इन 5 विटामिन्स से रखें अपनी बढती उम्र का ख्याल, ये है स्त्रोत

बढती उम्र का शरीर पर असर तो होता ही है पर आज कल ख़राब खानपान और अनियमित जीवनशैली की वजह से बहुत जल्दी दिखाई देता है हमारा शरीर कमजोर होता जाता है। ऐसे में पूरी उर्जा के साथ काम करने के लिए कई विटामिन और मिनरल्स की जरूरत होती है।

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बढती उम्र का शरीर पर असर तो होता ही है पर आज कल ख़राब खानपान और अनियमित जीवनशैली की वजह से बहुत जल्दी दिखाई देता है हमारा शरीर कमजोर होता जाता है। ऐसे में पूरी उर्जा के साथ काम करने के लिए कई विटामिन और मिनरल्स की जरूरत होती है। जो ना सिर्फ पोषण देते है बल्कि हमारे शरीर को कई तरह के रोगों से बचाते है। अच्छी सेहत के लिए हमें पौष्टिक आहार खाना चाहिए।

40 की उम्र के बाद चेहरे का तेज जाने लगता और शरीर कई तरह के रोगों का शिकार होने लगता है। इसलिए आपको इन बीमारियों से बचने के लिए विटामिन्स की जरूरत होती है।

1) विटामिन बी12 –
यह ऐसा विटामिन है, जिसका अवशोषण हमारी आंतो में होता है. वहां लैक्टो बैसिलस (फायदेमंद बैक्टीरिया) मौजूद होते हैं, जो बी-12 के अवशोषण में सहायक होते हैं। फिर यह लिवर में जाकर स्टोर होता है। उसके बाद शरीर के जिन हिस्सों को इसकी जरूरत होती है, लिवर इसे वहां भेजने का काम करता जाता है। हमारी लाल रक्त कोशिशओं का निर्माण भी इसी से होता है। यह शरीर के सभी हिस्सों के लिए अलग-अलग तरह के प्रोटीन बनाने का भी काम करता है।विटमिन बी12 हमारी कोशिकाओं में पाए जाने वाले जीन डीएनए को बनाने और उनकी मरम्मत में सहायता करता है। यह ब्रेन, स्पाइनल कॉर्ड और न‌र्व्स के कुछ तत्वों की रचना में भी सहायक होता है।

स्त्रोत– विटामिन B कॉम्लेक्स मांसाहारी पदार्थों में भरपूर मात्रा में होता है शाकाहारी यों को डेअरी प्रोडक्ट्स का ज्यादा मात्र में सेवन करना चाहिए इसके अलावा जमीन के भीतर उगने वाली सब्जियों जैसे आलू, गाजर, मूली, शलजम, चुकंदर आदि में भी विटामिन बी आंशिक रूप से पाया जाता है।

2) कैल्शियम –
यह मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत बनाता है। कैल्शियम स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। महिलाओ के लिए 50 साल की उम्र तक नियमित रूप से 1000 मिग्रा कैल्शियम की आवश्यंकता होती है, और बाद में बढ़ाके 1200 कर देना चाहिए .पुरुषों में 70 साल तक 1000 मिग्रा नियमित और 70 साल के बाद 1200 मिग्रा नियमित रूप से कैल्शियम की जरूरत होती है।

स्त्रोत –आपको आपके आहार में से भरपूर कैल्शियम मिल सकता है. वसायुक्त आहार और डेअरी उत्पादों में बहुत मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है .तथा साबुत अनाज , अंडा, सोयामिल्क, ताज़ी और पत्तेदार सब्जियां, आदि कैल्शियम के स्त्रोत है .

3) विटामिन डी –
विटामिन डी शरीर के अंगो के लिए बहुत जरूरी पोषक तत्व और हड्डियों को भी मजबूत बनाता है यह वसा में घुलनशील प्रो-हार्मोन्स का एक समूह होता है जो आंतों से कैल्शियम को सोखकर हड्डियों में पहुंचाता है।शरीर में रसायन कोलिकल कैसिरॉल पाया जाता है, जो खाने के साथ मिलकर विटामिन-डी बनाता है। शरीर में इसका निर्माण हाइड्रॉक्सी कोलेस्ट्रॉल और अल्ट्रावॉयलेट किरणों की मदद से होता है।

स्त्रोत –विटामिन डी सूर्य की किरणों से सबसे अधिक मिलता है। अगर आप 15 मिनिट तक सुबह की सूर्य की रोशनी में रहे तो आपकी आवश्यकता जितना विटामिन D आपको मिल सकता है . मांस, अंडे, मछली का तेल, दुग्ध उत्पादों में भी विटामिन डी पाया जाता है।

4) मैग्नीशियम –
मैग्नीशियम की कमी से आपको धमनी संबंधी रोग, डायबटीज, अर्थाराईटिस जैसी समस्या हो सकती है।इसकी कमी से शरीर की विभिन्न प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है। भोजन में मैग्नीशियम की पर्याप्त मात्रा आपको डायबिटिज के खतरे से बचाती है। हमारे शरीर में होनेवाले एंजाइम प्रतिक्रिया के लिए मैग्नीशियम जिम्मेदार है।

स्त्रोत – दही, दूध, चॉकलेट, साबुत अनाज, अखरोट, मूंगफली, हरी पत्तेदार सब्जियां, बादाम, काजू, सोयाबीन, केले, खुबानी, कद्दू, और तुलसी में पाया जाता है

5) ओमेगा-3 –
ओमेगा-3 फैटी एसिड का सेवन हार्ट अटैक के जोखिम को भी कम करता है। जिससे उनमें रक्त प्रवाह ठीक ढंग से हो पाता है और एन्जाइम्स फैट को आसानी से शरीर में घुलने में सहायता करते हैं और उनका मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है। ओमेगा -3 फैट्स, हैं जो शरीर के हार्मोन्स में बदलाव कर भूख कम कम होते हैं और डाइटिंग करने में भी मददगार होते हैं।

स्त्रोत– अलसी के बीज, अखरोट, ब्लूबेरी, राई का तेल, सोयाबीन, सालमन मछली और सीफूड जैसे, प्रॉन, झींगा, सीप आदि में काफी मात्रा में ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है।