पढाई में रहेंगे हमेशा आगे, बस करना होगें ये मामूली उपाय

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vastu shatra

हर माता-पिता का यह सपना होता है कि उनका बच्चा पढ़ाई में अव्वल रहे। माता-पिता अपने बच्चों की अच्छी पढ़ाई के लिए हर संभव प्रयास करते है ताकि वह अपनी सफलताओं से ना चुके। कई बार ऐसा देखा जाता है कि हजारों कोशिशों के बाद भी आपके बच्चों को सफलता नहीं मिल पाती। कई बार अच्छे अंक नहीं आने से बच्चें निराश हो जाते है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस असफलता का कारण क्या है ? इसका कारण अक्सर हमारे घर में मौजूद वास्तु दोष होता है। आज हम आपको कुछ ऐसेे ही उपाय बताएंगे जिससे इन दोषों से छुटकारा पा सकते है।

बच्चों के पढ़ाई का कमरा पूर्व या उत्तर दिशा या फिर ईशान कोण में होना चाहिए। इससे सूर्य, बुध एवं गुरू ग्रह की कृपा प्राप्त होती है। जो कि आपके बच्चों को पढाई में सफलता दिलाने में मदद करते है।

सूर्य में अत्यधिक ऊर्जा हेाती है, जिसमें सुबह के समय सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह ज्यादा होता है। यदि सुबह सूर्य की किरणें बच्चों के स्टडी रूम में आती हों तो खिड़की दरवाजे सुबह खोलकर रखें, ताकि सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा का लाभ मिल सके।

यदि बच्चों को जल्दी कुछ याद नहीं होता है तो कम समय में ज्यादा चीजें याद करने के लिए बच्चों को पूर्व दिशा में मुंह करके पढ़ना चाहिए।

कंप्यूटर और आदि ऐसी चीजें जो पढ़ाई में बच्चों को मदद करती है उन्हें आग्नेय से दक्षिण व पश्चिम के बीच कहीं भी रख सकते है। ईशान कोण में रखे कंप्यूटर शैक्षिक सफलता के लिए उपयोगी नहीं साबित होते है।

बच्चों को हमेशा दक्षिण या पश्चिम की ओर सिर करके सोना चाहिए। दक्षिण में सिर करके सोने से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है और पश्चिम में सिर करके सोने से पढ़ने में ध्यान दिन-प्रतिदिन बढ़ता है।

कुछ बच्चें होते है जिन्हें पढ़ाई के दौरान आलस्य आता है और बार बार पढ़ाई से मन भटकता रहता है। इसके लिए यदि बच्चों के कमरें में हरे रंग का प्रयोग किया जाये तो यह लाभदायक सिद्ध होगा। सफेद रंग शांति का प्रतिक होता है जिससे कई बार सुस्ती भरा माहौल बन सकता है।

बच्चों को पढ़ाई में सफलता पाने के लिए किसी बीम या दुछती के नीचे बैठकर पढ़ना या सोना नहीं चाहिए। इससे मानसिक तनाव उत्पन्न होता है और पढ़ाई में मन नहीं लगता है।

बच्चों को अपने कमरें में मां सरस्वती का फोटों जरुर लगाना चाहिए। पढ़ाई करने से पहले हाथ जोड़कर बुद्धि एवं बल के लिए मां सरस्वती से प्रार्थना करें। साथ ही प्रातः काल ‘ॐ ऐं हीं सरस्वत्यै नमः’ मंत्र का जाप करें।

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