आसाराम की मुफ़लिसी से अरबपति बनने की कहानी

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नई दिल्ली : आसुमल हरपलानी से आध्यात्मिक गुरु बने आसाराम की चाय वाले से अरबपति बनने की कहानी बड़ी ही रोचक है। आइये हम आपको बताते हैं अरबपति बनने के लिए क्या कुछ नहीं किया…

आसाराम के अरबपति बनने की कहानी बड़ी दिलचस्प है। आसाराम ने एक जमाने में चाय बेची, उससे काम नहीं चला तो अवैध शराब का धंधा भी किया। फिर हत्या के एक मामले में जेल जाना पड़ा। जेल से छूटा तो अजमेर आकर तांगा चलाना शुरू कर दिया। आध्यात्मिक गुरु लीलाशाह की शरण में जाने के बाद उसकी किस्मत पलटी और वह आसाराम के नाम से मशहूर हो गया। उसने देशभर में 400 आश्रम खोले और करोड़ों लोग उसके अनुयायी बन गए। वर्तमान में उसके पास देश-विदेश में 10 हजार करोड़ से ज्यादा की संपत्ति का मालिक है। Related image– आसाराम का जन्म 1941 में पाकिस्तान के नवाबशाह जिले के बरानी गांव में हुआ। पिता थिउमल और मां मेहंगी ने उसका नाम आसुमल रखा। बंटवारे के दौरान उनका मकान उजड़ गया और परिवार अहमदाबाद के पास मणिनगर आकर बस गया। यहां आने के कुछ समय बाद ही पिता की मौत हो गई। परिवार की जिम्मेदारी आसुमल पर आ गई। कुछ दिन बाद आसुमल मणिनगर से वीजापुर में बस गया। आसुमल ने यहां चाय की दुकान शुरू की। चाय बेचने से काम नहीं चला तो उसने अवैध शराब का धंधा शुरू कर दिया। आसाराम पर शराब के नशे में एक युवक की हत्या का आरोप लगा। थोड़े समय जेल भी रहना पड़ा, लेकिन बाद में वह बरी हो गया।Image result for asaram bapu

-साठ के दशक में आसाराम अजमेर से अहमदाबाद चला गया। यहां उसने फिर से शराब का कारोबार शुरू कर दिया। उसने कई लोगों से पैसा उधार लिया। जब कर्ज नहीं चुका पाया तो अजमेर लौट आया। यहां उसने तांगा चला कर कुछ दिन जीवनयापन किया। यहीं उसकी शादी लक्ष्मी देवी के साथ हुई। पुत्र नारायण और पुत्री भारती के जन्म के बाद आसुमल यहां से गायब हो गया। Related image– आसाराम आध्यात्मिक गुरु लीलाशाह के संपर्क में आने के बाद उनके नैनीताल आश्रम पहुंच गया। उनको अपना गुरु बना लिया, उन्होंने उसका नाम आसाराम रख दिया। यहीं से उसके जीवन में बदलाव आया। आध्यात्मिक गुरु का चोला औढ़ कर उसने प्रवचन देना शुरू कर दिया। लोगों को गुरु दीक्षा भी देने लगा। भक्तों पर उसका जादू चल गया और उसका वैभव बढऩा शुरू हो गया। अहमदाबाद के पास मोटेरा में उसने पहला आश्रम बनाया। सबसे पहले उसने पिछड़े और ग्रामीण लोगों पर ध्यान केंद्रित किया।Related image– प्रवचन के साथ-साथ उसने देसी दवा बेचना शुरू किया। तेल, साबुन, दवा, अगरबत्ती, किताबें भक्तों को बेचने लगा, जिससे अच्छी खासी कमाई होने लगी। अल्प समय में आसाराम ने कई जगह सरकारी तो कई जगह भक्तों की जमीन हड़प कर चार सौ आश्रम खड़े कर लिए। इन आश्रमों की जमीन ही अरबों रुपए की है।
400 ट्रस्टों के माध्यम से करता था काला-धोला… Image result for asaram bapu– आसाराम के आश्रम की ज्यादातर जमीन भक्तों को बहला-फुसलाकर या अतिक्रमण कर हासिल की गई है। उसके पास 400 ट्रस्ट हैं, जिसके माध्यम से वह बेनामी लेनदेन और पूरे साम्राज्य पर नियंत्रण रखता था। Related image– आश्रमों में बेची जाने वाली पत्रिकाओं, प्रार्थना पुस्तकों, सीडी, साबुन, धूपबत्ती और तेल जैसे उत्पादों की बिक्री और चंदे एवं आश्रम की हड़पी हुई जमीन पर खेती से भी आश्रम के खजाने में मोटी रकम आई। Related image– धन बटोरने का सबसे बड़ा जरिया अनुयायियों को प्रवचन देना था। दो या तीन दिनों के प्रवचन में एक करोड़ रुपए की बिक्री हो जाती थी।Image result for asaram bapu

-गुरुपूर्णिमा भंडारे किए जाते थे, जिसके नाम पर करोड़ों रुपए चंदा लिया जाता था, जबकि खर्च नाममात्र किया जाता था। बताया जाता है कि 11 हजार योग वेदांत सेवा समितियों के जरिए चंदा इकट्ठा होता था। बेनामी जमीन-जायदाद के सौदों के तहत उसका दो हजार करोड़ से ज्यादा रुपया ब्याज पर चल रहा है। उसने देशभर में कई बड़े उद्योगपतियों को ब्याज पर रुपया दे रखा है। आसाराम ने अमेरिकी कंपनियों में डेढ़ अरब रुपए से ज्यादा का निवेश भी किया है।

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