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इस महिला ने खोला था हिंदू लड़कियों के लिए देश में पहला स्कूल

Posted on: 03 Jan 2019 13:50 by Ravi Alawa
इस महिला ने खोला था हिंदू लड़कियों के लिए देश में पहला स्कूल

आज भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती है. आज के समय में जो सरस्वती को जानते है लेकिन सावित्रीबाई फुले को नहीं जानते है उन्हें हम सावित्रीबाई फुले के बारें में बताने जा रहे है.

सावित्रीबाई फुले कोई साधारण महिला नहीं थी. इन्हें आज भी कई जगह पर मां सरस्वती की तरह पूजा जाता है. इनका जन्म महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगांव 3 जनवरी सन् 1831 को हुआ था. सावित्रीबाई के पिता का नाम खण्डोजी नेवसे और माता का नाम लक्ष्मीबाई था. सन् 1840 में मात्र नौ साल की उम्र में ही सावित्रीबाई का विवाह बारह वर्ष के ज्योतिबा फूले से हो गया था.

आपको बता दे कि, महात्मा ज्योतिबा फूले खुद एक महान विचारक, कार्यकर्ता, समाज सुधारक, लेखक,   और क्रांतिकारी थे. ज्योतिबा फूले की पत्नी सावित्रीबाई पढ़ी-लिखी नहीं थीं. शादी के बाद ज्योतिबा ने ही उन्हें पढ़ना-लिखना सिखाया था. बाद में सावित्रीबाई ने ही पिछड़े समाज की ही नहीं, बल्कि देश की प्रथम शिक्षिका होने का गौरव प्राप्त किया था.

भारत में एक समय ऐसा भी था जब लड़कियों की हालत बहुत ही दयनीय थी और उन्हें पढ़ने लिखने की इजाज़त तक नहीं थी. इस रीति को तोड़ने के लिए ज्योतिबा और सावित्रीबाई ने सन् 1848 में लड़कियों के लिए एक विद्यालय की स्थापना की थी.  यह भारत में लड़कियों के लिए खुलने वाला पहला महिला विद्यालय था.

सावित्रीबाई फुले ने पहले खुद शिक्षा ग्रहण की और फिर समाज की कुरीतियों को हराया, साथ ही उन्होंने भारत में लड़कियों के लिए शिक्षा के दरवाजे खोलने का काम भी किया है. सावित्रीबाई फुले ने अंग्रेजों के जमाने में हिन्दू समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ जो संघर्ष किया वह अभूतपूर्व और बेहद प्रेरणादायक है. ऐसी महान आत्मा को हम शत-शत नमन करते है.

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