देश का ऐसा पहला केस, जिसमें भगवान खुद हैं फरियादी

200 साल से चल रहे अयोध्या विवाद का अंतिम फैसला 9 अक्टूबर को सुनाया जाएगा। फैसले से पहले देशभर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

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नई दिल्ली : 200 साल से चल रहे अयोध्या विवाद का अंतिम फैसला 9 अक्टूबर को सुनाया जाएगा। फैसले से पहले देशभर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद पर 9 नवंबर को 10.30 बजे फैसला लिया जाएगा कि आखिर होगा क्या। आपको बता दें कि अयोध्या में विवाद सदियों से चला आ रहा है। लेकिन अब इस विवाद को खत्म करने का समय आ गया है।

दरअसल, कोर्ट को वैसे तो बहुत सारे फैसले लेना होते है लेकिन ये दुनिया का एक ऐसा केस है जहां भगवान खुद कोर्ट के सामने खुद फरियादी हैं। आपको बता दें कि किस वजह से बाबरी मस्जिद संघर्ष समिति का गठन हुआ था। दरअसल, 1989 में वरिष्ठ पत्रकार और वकील उमेश चंद्र पांडेय एक अपील की थी उस पर फैजाबाद के तत्कालीन जिला जज कृष्णमोहन पांडेय ने 1 फरवरी 1986 को विवादित परिसर का ताला खोलने का आदेश पारित कर दिया।

आदेश का बहुत विरोध किया गया मुस्लिम पैरोकारों ने इसे एकतरफा फैसला बताया था। उसके बाद ही इसी की प्रतिक्रिया स्वरूप फरवरी, 1986 में बाबरी मस्जिद संघर्ष समिति का गठन हुआ और मुस्लिम समुदाय ने भी विश्व हिंदू परिषद की तरह आंदोलन और संघर्ष का रास्ता अपनाया।

इसी मुकदमे में पहली बार कहा गया था कि राम जन्म भूमि न्यास इस स्थान पर एक विशाल मंदिर बनाना चाहता है। इस दावे में राम जन्म भूमि न्यास को भी प्रतिवादी बनाया गया था। अशोक सिंघल इस न्यास के मुख्य पदाधिकारी थे। इस तरह पहली बार विश्व हिंदू परिषद भी परोक्ष रूप से पक्षकार बना।

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