इंदिरा गांधी के बाद दूसरी महिला वित्त मंत्री पेश करेगी देश का बजट

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मोदी सरकार का 2019 का बजट इस बार महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करने जा रही हैं वे देश की दूसरी वित्तमंत्री मंत्री हैं जो महिला होकर बजट पेश करेंगे इससे पहले 1970 में प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने बजट पेश किया था लेकिन उस समय उनके पास वित्त मंत्री का अतिरिक्त प्रभार था लेकिन निर्मला सीतारमण पहली ऐसी महिला वित्त मंत्री हैं जिनके पास संपूर्ण प्रभार है इस नाते वे पहली बार वित्त मंत्री का दायित्व निभाते हुए अपना बजट पेश करेंगी

 पूरे देश की महिलाओं के लिए आज का दिन बेहद उत्सुकता के साथ ही उत्साह का भी है कि महिला वित्त मंत्री उनके लिए क्या सौगाते देंगी उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार में पहली बार इस मिथक को तोड़ा गया कि जाना माना अर्थशास्त्री ही वित्त मंत्री बनेगा क्योंकि इससे पहले कानूनी विशेषज्ञ अरुण जेटली को वित्त मंत्री बनाया गया था और अब रक्षा मंत्री रह चुकी निर्मला सीतारमण को वित्त मंत्री का भार सौंपा गया याने नरेंद्र मोदी यह मानते हैं कि वित्त मंत्री के लिए आर्थिक मामलों का विशेषज्ञ होना कतई आवश्यक नहीं है उनके लिए आर्थिक सलाहकारों की पूरी टीम उपलब्ध रहती है जो पूरा बजट बना कर देती है

 वित्त मंत्री को तो केवल उसे पेश ही करना होता है इसलिए यशवंत सिन्हा जैसे पूर्व  अनुभवी वित्त मंत्री को भी नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में कोई स्थान नहीं दिया था नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में कई प्रयोग किए और उसी का नतीजा है कि उन्होंने निर्मला सीतारमण जैसी वरिष्ठ भाजपा नेता को वित्त मंत्री का प्रभार सौंपा इससे पहले वे स्मृति ईरानी को भी शिक्षा और संस्कृति मंत्रालय सौंप चुके हैं जबकि स्मृति ईरानी की शैक्षणिक योग्यता पर प्रश्नचिन्ह लगते रहे हैं नरेंद्र मोदी के बारे में कहा जाता है कि वे अपने आईएएस अफसरों की टीम पर पूरा भरोसा रखते हैं और यही वजह है कि उन्होंने अपने विश्वसनीय आईएएस हर मंत्रालय में बिठाए हैं जो उन्हें सही और गलत निर्णयों की जानकारी भी देते रहते हैं

 इस बार का बजट भी नरेंद्र मोदी ने अपने हिसाब से तैयार कराया है नरेंद्र मोदी के दोबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद यह पहला बजट है जिसमें उनकी उन नीतियों के बारे में जानकारी मिलेगी जो आने वाले 5 सालों तक देश को प्रभावित करेगी हालांकि कल जो आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया गया था उस सर्वेक्षण में कई बातें बेहद चौंकाने वाली रही हैं सरकार ने खुद स्वीकार किया कि 2019 का वर्ष मंदी का रहा है

अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि जीडीपी 7% तक आ जाएगी मोदी सरकार के लिए खुशी की बात यह भी रही कि बैंकों का एनपीए 1% घटा लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि आने वाले समय में जीडीपी की दर को कैसे हासिल किया जाए इधर मनरेगा का बजट भी सरकार ने दुगना कर दिया है सरकार का मानना है कि मनरेगा का पैसा बाजार में आएगा और उससे बाजार की स्थिति सुधरेगी

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