सऊदी ड्रोन अटैक : भारत के पास है इतने लाख तेल भंडार की व्यवस्था

अमेरिका के बाद दुनिया में कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा भूमिगत भंडार चीन के पास है।

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नईदिल्ली : सऊदी अरब में अरामको के कच्चा तेल के प्लांटों पर हमले के बाद तेल आपूर्ति का संकट खड़ा हो सकता है और इसका असर भारत पर भी पड़ेगा। बताया जा रहा है कि तेल आपूर्ति संकट के बीच एक पखवाड़े के दौरान भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम पांच से छह रूपए तक महंगा हो सकता है। हालांकि भारत में कच्चे तेल के भंडारण की व्यवस्था कर रखी हैं। यदि आगामी दिनों में कच्चे तेल प्लांटों पर हमला होता है या आपूर्ति को लेकर कोई रूकावट आती है तो इसका पूरा असर भारत पर तत्काल नहीं पड़ेगा। क्योंकि सरकार के पास कच्चे तेल भंडारण की व्यवस्था हैं।

दरअसल सऊदी अरब ड्रोन हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वह तेल की मंदी की आपातकालीन स्थिति में बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए भूमिगत भंडार का इस्तेमाल करने के लिए तैयार हैं। क्योंकि तेल संकट से निपटने के लिए भारत ने भी तीन भूमिगत भंडार का निर्माण किया है, जिनमें करीब 53 लाख टन कच्चा तेल स्टोर किया जा सकता है। आपको बता दे कि भारत अपनी आवश्यकता का तीन चौथाई से अधिक कच्चा तेल आयात करता है।

इसी के चलते विदेश से आ रहे तेल के सप्लाई में जरा भी कमी भारत लिए भारी मुश्किल का कारण हो सकती है। बता दे कि इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड अब तक तीन जगहों पर अपने भंडार खोल चूका है, सबसे पहले विशाखापत्तनम में 13.3 लाख टन, उसके बाद मंगलोर (कर्नाटक) में 15 लाख टन और फिर पदुर (कर्नाटक) में 25 लाख टन क्षमता वाले भंडार विकसित कर चुकी है। लेकिन सबसे आगे अभी तक अमेरिका ही रहा हैं। अमेरिका के बाद दुनिया में कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा भूमिगत भंडार चीन के पास है। लेकिन इस मामले में जापान तीसरे स्थान पर कब्ज़ा करने वाला है।

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