‘26/11 RSS की साज़िश’ के विमोचन से लेकर अब तक, कितने विवादों में रहें दिग्गी राजा? जानिये सब कुछ

दिग्विजय सिंह(Digvijay Singh), आज भारतीय राजनीति का एक जाना पहचाना नाम हैं। ये आये दिन किसी न किसी विवाद के चलते सुर्ख़ियों में रहते हैं।

Digvijay Singh
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दिग्विजय सिंह(Digvijay Singh), आज भारतीय राजनीति का एक जाना पहचाना नाम हैं। ये आये दिन किसी न किसी विवाद के चलते सुर्ख़ियों में रहते हैं। 1993 से 2003 तक मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रहें दिग्विजय सिंह आज यानी 28 फरवरी को अपना जन्मदिन मनाते हैं।

इनका जन्म देश की आजादी से कुछ ही महीने पहले 28 फरवरी, 1947 को मध्यप्रदेश के इंदौर में हुआ था। आज यानी 28 फरवरी 2022 को ये अपना 75 वां जनदिन मना रहें हैं। आज इनके जन्म दिन के अवसर पर हम आपको इनसे जुड़े हुए कुछ ऐसे विवादों के बारे में बता रहें हैं जिनसे दिग्विजय सिंह की जिंदगी काफी प्रभावित रहीं।

अजीज़ बर्नी की किताब ‘26/11 RSS की साज़िश’ के विमोचन समारोह में शामिल होना
Digvijay Singh
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26 नवम्बर 2008 को मुंबई सहित पुरे देश को दहला देने वाले सीरियल बम धमाकों को आखिर कौन भूल सकता हैं! इस हमले को आज 26/11 हमले के नाम से जाना जाता हैं। इसे पाकिस्तान के आतंकवादी संघठन लश्कर-ए-तैयबा ने अंजाम दिया था। और बाद में आतंकवादी अजमल कसाब को इस मामले में फांसी भी दी गई थी।

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लेकिन इससे पहले कांग्रेस के एक करीबी पत्रकार जिसका नाम अजीज़ बर्नी हैं, ने एक किताब लिखी थी जिसका नाम ‘26/11 RSS की साज़िश’ था। हालांकि उस वक्त भी ये पूरी तरह से साफ़ दिखाई दे रहा था कि 26/11 का हमला पाकिस्तान की ही करतूत हैं, बावजूद इसके देश की सबसे बड़ी पार्टी के एक नेता यानी दिग्विजय सिंह इस किताब के विमोचन समारोह में शामिल होने गए। और वो भी एक बार नहीं बल्कि 2- 2 बार। जिसके बाद देशभर में उनकी घोर आलोचना हुई।

बटला हाउस एनकाउंटर(Batla House Encounter ) और दिग्विजय सिंह

मुंबई हमलों से भी पहले 13 सितंबर 2008 को राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में सीरियल बम धमाके हुए थे। जिनमे 26 लोग अपनी जान गंवा चुके थे। और 133 घायल हुए थे। इस हमले का जिम्मेदार पकिस्तान का आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन था। जिसके आतंकी दिल्ली के अलग अलग इलाकों में छुपे थे। तभी पुलिस को सुचना मिली कि जामिया नगर के बटला हाउस में आतंकवादी छुपे हैं। इसके आधार पर पुलिस ने 19 सितंबर 2008 को ऑपरेशन बटला हाउस चलाया। ईसमें दिल्ली पुलिस और आतंवादियों के बीच मुठभेड़(Batla House Encounter ) हुई। जिसमें ऑपेरशन इंचार्ज मोहन चंद्र शर्मा बुरी तरह घायल हो गए और इलाज के दौरान उनकी मौत भी हो गई।

लेकिन कांग्रेस के तमाम नेताओं सहित दिग्विजय सिंह भी इस मुठभेड़ को फर्जी बताते आये थे और आलोचनाओं का सामना करते थे लेकिन जब बाटला हाउस एनकाउंटर को कोर्ट ने भी सही मानते हुए इसमें शामिल एक आतंकी आरिज खान को सजा सुनाई तो दिग्विजय सिंह समेत पूरी कांग्रेस पार्टी और अन्य जो इस एनकाउंटर को फर्जी मान रहे थे ने मौन धारण करना ही उचित समझा।

लेकिन कोर्ट द्वारा ये फैसला सुनाये जाने के बाद जब एक रिपोर्टर ने दिग्विजय सिंह से सवाल पूछा तो वे भड़क गए। बाद में उन्होंने कहा कि कोर्ट का फैसला आ जाने के बाद, मेरे कुछ भी बोलने का कोई मतलब नहीं रह जाता।

सरस्वती शिशु मंदिर को दिग्विजय ने बताया था नफरत की फ़ैक्ट्री

दिग्विजय सिंह को सरस्वती शिशु मंदिर(saraswati shishu mandir controversy) के बारे में दिए गए अपने एक बयान को लेकर काफी आलोचनाएं झेलनी पड़ी थी। उन्होंने मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा था कि आरएसएस द्वारा संचालित या वित्तपोषित सरस्वती शिशु मंदिर बच्चों के दिल और दिमाग में दूसरे धर्म के प्रति नफरत का बीज(seeds of hatred in shishu mandir) बोने का काम करते आये हैं। जो आगे चलकर इन बच्चो में धार्मिक उन्माद और धार्मिक कठ्ठरता को पैदा करता हैं। जिससे सांप्रदायिक सद्भाव का माहौल बिगड़ जाता हैं और देश में दंगे भड़कने का कारण भी बनता हैं।

इस बयान के बाद दिग्गी राजा काफी मुसीबत में फंस गए थे। राजनितिक दलों के नेताओं के अलावा भी कई छात्र उनके इस बयान से काफी नाराज थे। और कई जगह शिकायत भी की गई थी।