग बढ़त बना गए। नतीज़तन इस सीट का भी एमआइसी में दावा मजबूत हो गया है। ऐसे में बबलू शर्मा का नाम प्रमुख है। प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा स्वयम यहां दिलचस्पी ले रहे है। अगर वे राजी हुए तो शर्मा की नगर सरकार के मंत्रिमंडल में इंट्री तय है।