नई दिल्ली। रतन टाटा के करीबी, टाटा समूह के दिग्गज और टाटा संस के पूर्व निदेशक आरके कृष्णकुमार का 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। आरके कृष्ण कुमार (RK Krishna kumar) टाटा समूह में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे है। कृष्णकुमार का जन्म केरल (Kerala) में हुआ था। वे एक भारतीय व्यापार कार्यकारी थे। कृष्णकुमार सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (Sir Dorabji Tata Trust) और सर रतन टाटा ट्रस्ट (Sir Ratan Tata Trust) में शामिल थे। पद्मश्री से सम्मानित कृष्णकुमार का निधन रविवार को मुंबई में हुआ।

जानकारी के मुताबिक, आरके कृष्णकुमार का निधन उनके घर पर दिल का दौरा पड़ने से हुआ है। रतन टाटा और टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) ने कृष्णकुमार के इस तरह चले जाने पर शोक व्यक्त किया है। वे टाटा ग्रुप की आतिथ्य शाखा ‘इंडियन होटल्स’ के प्रमुख पद पर भी रहे। पहले कृष्णकुमार टाटा ग्लोबल बेवरेजेज का नेतृत्व कर रहे थे और फिर वर्ष 2000 में वैश्विक चाय कंपनी टेटली के अधिग्रहण में अहम भूमिका निभाई। जिसने टाटा ग्लोबल बेवरेजेज को बेवरेज क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया।

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कृष्णकुमार को भारतीय व्यापार और उद्योग में उनके योगदान के लिए 2009 में भारत सरकार ने चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। अपने सहयोगी को याद करते हुए रतन टाटा (Ratan Tata) ने कहा, ‘मेरे दोस्त और सहयोगी आर के कृष्णकुमार के निधन पर मुझे जो दुख हुआ है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। समूह के भीतर और व्यक्तिगत रूप से हमने जो सौहार्दपूर्ण रिश्ते साझा किए, वो हमेशा मुझे याद रहेंगे। वह टाटा समूह के सच्चे सिपाही थे।

कृष्णकुमार के निधन पर केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने ट्वीट कर कहा, थलास्सेरी में जन्मे कृष्णकुमार ने राज्य के साथ समूह के संबंधों को मजबूत करने में मदद की। जानकारी के लिए आपको बता दे कि कृष्णकुमार को रतन टाटा के भरोसेमंद सहयोगियों में से एक माना जाता था। कृष्णकुमार, जो टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन टाटा के करीबी सहयोगी थे, टाटा की कंसल्टेंसी फर्म, आरएनटी एसोसिएट्स और समूह के धर्मार्थ ट्रस्टों में शामिल थे, जिनके पास टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

कृष्णकुमार 1963 में टाटा एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेज में शामिल हुए थे। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा कृष्ण कुमार टाटा के एक दिग्गज और समर्पित सदस्य थे जिन्होंने अपने जीवनकाल में टाटा समूह के लिए बहुत बड़ा योगदान दिया। कृष्णकुमार 2007 तक टाटा ग्रुप के साथ रहे। टाटा ग्रुप से रिटायर होने के बाद भी कृष्णकुमार टाटा संस के नियंत्रक शेयरधारक टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टी बने रहे।